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महंगाई की मार से हर कोई परेशान
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Dec 2015 11:22 PM IST
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वहीं तेल और मसालों में महंगाई ने खाने का मजा बिगाड़ दिया। महंगाई के कारण ही हरी सब्जियों से लोगों को तौबा करनी पड़ी। गृहणियां घर चलाने के लिए पूरे साल कटौती करती रहीं।
किसान बेहाल रहा। खाद-बीज के दाम ऐसे बढ़े कि फिर उतरने का नाम नहीं लिया। कीटनाशक दवाओं में भी 20 फीसदी की महंगाई आई। नौकरीपेशा, व्यापारी और किसान पूरे साल महंगाई को कोसते रहे।
महंगाई से महिलाओं को खासा परेशानी हुई। गृहणी ज्योति श्रीवास्तव, सीमा, माया देवी, समाजसेवी अर्चना गुप्ता कहती हैं कि महंगाई ने खाने का जायका बिगाड़ दिया। इससे तो ठीक गुजरा हुआ वर्ष 2014 था।
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कम से कम पूरा परिवार पौस्टिक और स्वादिष्ट खाना तो खा लेता था। अब तो हरी सब्जियां हो या तेल मसाले हर चीज में महंगाई समाई हुई है। न जाने महंगाई से कब राहत मिलेगी।
व्यापारी नीरज कुमार, भानू प्रकाश, गंगा सेवक मिश्र, फिरोज ने कहा कि यह पूरा साल तो महंगाई के नाम रहा। लगभग हर तबका परेशान रहा। सबसे ज्यादा असर निचले वर्ग पर पड़ा, जो हर रोज कमाते और खाते हैं।
लोगों को खरीदारी में कंजूसी करनी पड़ी, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। उम्मीद है कि आने वाला साल 2016 आम जनता के जख्मों पर मरहम लगाएगा और महंगाई रुकेगी।
मौसम का प्रकोप झेलने वाले किसानों के जख्मों पर भी यह साल नमक रगड़ गया। आशीष कुमार, प्रेम शंकर, प्रहलाद यादव, मनोज कुमार का कहना है कि ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश और इसके बाद महंगाई की मार ने कमर तोड़ दी।
खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं के दामों में बढ़ोत्तरी से खेती भी महंगी हो गई। आशा है कि आने वाला साल राहत देगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
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किसान बेहाल रहा। खाद-बीज के दाम ऐसे बढ़े कि फिर उतरने का नाम नहीं लिया। कीटनाशक दवाओं में भी 20 फीसदी की महंगाई आई। नौकरीपेशा, व्यापारी और किसान पूरे साल महंगाई को कोसते रहे।
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महंगाई से महिलाओं को खासा परेशानी हुई। गृहणी ज्योति श्रीवास्तव, सीमा, माया देवी, समाजसेवी अर्चना गुप्ता कहती हैं कि महंगाई ने खाने का जायका बिगाड़ दिया। इससे तो ठीक गुजरा हुआ वर्ष 2014 था।
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कम से कम पूरा परिवार पौस्टिक और स्वादिष्ट खाना तो खा लेता था। अब तो हरी सब्जियां हो या तेल मसाले हर चीज में महंगाई समाई हुई है। न जाने महंगाई से कब राहत मिलेगी।
व्यापारी नीरज कुमार, भानू प्रकाश, गंगा सेवक मिश्र, फिरोज ने कहा कि यह पूरा साल तो महंगाई के नाम रहा। लगभग हर तबका परेशान रहा। सबसे ज्यादा असर निचले वर्ग पर पड़ा, जो हर रोज कमाते और खाते हैं।
लोगों को खरीदारी में कंजूसी करनी पड़ी, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। उम्मीद है कि आने वाला साल 2016 आम जनता के जख्मों पर मरहम लगाएगा और महंगाई रुकेगी।
मौसम का प्रकोप झेलने वाले किसानों के जख्मों पर भी यह साल नमक रगड़ गया। आशीष कुमार, प्रेम शंकर, प्रहलाद यादव, मनोज कुमार का कहना है कि ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश और इसके बाद महंगाई की मार ने कमर तोड़ दी।
खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं के दामों में बढ़ोत्तरी से खेती भी महंगी हो गई। आशा है कि आने वाला साल राहत देगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।