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Raebareli News: 22 दिनों में 300 लोगों को कुत्तों ने काटा
Mon, 23 Feb 2026 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:12 AM IST
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रायबरेली। मौसम बदलने के साथ कुत्ते हमलावर हो गए हैं। रायबरेली शहर, लालगंज और जगतपुर में कुत्तों का सबसे अधिक प्रकोप है। लोग अपने बच्चों को सड़क पर अकेले नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही बच्चों ने पार्क में भी खेलना बंद कर दिया। कुत्तों के हमले से लोगों में दहशत है। हाल यह है कि फरवरी में सबसे अधिक 300 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया है।
छह दिन पूर्व जिला अस्पताल में एक ही दिन में 70 लोग कुत्तों के काटने के बाद एआरवी लगवाने आए थे। इसमें राजीव (21), राम कुमार (24), सावित्री (13), अनुज (76), सरिता (14), सुमित्रा देवी (38), आसमा (37) सहित 70 लोग शामिल थे।
लालगंज में सोमवार को 38 लोगों को कुत्तों ने काटा था। इसी तरह 10 फरवरी को अलग-अलग गांवों में कुत्तों ने 35 लोगों को काटकर घायल कर दिया था। 29 जनवरी को 35 लोगों को कुत्तों ने काटकर जख्मी किया था। फरवरी में जिला अस्पताल के रिकार्ड बता रहे हैं कि 300 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं।
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जगतपुर में बीते चार दिनों में अलग-अलग गांवों में कुत्तों के काटने से 63 लोग घायल हो गए हैं। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एआरवी का टीका लगाया गया।
चार दिनों में जगतपुर में कुत्तों ने खैरानी पहाड़गढ़ के संतलाल (40), खेतान के भूपेंद्र (26) और परसा का पुरवा के अमित कुमार (14), ग्राम सराय के संजीव (50), इकछनिया की सरिता (30) और जलेसरा की आरती (25) को काटा। ग्राम तिवारीपुर के नकुल (22), कृष्णपाल और पूरे बधाई के दीपू (32) को भी कुत्तों ने काटा। बेनीगामा के आयुष (16), शुक्ला का पुरवा के अरमान (12) और आसमा बनो (40) भी इलाज कराने के लिए सीएचसी आए। अलीगंज की रामकुमारी, महादेवन के रामपति और इटौरा के गौरव सिंह (23) भी घायल हुए हैं। इटौरा के अंशु सहित अन्य लोग भी कुत्तों के शिकार हो चुके हैं।
सिरिंज की कमी से परेशानी
जगतपुर। सीएचसी जगतपुर में कुत्तों के काटने के लोगों की संख्या बढ़ रही है, तो अस्पताल में एआरवी लगाने की सिरिंज कम पड़ गई है। घायलों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एआरवी लगाने के लिए सिरिंज उपलब्ध नहीं थी। उन्हें बाहर से सिरिंज मंगानी पड़ी, जिसके बाद ही टीका लगाया जा सका। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. एलपी सोनकर ने बताया कि कुत्तों के काटने से आए सभी मरीजों को एआरवी टीका लगा दिया जाता है। सिरिंग की कमी नहीं है।
72 घंटे के भीतर एआरवी अवश्य लें
डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को कुत्ता काट लेता है तो शरीर में रैबीज का संक्रमण बढ़ने की 100 प्रतिशत संभावना रहती है। ऐसे में कुत्ता या अन्य रैबीज संक्रमित जीवों के काटने पर प्रभावित व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर एआरवी (एंटी रेबीज वेनम) की डोज अवश्य ले लेना चाहिए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से अच्छे से धोकर साफ जरूर कर लें। उसके तुरंत बाद रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए। मौसम बदल रहा है और इस कारण कुत्ते हिंसक व आक्रामक हैं। इनसे बचकर रहना चाहिए।
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छह दिन पूर्व जिला अस्पताल में एक ही दिन में 70 लोग कुत्तों के काटने के बाद एआरवी लगवाने आए थे। इसमें राजीव (21), राम कुमार (24), सावित्री (13), अनुज (76), सरिता (14), सुमित्रा देवी (38), आसमा (37) सहित 70 लोग शामिल थे।
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लालगंज में सोमवार को 38 लोगों को कुत्तों ने काटा था। इसी तरह 10 फरवरी को अलग-अलग गांवों में कुत्तों ने 35 लोगों को काटकर घायल कर दिया था। 29 जनवरी को 35 लोगों को कुत्तों ने काटकर जख्मी किया था। फरवरी में जिला अस्पताल के रिकार्ड बता रहे हैं कि 300 लोगों को कुत्ते काट चुके हैं।
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जगतपुर में बीते चार दिनों में अलग-अलग गांवों में कुत्तों के काटने से 63 लोग घायल हो गए हैं। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एआरवी का टीका लगाया गया।
चार दिनों में जगतपुर में कुत्तों ने खैरानी पहाड़गढ़ के संतलाल (40), खेतान के भूपेंद्र (26) और परसा का पुरवा के अमित कुमार (14), ग्राम सराय के संजीव (50), इकछनिया की सरिता (30) और जलेसरा की आरती (25) को काटा। ग्राम तिवारीपुर के नकुल (22), कृष्णपाल और पूरे बधाई के दीपू (32) को भी कुत्तों ने काटा। बेनीगामा के आयुष (16), शुक्ला का पुरवा के अरमान (12) और आसमा बनो (40) भी इलाज कराने के लिए सीएचसी आए। अलीगंज की रामकुमारी, महादेवन के रामपति और इटौरा के गौरव सिंह (23) भी घायल हुए हैं। इटौरा के अंशु सहित अन्य लोग भी कुत्तों के शिकार हो चुके हैं।
सिरिंज की कमी से परेशानी
जगतपुर। सीएचसी जगतपुर में कुत्तों के काटने के लोगों की संख्या बढ़ रही है, तो अस्पताल में एआरवी लगाने की सिरिंज कम पड़ गई है। घायलों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एआरवी लगाने के लिए सिरिंज उपलब्ध नहीं थी। उन्हें बाहर से सिरिंज मंगानी पड़ी, जिसके बाद ही टीका लगाया जा सका। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. एलपी सोनकर ने बताया कि कुत्तों के काटने से आए सभी मरीजों को एआरवी टीका लगा दिया जाता है। सिरिंग की कमी नहीं है।
72 घंटे के भीतर एआरवी अवश्य लें
डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को कुत्ता काट लेता है तो शरीर में रैबीज का संक्रमण बढ़ने की 100 प्रतिशत संभावना रहती है। ऐसे में कुत्ता या अन्य रैबीज संक्रमित जीवों के काटने पर प्रभावित व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर एआरवी (एंटी रेबीज वेनम) की डोज अवश्य ले लेना चाहिए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से अच्छे से धोकर साफ जरूर कर लें। उसके तुरंत बाद रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए। मौसम बदल रहा है और इस कारण कुत्ते हिंसक व आक्रामक हैं। इनसे बचकर रहना चाहिए।