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अब 5 से 11 साल के बच्चों का पड़ेगा फुल किराया
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:46 PM IST
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रायबरेली में गुरुवार को रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर ट्रेन के इंतजार में अपने परिवार के साथ बैठे अवधेश राजपूत।
- फोटो : अमर उजाला
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सुविधाओं को और बेहतर बनाने में पीछे चल रहे रेलवे ने आरक्षण में गुरुवार से नई व्यवस्था लागू कर मुसाफिरों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पहले जहां पांच से 11 साल तक बच्चों का आधा किराया पड़ता था। वहीं अब इन बच्चों का भी पूरा किराया देना पड़ेगा।
रायबरेली रेलवे स्टेशन से ही प्रतिदिन करीब 200-300 मुसाफिर रिजर्वेशन कराते हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब 20 फीसदी होती हैं। नई व्यवस्था से इन बच्चों के अभिभावकों पर अतिरिक्त किराए को बोझ पड़ेगा। इससे उनमें नाराजगी भी देखी गई।
रेलवे अफसरों के मुताबिक बच्चों का रिजर्वेशन कराते समय सीट कन्फर्म हुई तो पूरा किराया चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा वेटिंग की स्थिति में दो ऑप्शन दिए जाएंगे। इसमें बर्थ या नो बर्थ का ऑप्शन होगा।
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यदि बर्थ के साथ वेटिंग का टिकट लिया तो पूरा किराया देना होगा। अन्यथा नो बर्थ की वेटिंग पर आधा किराया ही पड़ेगा। यदि नो बर्थ की वेटिंग ली तो रास्ते में बच्चे की सीट कन्फर्म नहीं की जाएगी।
रेलवे की नई व्यवस्था से मुसाफिरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि किराया तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं सिर्फ नाम की मिल रहीं हैं। रायबरेली रेलवे स्टेशन पर परिवारीजनों के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे अवधेश राजपूत ने रेलवे के इस निर्णय को उचित नहीं बताया।
कहा कि स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा है। वहीं यात्रियों पर किराए का बोझ बढ़ाते जा रहे हैं। मुसाफिर विजय कुमार ने रिजर्वेशन व्यवस्था में बदलाव पर रोष जताया। उनका कहना है कि पहले सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। उसके बाद बढ़े किराए का बोझ डालना चाहिए।
ट्रेनों में यात्रियों को बैठने के लिए जगह नहीं मिलती। सुरक्षा का कोई ख्याल नहीं है। पेयजल से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए मुसाफिर बेहाल रहते हैं, लेकिन रेलवे सिर्फ अपना कोष मजबूत करने में जुटा है।
रायबरेली रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि रिजर्वेशन में पांच से 11 साल तक के बच्चों का पूरा किराया पड़ेगा। वेटिंग की दशा में भी यदि बर्थ चाहिए होगी तो पूरा किराया देना होगा। यदि बिना बर्थ के वेटिंग लेंगे तो आधा किराया पडे़गा, लेकिन फिर सीट पक्की नहीं होगी। यह व्यवस्था लागू हो गई है।
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रायबरेली रेलवे स्टेशन से ही प्रतिदिन करीब 200-300 मुसाफिर रिजर्वेशन कराते हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब 20 फीसदी होती हैं। नई व्यवस्था से इन बच्चों के अभिभावकों पर अतिरिक्त किराए को बोझ पड़ेगा। इससे उनमें नाराजगी भी देखी गई।
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रेलवे अफसरों के मुताबिक बच्चों का रिजर्वेशन कराते समय सीट कन्फर्म हुई तो पूरा किराया चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा वेटिंग की स्थिति में दो ऑप्शन दिए जाएंगे। इसमें बर्थ या नो बर्थ का ऑप्शन होगा।
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यदि बर्थ के साथ वेटिंग का टिकट लिया तो पूरा किराया देना होगा। अन्यथा नो बर्थ की वेटिंग पर आधा किराया ही पड़ेगा। यदि नो बर्थ की वेटिंग ली तो रास्ते में बच्चे की सीट कन्फर्म नहीं की जाएगी।
रेलवे की नई व्यवस्था से मुसाफिरों में नाराजगी है। उनका कहना है कि किराया तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं सिर्फ नाम की मिल रहीं हैं। रायबरेली रेलवे स्टेशन पर परिवारीजनों के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे अवधेश राजपूत ने रेलवे के इस निर्णय को उचित नहीं बताया।
कहा कि स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा है। वहीं यात्रियों पर किराए का बोझ बढ़ाते जा रहे हैं। मुसाफिर विजय कुमार ने रिजर्वेशन व्यवस्था में बदलाव पर रोष जताया। उनका कहना है कि पहले सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। उसके बाद बढ़े किराए का बोझ डालना चाहिए।
ट्रेनों में यात्रियों को बैठने के लिए जगह नहीं मिलती। सुरक्षा का कोई ख्याल नहीं है। पेयजल से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए मुसाफिर बेहाल रहते हैं, लेकिन रेलवे सिर्फ अपना कोष मजबूत करने में जुटा है।
रायबरेली रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि रिजर्वेशन में पांच से 11 साल तक के बच्चों का पूरा किराया पड़ेगा। वेटिंग की दशा में भी यदि बर्थ चाहिए होगी तो पूरा किराया देना होगा। यदि बिना बर्थ के वेटिंग लेंगे तो आधा किराया पडे़गा, लेकिन फिर सीट पक्की नहीं होगी। यह व्यवस्था लागू हो गई है।