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अमृत सरोवर के 13 करोड़ के इस्टीमेट लौटाए, 18 बीडीओ को चेतावनी
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रायबरेली। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल अमृत सरोवर योजना में जिले के खंड विकास अधिकारी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं।
74 अधूरे इस्टीमेट बनाकर ब्लॉकों ने उपलब्ध कराए जिनमें 30 ही पास होने लायक मिले। शेष 13 करोड़ के 44 इस्टीमेटों को ब्लॉकों को वापस कर दिया गया है।
लगातार मनमानी बरतने पर सभी 18 खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी की गई है। सभी को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शहरों की ही तरह शासन गांवों में भी अमृत सरोवरों की स्थापना करवा रहा है। तालाब की व्यवस्था के साथ सजाने संवारने का काम भी मनरेगा से कराया जाना है।
एक-एक अमृत सरोवर में 25 से 35 लाख रुपये खर्च होंगे। सभी 18 ब्लॉकों में कम से कम पांच-पांच स्थलों पर अमृत सरोवर स्थापित कराने के लिए इस्टीमेट पास कराकर काम शुरू कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने मनमानी करते हुए इस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराए। अधिकारियों ने दबाव बनाया तो 74 इस्टीमेट पास होने के लिए उपलब्ध करवाए गए।
लघु सिंचाई कार्यालय में इस्टीमेटों का परीक्षण किया गया तो 74 में करीब 44 इस्टीमेट में बड़ी खामियां मिली। 30 इस्टीमेटों को पास किया गया है। लगातार अमृत सरोवर के काम को लेकर लापरवाही बरतने पर उपायुक्त मनरेगा ने जगतपुर, ऊंचाहार, सलोन, रोहनियां, दीनशाह गौरा, डीह, बछरावां, हरचंदपुर, शिवगढ़, लालगंज, सरेनी, डलमऊ, खीरों, अमावां सहित सभी 18 ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी कर दी है।
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खंड विकास अधिकारियों को तीन दिन के अंदर प्रगति में सुधार लाते हुए मानक के अनुरूप इस्टीमेट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा पढ़ी करने की चेतावनी दी गई है।
अमृत सरोवर योजना में लापरवाही बरतने पर सभी 18 खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी दी गई है। सरोवरों की स्थापना के लिए 74 इस्टीमेट आए थे, जिसमें खामियां होने के कारण 44 वापस कर दिए गए हैं। तीन दिन में प्रगति में सुधार न लाने पर शासन को लिखा पढ़ी की जाएगी। इसके लिए बीडीओ स्वयं जिम्मेदार होंगे।
- जीपी कुशवाहा, उपायुक्त मनरेगा
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74 अधूरे इस्टीमेट बनाकर ब्लॉकों ने उपलब्ध कराए जिनमें 30 ही पास होने लायक मिले। शेष 13 करोड़ के 44 इस्टीमेटों को ब्लॉकों को वापस कर दिया गया है।
लगातार मनमानी बरतने पर सभी 18 खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी की गई है। सभी को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शहरों की ही तरह शासन गांवों में भी अमृत सरोवरों की स्थापना करवा रहा है। तालाब की व्यवस्था के साथ सजाने संवारने का काम भी मनरेगा से कराया जाना है।
एक-एक अमृत सरोवर में 25 से 35 लाख रुपये खर्च होंगे। सभी 18 ब्लॉकों में कम से कम पांच-पांच स्थलों पर अमृत सरोवर स्थापित कराने के लिए इस्टीमेट पास कराकर काम शुरू कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने मनमानी करते हुए इस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराए। अधिकारियों ने दबाव बनाया तो 74 इस्टीमेट पास होने के लिए उपलब्ध करवाए गए।
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लघु सिंचाई कार्यालय में इस्टीमेटों का परीक्षण किया गया तो 74 में करीब 44 इस्टीमेट में बड़ी खामियां मिली। 30 इस्टीमेटों को पास किया गया है। लगातार अमृत सरोवर के काम को लेकर लापरवाही बरतने पर उपायुक्त मनरेगा ने जगतपुर, ऊंचाहार, सलोन, रोहनियां, दीनशाह गौरा, डीह, बछरावां, हरचंदपुर, शिवगढ़, लालगंज, सरेनी, डलमऊ, खीरों, अमावां सहित सभी 18 ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी कर दी है।
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खंड विकास अधिकारियों को तीन दिन के अंदर प्रगति में सुधार लाते हुए मानक के अनुरूप इस्टीमेट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा पढ़ी करने की चेतावनी दी गई है।
अमृत सरोवर योजना में लापरवाही बरतने पर सभी 18 खंड विकास अधिकारियों को कठोर चेतावनी दी गई है। सरोवरों की स्थापना के लिए 74 इस्टीमेट आए थे, जिसमें खामियां होने के कारण 44 वापस कर दिए गए हैं। तीन दिन में प्रगति में सुधार न लाने पर शासन को लिखा पढ़ी की जाएगी। इसके लिए बीडीओ स्वयं जिम्मेदार होंगे।
- जीपी कुशवाहा, उपायुक्त मनरेगा