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धान की फसल बचाने को जद्दोजदह कर रहे साढ़े तीन लाख किसान

Fri, 06 Sep 2019 01:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2019 01:30 AM IST
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Three and a half million farmers are struggling to save paddy crop
रायबरेली। इंद्रदेव के मेहरबान न होने से जिले के साढ़े तीन लाख किसानों को धान की फसल बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। हाल ये है कि सिल्ट जमा होने के कारण 100 नहरों से पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह तक पिछले साल की अपेक्षा इस बार 60 मिमी. कम बारिश हुई है। सितंबर माह शुरू हो गया है, लेकिन इस माह में भी बारिश अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रही है।
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बारिश नहीं हुई तो इसका असर न सिर्फ धान की फसल के उत्पादन पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले तोइया की फसल की बोवाई भी प्रभावित होगी। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में जिले में 228.63 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
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जबकि इस बार 168.60 मिमी. बारिश अगस्त माह तक हुई है। बारिश कम होने का असर धान की फसल पर पड़ रहा है। नहरों में पानी भरपूर मात्रा में नहीं छोड़ा जा रहा है। निजी नलकूप वाले किसान ही किसान फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं।
बछरावां, हरचंदपुर, महराजगंज, शिवगढ़, जगतपुर, ऊंचाहार, डलमऊ क्षेत्र में धान की पैदावार सबसे अधिक होती है। सरेनी, खीरों, सतांव, सलोन वाले क्षेत्रों में कम धान की फसल होती है।
यहां पर कुल 402 नहरें हैं। इसमें से 100 नहरों में सिल्ट जमा है, जिससे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन नहरों के चालू होने का दावा किया जा रहा है, वहां भी उसमें पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।
सरकारी नलकूप आधे खराब पड़े हैं। ऐसे में निजी नलकूपों के जरिए किसान धान की फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। तिल, मक्का, ज्वार की फसलें भी पानी बिना प्रभावित हैं।
जिला कृषि अधिकारी रविचंद्र प्रकाश ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार जरूर बारिश कम हुई है, लेकिन अभी तक इसका असर फसलों पर दिखाई नहीं पड़ रहा है। उम्मीद है कि सितंबर माह में बारिश होगी, जिससे धान की फसल के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

किसानों को सिंचाई की समस्या न हो, इस पर नजर रखी जा रही है। नोडल अधिकारी, सिंचाई विभाग हेमंत कुमार वर्मा ने कहा कि जिले में कुल 402 नहरें हैं।
इसमें से 302 नहरों के जरिए किसानों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। सिल्ट की वजह से 100 नहरों में पानी नहीं जा पा रहा है। बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य कराया जाएगा।
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