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दो हजार में बिक रहा 350 रुपये कीमत का ऑक्सीमीटर
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रायबरेली। कोरोना की रफ्तार बढ़ने से जिले में दवाओं की डिमांड बढ़ गई है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कोरोना संबंधी कई दवाओं और उपकरणों की किल्लत बढ़ती जा रही है। 350 रुपये में मिलने वाले पल्स ऑक्सीमीटर दो हजार रुपये में खुलेआम बेचा जा रहा है।
जिले में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की खस्ता हालत के कारण ज्यादातर मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। इन मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है।
किल्लत के चलते उन्हें दवा नहीं मिल पा रही है। अगर मिलती है तो उसके दाम दोगुने पहुंच गए हैं। कोविड मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर की सबसे अधिक जरूरत पड़ रही है। इसके जरिये मरीज अपनी ऑक्सीजन नाप सकता है। अभी तक आए मरीजों में अधिकतर में सांस लेने में दिक्कत की समस्या आती है।
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एक मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि माह भर पहले पल्स ऑक्सीमीटर 350 से 500 रुपये में मिल जाता था, लेकिन कोरोना के बढ़ते कहर के बीच अब प्लस ऑक्सीमीटर की मांग तेजी से बढ़ गई है। सामान लखनऊ से लाया जाता था। कई दिनों से मेडिकल मार्केट बंद रहने से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हम लोगों ही ब्लैक में मिल रहा है। अब बाजार में ऑक्सीमीटर 1500 से 2000 रुपये के बीच मिल रहा है।
एन-95 मास्क के दाम भी हुए दोगुने
कोरोना में एन-95 मास्क सबसे कारगर माना जाता है। पहले यह 50 रुपये में मिल जाता था। अब डिमांड बढ़ने के बाद दुकानों पर मास्क नहीं मिल पा रहे हैं। मास्क दोगुने रेट में बेचे जा रहे हैं। फेस मास्क पहले 30 से 50 रुपये में मिल जाता था। अब यह भी करीब 60 से 80 रुपये में बिक रहा है। सैनिटाइजर के रेट भी आसमान छू रहे हैं।
मांग बढ़ी पर कोई खास दिक्कत नहीं
केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशीष त्रिपाठी का कहना है कि जिले में दवाओं को कोई खास दिक्कत नहीं है। लखनऊ में बाजार बंदी के कारण कुछ असर जरूर हुआ है। डिमांड बढ़ गई है। सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि तय रेट में ही दवाएं, मास्क व अन्य सामान लोगों को उपलब्ध कराएं।
जिले में कोविड संबंधी दवाएं मौजूद हैं। कहीं पर भी कोई कमी नहीं है। अगर कोई कालाबाजारी करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पैरासिटामॉल दवाओं की कमी जल्द दूर होगी।
अजय कुमार संतोषी, ड्रग इंस्पेक्टर
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जिले में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की खस्ता हालत के कारण ज्यादातर मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। इन मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है।
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किल्लत के चलते उन्हें दवा नहीं मिल पा रही है। अगर मिलती है तो उसके दाम दोगुने पहुंच गए हैं। कोविड मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर की सबसे अधिक जरूरत पड़ रही है। इसके जरिये मरीज अपनी ऑक्सीजन नाप सकता है। अभी तक आए मरीजों में अधिकतर में सांस लेने में दिक्कत की समस्या आती है।
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एक मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि माह भर पहले पल्स ऑक्सीमीटर 350 से 500 रुपये में मिल जाता था, लेकिन कोरोना के बढ़ते कहर के बीच अब प्लस ऑक्सीमीटर की मांग तेजी से बढ़ गई है। सामान लखनऊ से लाया जाता था। कई दिनों से मेडिकल मार्केट बंद रहने से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हम लोगों ही ब्लैक में मिल रहा है। अब बाजार में ऑक्सीमीटर 1500 से 2000 रुपये के बीच मिल रहा है।
एन-95 मास्क के दाम भी हुए दोगुने
कोरोना में एन-95 मास्क सबसे कारगर माना जाता है। पहले यह 50 रुपये में मिल जाता था। अब डिमांड बढ़ने के बाद दुकानों पर मास्क नहीं मिल पा रहे हैं। मास्क दोगुने रेट में बेचे जा रहे हैं। फेस मास्क पहले 30 से 50 रुपये में मिल जाता था। अब यह भी करीब 60 से 80 रुपये में बिक रहा है। सैनिटाइजर के रेट भी आसमान छू रहे हैं।
मांग बढ़ी पर कोई खास दिक्कत नहीं
केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशीष त्रिपाठी का कहना है कि जिले में दवाओं को कोई खास दिक्कत नहीं है। लखनऊ में बाजार बंदी के कारण कुछ असर जरूर हुआ है। डिमांड बढ़ गई है। सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि तय रेट में ही दवाएं, मास्क व अन्य सामान लोगों को उपलब्ध कराएं।
जिले में कोविड संबंधी दवाएं मौजूद हैं। कहीं पर भी कोई कमी नहीं है। अगर कोई कालाबाजारी करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पैरासिटामॉल दवाओं की कमी जल्द दूर होगी।
अजय कुमार संतोषी, ड्रग इंस्पेक्टर