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गलन से ठिठुरे लोग, दाे किसानों की मौत

Sun, 11 Dec 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़ Updated Sun, 11 Dec 2016 11:30 PM IST
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two farmed died from cold
न्‍यूूज

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रविवार की सुबह कोहरे के साथ ठंड के प्रकोप से हर कोई बेहाल रहा। ठिठुरन भरी ठंड से बचने के लिए लोग दिनभर ऊनी कपड़ों में लिपटे रहे। दोपहर बाद धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर हुई, लेकिन शाम को फिर गलन शुरू हो गई। दिन रात के तापमान में लगातार गिरावट जारी है। ठंड की चपेट में आने से दो किसानों की मौत हो गई।

रविवार को जनपद में ठंड से लोग ठिठुरते नजर आए। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं ने लोगों को बेहाल कर रखा है। कोहरे का कहर भी लगातार जारी है। हालत यह है कि दोपहर बारह बजे तक सूर्य के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। ठंड से बचने के लिए रविवार को भी लोग दिनभर ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आए। दिन और रात के  तापमान में आई गिरावट से गलन बढ़ गई। दोपहर बाद सूर्यदेव के दर्शन हुए। कई दिनों बाद तीन घंटे तक निकली धूप से लोगों ने काफी राहत महसूस की। हालांकि शाम चार बजे के बाद फिर गलन बढ़ गई। रविवार को न्यूनतम तापमान 10.5 और अधिकतम 20.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि  रात में कोहरा अधिक होने व शीतलहर चलने की संभावना है।
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अंतू थाना क्षेत्र के उमरी निवासी रामलाल पांडेय (65) खेत में फसल देखने के लिए गए थे। अचानक वह ठंड लगने के कारण बेहोश होकर गिर पड़े। परिजन जब तक उन्हें अस्पताल ले जाते, तब तक उनकी सांसें थम गईं। उनकी मौत से घर में कोहराम मच गया। बुधवार को जेठवारा के गौरा गांव निवासी भोलादास रजक की ठंड लगने से मौत हो गई थी। मानधाता इलाके के पूरे खड़गराय निवासी सहदेव सिंह (30) खेत की सिंचाई करके घर जैसे ही पहुंचे , उनकी मौत हो गई
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फर्श पर गुजर रही रात

कुर्सियों की किल्लत, वीआईपी वेटिंग हाल में जगह नहीं। बाहर कड़ाके की ठंड और गलन। ऐसी स्थिति से जूझ रहे मुसाफिर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म और मुसाफिरखाने की जमीन पर रात बिताने को मजबूर हैं। प्र्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की लेटलतीफी के चक्कर में यात्रियों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

बैठने के लिये कुर्सियों की भारी किल्लत है। कुर्सियों की कमी के चलते यात्री ठंडी मेें जमीन पर बैठने पर मजबूर हैं। अगर ट्रेेन लेट है तो रात भी जमीन पर बितानी पड़ रही है। प्लेटफार्म के साथ ही मुसाफिरखाने में यात्रियों को इस हाल में देखा जा सकता है। कॉमन वेटिंग हाल की बात की जाए तो उसकी हालत ऐसी नहीं है कि उसमें बैठा जा सके। खिड़की और दरवाजे खराब हैं। कुर्सियों की संख्या भीड़ के हिसाब से नहीं हैं। अगर एक ट्रेन लेट हो जाती है तो कुर्सियां भर जाती हैं। कोहरे के मौसम में डेली करीब दर्जन भर लेट घंटों लेट हो जा रही है। मजबूरी में यात्रियों को  फर्श पर बैठना और लेटना पड़ रहा है।

 
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