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आध्ाी आबादी को सुरक्षा की गारंटी दिलाने वाला हो सांसद
Raebareli
Updated Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
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रायबरेली। लंका में रावण की शंका, घर में राम का डर, सीता बनकर चैन न पाई नारी जीवन भर। हमारा सांसद कैसा होना चाहिए और उनकी प्रत्याशियों से क्या अपेक्षाएं हैं, इस सवाल पर असुरक्षा के बीच रह रही महिलाएं जब एक मंच पर आईं तो कुछ इन्हीं पंक्तियों को कहते हुए अपना दर्द बयां किया। बढ़ते अपराध, महंगाई और राजनीतिक दलों से उपेक्षा आदि मुद्दों पर महिलाएं एक दिखीं। असुरक्षा, भ्रूण हत्या, शिक्षा का स्तर ठीक न होने पर आवाज बुलंद की। चेन स्नैचिंग, दुराचार, दहेज हत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की पुरजोर वकालत भी की। कहा कि हमारा सांसद ऐसा हो, जो इन समस्याओं को दूर कराए। उनका मानना है कि महिलाएं एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। बिजली, पानी, सड़क की समस्याएं भी जोरशोर से उठाईं। इस बार के चुनाव में बढ़-चढ़कर वोट डालने का आह्वान किया। साथ ही गांवों में महिलाओं के लिए प्रसाधन बनवाने की बात पर भी जोर दिया।
शहर के एसजेएस स्कूल में शनिवार को ‘अमर उजाला सरोकार’ कार्यक्रम में चिकित्सा, शिक्षा, समाजसेवा, कामकाजी महिलाओं के साथ ही गृहणियों को भी आमंत्रित किया गया। उनका सांसद कैसा हो, उनकी अपेक्षाएं क्या हैं, पर परिचर्चा हुई, जिसमें आधी आबादी ने खुलकर और पुरजोर ढंग से अपनी बात कही। महिलाओं का कहना था कि आज सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा है। हमारा सांसद ऐसा हो, जो महिलाओं की सुरक्षा दिलाए और भ्रूण हत्या, दुराचार जैसे अपराध पर सख्ती से रोक लगाए। ऐसा सख्त कानून बनाए, ताकि दुराचार की घटना को अंजाम देने की कोई हिम्मत न जुटा सका। महिलाओं ने बढ़ती आपराधिक घटनाओं के लिए गरीबी, मदिरापान और पिक्चरों में एक्सपोजर को भी जिम्मेदार ठहराया। कहा कि आज ऐसी पिक्चरें आती हैं, जो घर के सदस्यों के साथ बैठकर नहीं देखी जा सकती। बावजूद ऐसे मूवी को सेंसर बोर्ड पास कर दे रहा है। उनका मानना है कि गरीबी के चलते भी लोग आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसलिए गरीबी दूर करने के ठोस कदम उठाए जाएं। शहर में महिला थाना खुलने को अच्छा कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि देहात क्षेत्रों में भी महिला थाने खोले जाएं। ऐसा होने से महिलाएं खुलकर अपनी बात बता सकेंगी, जिससे उनकी समस्या का निराकरण हो सकेगा। सांसद ऐसा हो, जिनसे महिलाएं आसानी से मिलकर अपनी बात कह सकें।
उनका मानना है कि महिलाएं अपनी लड़ाई स्वयं लड़ सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि महिला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और शिक्षा की तरफ ध्यान दें। महिलाओं का कहना है कि जिले को वीवीआईपी कहा जाता है, लेकिन यहां पर मूलभूत समस्याओं की कमी है। पानी, बिजली, रोजगार नहीं है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। पटरी पर रहने वालों के लिए आवास की व्यवस्था हो। हमारा सांसद ऐसा हो, जो इन मूलभूत समस्याओं को दूर कराए। सांसद ऐसा भी हो, जो हमें आसानी से उपलब्ध हो। सांसद निधि के कार्यों को कराने के लिए स्थानीय स्तर पर एक टीम गठित की जाए, ताकि जो कार्य हों, वह ठीक ढंग से कराए जा सकें। कार्यों की मॉनीटरिंग कराई जाए। सांसद अपराधी प्रवृत्ति का न हो। महिलाओं ने खराब स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी भड़ास निकाली। उनका कहना था कि जिले में महिलाओं के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। सांसद ऐसा हो, जो इसकी व्यवस्था कराए। महिलाओं की अच्छी शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज खुलवाए जाने की आवाज भी उठाई। बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर महिलाओं ने तीखी प्रतिक्रिया बयां की। कहा कि महंगाई से गरीबों को दो वक्त की रोजीरोटी नहीं मिल पा रही है। सांसद ऐसा हो, जो गरीबी दूर करने के लिए प्रयास करे। उद्योग धंधे लगवाए, ताकि लोगों को रोजगार मिले। शहर की सीवर समस्या के लिए नगर पालिका को दोषी ठहराया। कहा कि सांसद से पहले सीवर की समस्या दूर कराने के लिए नगर पालिका के अधिकारियों को आगे आना चाहिए। बरसात में जलभराव की समस्या दूर हो। बारिश में घरों में पानी भर जाता है, जिससे सबसे ज्यादा महिलाओं को ही जूझना पड़ता है।
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शहर के एसजेएस स्कूल में शनिवार को ‘अमर उजाला सरोकार’ कार्यक्रम में चिकित्सा, शिक्षा, समाजसेवा, कामकाजी महिलाओं के साथ ही गृहणियों को भी आमंत्रित किया गया। उनका सांसद कैसा हो, उनकी अपेक्षाएं क्या हैं, पर परिचर्चा हुई, जिसमें आधी आबादी ने खुलकर और पुरजोर ढंग से अपनी बात कही। महिलाओं का कहना था कि आज सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा है। हमारा सांसद ऐसा हो, जो महिलाओं की सुरक्षा दिलाए और भ्रूण हत्या, दुराचार जैसे अपराध पर सख्ती से रोक लगाए। ऐसा सख्त कानून बनाए, ताकि दुराचार की घटना को अंजाम देने की कोई हिम्मत न जुटा सका। महिलाओं ने बढ़ती आपराधिक घटनाओं के लिए गरीबी, मदिरापान और पिक्चरों में एक्सपोजर को भी जिम्मेदार ठहराया। कहा कि आज ऐसी पिक्चरें आती हैं, जो घर के सदस्यों के साथ बैठकर नहीं देखी जा सकती। बावजूद ऐसे मूवी को सेंसर बोर्ड पास कर दे रहा है। उनका मानना है कि गरीबी के चलते भी लोग आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसलिए गरीबी दूर करने के ठोस कदम उठाए जाएं। शहर में महिला थाना खुलने को अच्छा कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि देहात क्षेत्रों में भी महिला थाने खोले जाएं। ऐसा होने से महिलाएं खुलकर अपनी बात बता सकेंगी, जिससे उनकी समस्या का निराकरण हो सकेगा। सांसद ऐसा हो, जिनसे महिलाएं आसानी से मिलकर अपनी बात कह सकें।
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उनका मानना है कि महिलाएं अपनी लड़ाई स्वयं लड़ सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि महिला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और शिक्षा की तरफ ध्यान दें। महिलाओं का कहना है कि जिले को वीवीआईपी कहा जाता है, लेकिन यहां पर मूलभूत समस्याओं की कमी है। पानी, बिजली, रोजगार नहीं है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। पटरी पर रहने वालों के लिए आवास की व्यवस्था हो। हमारा सांसद ऐसा हो, जो इन मूलभूत समस्याओं को दूर कराए। सांसद ऐसा भी हो, जो हमें आसानी से उपलब्ध हो। सांसद निधि के कार्यों को कराने के लिए स्थानीय स्तर पर एक टीम गठित की जाए, ताकि जो कार्य हों, वह ठीक ढंग से कराए जा सकें। कार्यों की मॉनीटरिंग कराई जाए। सांसद अपराधी प्रवृत्ति का न हो। महिलाओं ने खराब स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी भड़ास निकाली। उनका कहना था कि जिले में महिलाओं के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। सांसद ऐसा हो, जो इसकी व्यवस्था कराए। महिलाओं की अच्छी शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज खुलवाए जाने की आवाज भी उठाई। बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर महिलाओं ने तीखी प्रतिक्रिया बयां की। कहा कि महंगाई से गरीबों को दो वक्त की रोजीरोटी नहीं मिल पा रही है। सांसद ऐसा हो, जो गरीबी दूर करने के लिए प्रयास करे। उद्योग धंधे लगवाए, ताकि लोगों को रोजगार मिले। शहर की सीवर समस्या के लिए नगर पालिका को दोषी ठहराया। कहा कि सांसद से पहले सीवर की समस्या दूर कराने के लिए नगर पालिका के अधिकारियों को आगे आना चाहिए। बरसात में जलभराव की समस्या दूर हो। बारिश में घरों में पानी भर जाता है, जिससे सबसे ज्यादा महिलाओं को ही जूझना पड़ता है।
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