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फिल्टर चश्मे व टेलीस्कोप से देखा गया सूर्यग्रहण का नजारा
Sun, 21 Jun 2020 07:38 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 21 Jun 2020 07:38 PM IST
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प्रतापगढ़ में सूर्य ग्रहण का नजारा
- फोटो : pratapgarh
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रविवार को अद्भुत सूर्यग्रहण का दृश्य देखने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। साढ़े तीन घंटे तक चले लंबे सूर्यग्रहण का नजारा आसमान में बादलों के कारण अंतिम चरण में देखा जा सका। बादल छटने पर सोलर फिल्टर चश्मे व टेलीस्कोप के माध्यम से लोगों ने सूर्यग्रहण का नजारा देखा।
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pratapgarh
- फोटो : pratapgarh
खगोलविद ने बताया कि अंतिम चरण में सूर्य का 1/8 भाग ग्रहण से मुक्त हो चुका था। सूर्यग्रहण देखने के लिए कॉलेजों एवं खगोलविदों के कार्यालयों में युवाओं की भीड़ उमड़ी रही।
वर्ष 2009 में पूर्ण सूर्यग्रहण लगा था। सूर्यग्रहण डायमंड की तरह चमकदार दिखा था। इस बार रिंग के आकार का दुर्लभ सूर्यग्रहण था। सुबह 10.24 बजे से स्पर्शकाल, मध्यकाल व मोक्ष काल सहित सूर्यग्रहण के सभी दुर्लभ दृश्य देखने को लेकर लोग रविवार को सुबह से ही उत्साहित दिखे।
वर्ष 2009 में पूर्ण सूर्यग्रहण लगा था। सूर्यग्रहण डायमंड की तरह चमकदार दिखा था। इस बार रिंग के आकार का दुर्लभ सूर्यग्रहण था। सुबह 10.24 बजे से स्पर्शकाल, मध्यकाल व मोक्ष काल सहित सूर्यग्रहण के सभी दुर्लभ दृश्य देखने को लेकर लोग रविवार को सुबह से ही उत्साहित दिखे।
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प्रतापगढ़ में सूर्य ग्रहण का नजारा
- फोटो : pratapgarh
सुबह से ही खगोलविदों एवं कॉलेजों से संपर्क साधना शुरू कर दिया। सभी की नजर घड़ी पर थी। सुबह 9 बजते ही लोग पहुंच गए। मगर उनके उत्साह पर आसमान में डेरा जमाए बादलों ने पानी फेर दिया। बादलों की पैठ के चलते आसमान ढका रहा। सूर्यग्रहण का नजारा नहीं दिखा।
बीच-बीच में बूंदाबांदी भी होती रही। शहर के एमडीपीजी कालेज में छात्र- छात्राएं आसमान साफ होने का इंतजार करते रहे। साढ़े तीन घंटे तक लंबे सूर्यग्रहण के तीन घंटे बीत जाने के बाद अंतिम चरण में थोड़ी देर के लिए बादल छटे। इस दौरान लोगों ने सोलर फिल्टर चश्मे व टेलीस्कोप के जरिए सूर्यग्रहण की दुर्लभ तस्वीरें देखीं।
बीच-बीच में बूंदाबांदी भी होती रही। शहर के एमडीपीजी कालेज में छात्र- छात्राएं आसमान साफ होने का इंतजार करते रहे। साढ़े तीन घंटे तक लंबे सूर्यग्रहण के तीन घंटे बीत जाने के बाद अंतिम चरण में थोड़ी देर के लिए बादल छटे। इस दौरान लोगों ने सोलर फिल्टर चश्मे व टेलीस्कोप के जरिए सूर्यग्रहण की दुर्लभ तस्वीरें देखीं।
प्रतापगढ़ में सूर्य ग्रहण का नजारा
- फोटो : pratapgarh
एमडीपीजी प्राचार्य डा. विनोद शुक्ल ने बताया कि बादल के चलते स्पर्शकाल, मध्यम काल का दृश्य नहीं देखा जा सका। अंतिम चरण यानि मोक्षकाल के दौरान बादल छटने पर सूर्यग्रहण का नजारा देखा गया। इस दौरान सूर्य का 1/8 भाग ग्रहण से मुक्त हो चुका था। उन्होंने ने बताया कि यदि बादलों की दखल न होती तो सूर्यग्रहण रिंग के आकार में देखा जाता।
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- फोटो : pratapgarh
साढ़े तीन घंटे तक घर में जाप, शाम को मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
सूर्यग्रहण का प्रभाव समाप्त होने के बाद रविवार को शाम जिले के सभी पौराणिक देवी मंदिरों व शिवालयों का पट खुलते ही दर्शन-पूजन करने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। घंट-घडिय़ाल से पूरा वातावरण गूंजायमान हो उठा। माला-फूल प्रसाद आदि अर्पित कर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर जीवन में सुख-शांति की कामना की।
pratapgarh
- फोटो : pratapgarh
रविवार को लगा सूर्यग्रहण दुर्लभ था। खास बात यह है कि सूर्यग्रहण में पांच ग्रहों का योग था। रविवार को सुबह 10.24 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक इसका प्रभाव था। मगर सूतक काल शनविार रात से ही शुरू हो गया था। इससे मंदिरों के पट सुबह नहीं खुल सके। रविवार को सूतक काल के चलते दर्शन-पूजन नहीं हो सका। लोग घरों में ही स्नान कर जोग, जाप करते रहे।
दो बजे के बाद सूर्यग्रहण का प्रभाव समाप्त होने पर मंदिरों के पट खुले। साफ-सफाई की गई। शांम पांच बजे के बाद शहर के बेल्हादेवी धाम, बलीपुर स्थित दुर्गामंदिर, पौराणिक शिवालय बाबाबेलखरनाथ धाम, भयहरणनाथ धाम, घुइसरनाथधाम, सिद्धपीठ मां बाराही, मां चंद्रिकन देवी धाम में दर्शन-पूजन शुरू हुआ तो श्रद्धालु उमड़ पड़े। नारियल, चुनरी, बताशा, फल आदि अर्पित कर भक्तों ने ईश्वर से जीवन में सुख शांति की कामना की। देर रात तक दर्शन पूजन का क्रम लगा रहा।
दो बजे के बाद सूर्यग्रहण का प्रभाव समाप्त होने पर मंदिरों के पट खुले। साफ-सफाई की गई। शांम पांच बजे के बाद शहर के बेल्हादेवी धाम, बलीपुर स्थित दुर्गामंदिर, पौराणिक शिवालय बाबाबेलखरनाथ धाम, भयहरणनाथ धाम, घुइसरनाथधाम, सिद्धपीठ मां बाराही, मां चंद्रिकन देवी धाम में दर्शन-पूजन शुरू हुआ तो श्रद्धालु उमड़ पड़े। नारियल, चुनरी, बताशा, फल आदि अर्पित कर भक्तों ने ईश्वर से जीवन में सुख शांति की कामना की। देर रात तक दर्शन पूजन का क्रम लगा रहा।