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Raebareli News: छह लाख पशुओं को लगेगा सुरक्षा कवच
Mon, 20 Jul 2026 02:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:03 AM IST
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रायबरेली। खुरपका-मुंहपका रोग से पशुओं को बचाने के लिए 22 जुलाई से महाअभियान चलेगा। छह लाख नौ हजार 345 पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। इसके लिए पशुपालन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। महाभियान के लिए कुल 54 टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर पशुओं को टीके लगाने का कार्य करेंगी।
दरअसल, बारिश के दौरान पशु खुरपका व मुंहपका बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। इस बीमारी में पशुओं को तेज बुखार आता है। उनके मुंह-जीभ और खुरों के बीच छाले या घाव हो जाते हैं, जिससे वे खाना-पीना छोड़ देते हैं और दूध उत्पादन में कमी आती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप द्विवेदी के मुताबिक खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान की शुरुआत 22 जुलाई से होगी। यह अभियान पांच सितंबर तक चलेगा। अभियान के दौरान 2,07,807 गोवंशीय पशु और 4,01,538 महिषवंशीय पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। इसके लिए कुल 54 टीमें ब्लॉक स्तर पर गठित की गई हैं।
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हर ब्लॉक पर तीन टीमें रहेंगी, जो 980 ग्राम पंचायतों में जाकर ईयर टैग लगाने के साथ निशुल्क टीकाकरण करेंगी। प्रत्येक टीम का नेतृत्व उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व पशु चिकित्साधिकारी करेंगे। चार माह से कम आयु के नवजात पशुओं तथा आठ माह से अधिक गर्भित पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जाएगा।
-- इनसेट--
पशुपालकों को उठाना पड़ता है नुकसान
खुरपका-मुंहपका एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो छूने, लार या संक्रमित चारे से अन्य जानवरों में बहुत तेजी से फैलती है। भारत सरकार द्वारा पशुधन को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए ''''''''राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पशुओं की जान जाने का खतरा रहता है। खासकर दुग्ध उत्पादन में कमी आने से इसका नुकसान पशुपालकों को उठाना पड़ता है।
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दरअसल, बारिश के दौरान पशु खुरपका व मुंहपका बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। इस बीमारी में पशुओं को तेज बुखार आता है। उनके मुंह-जीभ और खुरों के बीच छाले या घाव हो जाते हैं, जिससे वे खाना-पीना छोड़ देते हैं और दूध उत्पादन में कमी आती है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप द्विवेदी के मुताबिक खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान की शुरुआत 22 जुलाई से होगी। यह अभियान पांच सितंबर तक चलेगा। अभियान के दौरान 2,07,807 गोवंशीय पशु और 4,01,538 महिषवंशीय पशुओं को टीके लगाए जाएंगे। इसके लिए कुल 54 टीमें ब्लॉक स्तर पर गठित की गई हैं।
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हर ब्लॉक पर तीन टीमें रहेंगी, जो 980 ग्राम पंचायतों में जाकर ईयर टैग लगाने के साथ निशुल्क टीकाकरण करेंगी। प्रत्येक टीम का नेतृत्व उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व पशु चिकित्साधिकारी करेंगे। चार माह से कम आयु के नवजात पशुओं तथा आठ माह से अधिक गर्भित पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जाएगा।
पशुपालकों को उठाना पड़ता है नुकसान
खुरपका-मुंहपका एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो छूने, लार या संक्रमित चारे से अन्य जानवरों में बहुत तेजी से फैलती है। भारत सरकार द्वारा पशुधन को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए ''''''''राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पशुओं की जान जाने का खतरा रहता है। खासकर दुग्ध उत्पादन में कमी आने से इसका नुकसान पशुपालकों को उठाना पड़ता है।