{"_id":"62bb3d82bfe7eb7ee4454736","slug":"no-opd-raibaraily-news-lko637260542","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओपीडी कक्ष में लटके रहे ताले, इलाज को पड़े लाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओपीडी कक्ष में लटके रहे ताले, इलाज को पड़े लाले
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से उतर गईं हैं। मंगलवार को अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष में ताले लटके रहे और मरीज इलाज कराने के लिए भटकते रहे।
हाल ये रहा कि दो डॉक्टरों को छोड़कर अन्य कोई डॉक्टर नहीं रहा। इससे उमस भरी गर्मी में मरीज बेहाल रहे। कुछ घंटे इंतजार करने के बाद अधिकतर मरीजों को घरों को वापस लौटना पड़ा। दिनोंदिन अस्पताल की व्यवस्था चरमराती जा रही है, जिसका खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है।
उमस भरी गर्मी को देखते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार, डायरिया, पेट दर्द समेत अन्य बीमारी से संबंधित मरीज इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
मंगलवार को ओपीडी में फिजीशियन जेके लाल एवं डॉ.प्रदीप ही ओपीडी कक्ष में बैठे नजर आए। शेष ओपीडी के कक्षों में ताले लटके रहे। चिकित्सकों के न होने के कारण काफी देर तक मरीज उनका इंतजार करते रहे। होते करते काफी समय बीत गया, लेकिन चिकित्सक ओपीडी के कक्षों में नहीं पहुंचे।
मुंशीगंज निवासी दिनेश कुुमार को कई दिन से बुखार आ रहा था। फिजीशियन को दिखाने आए थे, लेकिन चिकित्सक के न मिलने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
सतांव निवासी अंबुज कुमार, ऊंचाहार के संतोष गुप्ता ने बताया कि उन्हें पेट दर्द हो रहा है। चिकित्सक के न होने से इलाज नहीं हो पाया है। इसी तरह अन्य मरीज भी चिकित्सकों के इंतजार में बैठे रहे। बाद में चिकित्सक के न आने पर बैरंग घरों को लौट गए। मरीजों का कहना है कि अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से उतर गई हैं।
इलाज के नाम पर चिकित्सक मनमानी कर रहे हैं। उधर, सीएमएस डॉ.नीता साहू का कहना है कि सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह समय से ओपीडी कक्षों में पहुंचकर मरीजों का इलाज करें। किसी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विज्ञापन
हाल ये रहा कि दो डॉक्टरों को छोड़कर अन्य कोई डॉक्टर नहीं रहा। इससे उमस भरी गर्मी में मरीज बेहाल रहे। कुछ घंटे इंतजार करने के बाद अधिकतर मरीजों को घरों को वापस लौटना पड़ा। दिनोंदिन अस्पताल की व्यवस्था चरमराती जा रही है, जिसका खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
उमस भरी गर्मी को देखते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार, डायरिया, पेट दर्द समेत अन्य बीमारी से संबंधित मरीज इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
मंगलवार को ओपीडी में फिजीशियन जेके लाल एवं डॉ.प्रदीप ही ओपीडी कक्ष में बैठे नजर आए। शेष ओपीडी के कक्षों में ताले लटके रहे। चिकित्सकों के न होने के कारण काफी देर तक मरीज उनका इंतजार करते रहे। होते करते काफी समय बीत गया, लेकिन चिकित्सक ओपीडी के कक्षों में नहीं पहुंचे।
मुंशीगंज निवासी दिनेश कुुमार को कई दिन से बुखार आ रहा था। फिजीशियन को दिखाने आए थे, लेकिन चिकित्सक के न मिलने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
सतांव निवासी अंबुज कुमार, ऊंचाहार के संतोष गुप्ता ने बताया कि उन्हें पेट दर्द हो रहा है। चिकित्सक के न होने से इलाज नहीं हो पाया है। इसी तरह अन्य मरीज भी चिकित्सकों के इंतजार में बैठे रहे। बाद में चिकित्सक के न आने पर बैरंग घरों को लौट गए। मरीजों का कहना है कि अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से उतर गई हैं।
इलाज के नाम पर चिकित्सक मनमानी कर रहे हैं। उधर, सीएमएस डॉ.नीता साहू का कहना है कि सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह समय से ओपीडी कक्षों में पहुंचकर मरीजों का इलाज करें। किसी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।