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फ्रंटलाइन कोरोना वारियर तनाव से बचें, करें सेल्फ केयर
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रायबरेली। कोरोना से जंग में जुटे फ्रंटलाइन वारियर्स को भी अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखना जरूरी है, ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को सेहतमंद बनाने के साथ ही उनको नई जिंदगी दे सकें।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी का कहना है कि इलाज में जुटे चिकित्सक, नर्स, आशा, एएनएम, लैब टेक्निशियन, एंबुलेंस के कर्मचारी व अन्य इस वक्त अपने घर-परिवार के साथ ही खुद की परवाह किए बगैर कई-कई दिन लगातार ड्यूटी कर रहे हैं।
ऐसे में मनोबल ऊंचा रखने और तनाव से बचने के लिए जरूरी है कि वह भी अपनी देखभाल का ख्याल रखें, और ऐसा काम करें जिससे मानसिक संतुलन दुरुस्त रखने के लिए जोश आने वाले काम करें।
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उन्होंने कहा कि दिनचर्या का पालन करें। ड्यूटी के अनुसार वह अपनी एक दिनचर्या अवश्य तय कर लें ताकि लंबे समय तक कोरोना के खिलाफ चलने वाली जंग में अपना सक्रिय योगदान दे सकें। अनियमित दिनचर्या के चलते हमेशा थकान और ऊबन महसूस कर सकते हैं।
रिश्तेदारों- दोस्तों के संपर्क में रहें। जब भी वक्त मिले तो फोन पर बात कर लें। कुछ देर कोरोना से इतर की बातें करें। पेशे से इतर जो भी शौक हैं। उनके माध्यम से भी अपने तनावमुक्त रख सकते हैं। दबाव में कतई काम न करें।
एम्स के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी का कहना है कि यदि दो लोग आमने-सामने खड़े हैं और एक ने मास्क नहीं लगाया है तो वह 70 प्रतिशत तक संक्रमण दे सकता है। यदि मास्क दोनों लगाए हैं तो खतरा 10 प्रतिशत ही बचता है, इसलिए हर कोई मास्क जरूर लगाए, क्योंकि जान है तो जहान है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले स्वयं के साथ ही अपने घर परिवार के लोगों को भी मौत के मुंह में डाल रहे हैं। कहा कि मास्क न पहनना बहादुरी नहीं है, क्योंकि अब तक कोरोना की दवा नहीं है। इससे बचे रहना ही बचाव है, इसलिए हर कोई मास्क लगाए और लोगों से दो गज की दूरी बनाए रखे।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी का कहना है कि इलाज में जुटे चिकित्सक, नर्स, आशा, एएनएम, लैब टेक्निशियन, एंबुलेंस के कर्मचारी व अन्य इस वक्त अपने घर-परिवार के साथ ही खुद की परवाह किए बगैर कई-कई दिन लगातार ड्यूटी कर रहे हैं।
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ऐसे में मनोबल ऊंचा रखने और तनाव से बचने के लिए जरूरी है कि वह भी अपनी देखभाल का ख्याल रखें, और ऐसा काम करें जिससे मानसिक संतुलन दुरुस्त रखने के लिए जोश आने वाले काम करें।
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उन्होंने कहा कि दिनचर्या का पालन करें। ड्यूटी के अनुसार वह अपनी एक दिनचर्या अवश्य तय कर लें ताकि लंबे समय तक कोरोना के खिलाफ चलने वाली जंग में अपना सक्रिय योगदान दे सकें। अनियमित दिनचर्या के चलते हमेशा थकान और ऊबन महसूस कर सकते हैं।
रिश्तेदारों- दोस्तों के संपर्क में रहें। जब भी वक्त मिले तो फोन पर बात कर लें। कुछ देर कोरोना से इतर की बातें करें। पेशे से इतर जो भी शौक हैं। उनके माध्यम से भी अपने तनावमुक्त रख सकते हैं। दबाव में कतई काम न करें।
एम्स के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी का कहना है कि यदि दो लोग आमने-सामने खड़े हैं और एक ने मास्क नहीं लगाया है तो वह 70 प्रतिशत तक संक्रमण दे सकता है। यदि मास्क दोनों लगाए हैं तो खतरा 10 प्रतिशत ही बचता है, इसलिए हर कोई मास्क जरूर लगाए, क्योंकि जान है तो जहान है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले स्वयं के साथ ही अपने घर परिवार के लोगों को भी मौत के मुंह में डाल रहे हैं। कहा कि मास्क न पहनना बहादुरी नहीं है, क्योंकि अब तक कोरोना की दवा नहीं है। इससे बचे रहना ही बचाव है, इसलिए हर कोई मास्क लगाए और लोगों से दो गज की दूरी बनाए रखे।