फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   What kind of development, thirsty thirst for a half-a-mile walk

यह कैसा विकास, डेढ़ किमी चक्कर लगाने पर बुझ रही प्यास

Tue, 06 Mar 2018 10:50 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 06 Mar 2018 10:50 PM IST
विज्ञापन
सांगीपुर विकास खंड के आमीशंकरपुर गांव के लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। गांव में पर्याप्त संख्या में हैंडपंप और कुएं होने के बाद भी उन्हें डेढ़ किमी दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे पानी लेने के लिए डिब्बा, बाल्टी, मटका लेकर निकल पड़ते हैं। गांव से लगभग डेढ़ किमी दूर स्थित प्राइमरी स्कूल में लगा हैंडपंप ही उनकी प्यास बुझा रहा है।
विज्ञापन


संागीपुर विकास खंड के  दक्षिण में स्थित आमीशंकरपुर गांव की आबादी लगभग पांच हजार से अधिक है। मट्टन नाले के किनारे स्थित इस गांव के लोग पीने के पानी की विकट समस्या से जूझ रहे हैं। गांव में पर्याप्त संख्या में हैंडपंप और कुएं हैं, मगर उनका पानी इतना खारा है कि लोग एक बूंद भी नहीं गटक पाते हैं। ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए डेढ़ किमी दूर प्राइमरी स्कूल में लगे हैंडपंप पर जाना पड़ता है। कोई साइकिल पर डिब्बा और बाल्टी लटकाकर पहुंचता है, तो महिलाएं सिर पर मटका लेकर पहुंच जाती हैं। इस हैंडपंप पर दिनभर भीड़ लगी रहती है। पानी भरने के लिए लड़ाई न हो, इसके लिए लोग लाइन में अपना बर्तन रख देते हैं। नंबर आने पर लोग हैंडपंप चलाकर पानी भरते हैं। गांव में नेताओं ने पानी की टंकी स्थापित कराने का भरोसा दिया, मगर अब तक कुछ नहीं हो सका।
विज्ञापन


गांव की राजकुमारी ने बताया कि खारे पानी की समस्या बेहद गंभीर है। गहराई में बोरिंग कराने के बाद भी खारे पानी से निजात नहीं मिल रही है। गांव के तीरथराज कहते हैं कि गांव में आने-जाने के लिए पक्की सड़क तो बनी हुई है, मगर पीने का पानी नहीं मिलता है। गीता बताती हैं कि सब काम तो खारे पानी से हो जाता है, मगर खाना बनाने और पीने के लिए दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक दिन का पानी तीन-तीन दिन तक पीते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जयवीर सिंह ने बताया कि चुनाव के समय आने वाले नेता खारे पानी से निजात दिलाने का आश्वासन तो देते हैं, मगर आज तक कोई खरा नहीं उतरा। सुशील सिंह ने बताया कि गांव  के लोगों की सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। अगर पानी की टंकी की स्थापना कर दी जाय, तो यह समस्या दूर हो सकती है। सतीश उपाध्याय ने बताया कि गांव वालों की समस्या को देखकर सांसद हरिवंश सिंह को गांव में ले जाकर लोगों की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने पानी की टंकी स्थापित करने का भरोसा दिया है।


चार साल में जवाब दे जाते हैं हैंडपंप
आमीशंकरपुर गांव में लगे हैंडपंप चार साल में ही जवाब दे जाते हैं। वैसे तो इंडिया मार्का हैंडपंप की उम्र 25 साल बताई जाती है, मगर पानी खारा होने के कारण लोहे की पाइप और हैंडपंप में जंग लग जाती है और वह पानी उगलना बंद कर देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed