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सूखकर ‘चट्टान’ बन गए 661 तालाब
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:28 PM IST
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water problem
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रानीगंज इलाके में हालात जुदा नहीं हैं। डेंजर जोन घोषित शिवगढ़ और गौरा ब्लॉक में जलस्तर खिसकने के कारण पानी का संकट गहरा गया है। दोनों ब्लॉकों में बने 661 तालाब पूरी तरह सूख गए हैं। वहीं नदी भी नाले के रूप में नजर आने लगी है। नहरों में धूल उड़ रही है। प्यास बुझाने के लिए लगे हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं। तहसील क्षेत्र के शिवगढ़ व गौरा ब्लॉक मेें कुल 141 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में जलस्तर दस फिट नीचे खिसकने के कारण पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शिवगढ़ ब्लॉक के बसहा, सरायशेरखां, चौहर्जन, बांसी, अड़ार, बशीरपुर, सचौली, घोरका मुफरिद, चलाकपुर, रामपुर, नजियापुर, विंदागंज, पूरे विच्छूर, मऊ, प्रजापतिपुर, दहेर खुर्द जामताली सहित दर्जनों गांवों में जलस्तर लगातार खिसकने से पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गिरते जलस्तर से ग्रामीण चिंतित हैं। वहीं नहरें भी सूखी पड़ी हैं। जिससे किसानों की जायद की फसल भी सूख रही है। इन दिनों उड़द, मूंग, हरा चारा की खेती क्षेत्र में जोरों से की जाती है। लेकिन ये फसलें पानी के अभाव में सूख रही हैं।
गांवों में बने सरकारी नलकूप भी ठप पड़े हैं। शिवगढ़ में तालाबों की संख्या 256 है। मनरेगा के तहत 45 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। हैरत की बात तो यह है कि क्षेत्र के एक भी तालाब में पानी नहीं है। इनमें दरारें पड़ गई हैं। जबकि गौरा क्षेत्र में 405 तालाब है। यहां मनरेगा द्वारा 69 तालाब बनवाए गए हैं। लेकिन पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। तालाबों व नहरें सूखी होने से पशु पक्षी भी अपनी हलक बुझाने के लिए भटक रहे हैं। वहीं दोनों ब्लॉकों में 6800 से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। जिसमें 613 हैंडपंप खराब पड़े हैं। अधिकांश रीबोर की बाट जोह रहे हैं। तो कुछ जलस्तर नीचे होने से पानी देना ही छोड़ दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खराब हैंडपंपों की शिकायत ब्लॉक से लेकर तहसील मुख्यालय तक की गई, लेकिन इस समस्या की ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। फिलहाल प्रकृति की मार के साथ-साथ प्रशासन की उदासीनता से क्षेत्र में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होगी।
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गांवों में बने सरकारी नलकूप भी ठप पड़े हैं। शिवगढ़ में तालाबों की संख्या 256 है। मनरेगा के तहत 45 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। हैरत की बात तो यह है कि क्षेत्र के एक भी तालाब में पानी नहीं है। इनमें दरारें पड़ गई हैं। जबकि गौरा क्षेत्र में 405 तालाब है। यहां मनरेगा द्वारा 69 तालाब बनवाए गए हैं। लेकिन पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। तालाबों व नहरें सूखी होने से पशु पक्षी भी अपनी हलक बुझाने के लिए भटक रहे हैं। वहीं दोनों ब्लॉकों में 6800 से अधिक इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। जिसमें 613 हैंडपंप खराब पड़े हैं। अधिकांश रीबोर की बाट जोह रहे हैं। तो कुछ जलस्तर नीचे होने से पानी देना ही छोड़ दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खराब हैंडपंपों की शिकायत ब्लॉक से लेकर तहसील मुख्यालय तक की गई, लेकिन इस समस्या की ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। फिलहाल प्रकृति की मार के साथ-साथ प्रशासन की उदासीनता से क्षेत्र में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होगी।
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