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सावधान! जान ले लेंगे खुले ट्रांसफार्मर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:58 PM IST
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pratapgarh news
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जनपद में बिजली के टूटे व लटकते तार से लोग मौत की चपेट में लगातार आ रहे हैं। इसके बाद भी हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग के अफसर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। ग्रामीण इलाके तो छोड़िए, शहर में ही सुबह से रात तक गुलजार रहने वाली कई सड़कों के किनारे ट्रांसफार्मर जमीन पर रखे हुए हैं। उन्हें खुला छोड़ दिया गया है। शहर के पल्टन बाजार, नया माल गोदाम रोड, विवेक नगर, कटरा रोड, सनई अनुसंधान केंद्र के निकट, सदर विकास खंड कार्यालय के गेट के समीप बिजली विभाग के अफसरों की लापरवाही से लगाए गए ट्रांसफार्मर लोगों की जान के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
जमीन से लगे ट्रांसफार्मर को बरसात के दिनों में झाड़ -झंखाड़ के साथ ही शरपतों के झुरमुट ने ढक दिया है। यदि कोई अनजाने में रास्ता भटक जाए तो उसकी जान जाने से कोई रोक नहीं सकता। जनपद में लगातार बिजली के टूटे व ढीले तार लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। इसके बावजूद शहर में बिजली आपूर्ति के लिए खुले में रखे गए ट्रांसफार्मरों से हादसा रोकने के लिए अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बरसात के दिनों मेें हादसे की प्रबल आशंका रहती है। खास बात यह है कि बाबागंज विद्यु़त उपकेंद्र के सामने स्थित ट्रांसफार्मर की दशा पर भी बिजली विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं जा रही है। जिससे आसपास रहने वाले लोग हमेशा सशंकित रहते हैं।
विभाग का आदेश भूल जाते हैं कर्मचारी
बिजली विभाग जब भी कोई नया काम करता है तो उस कार्य का बकायदा इस्टीमेट बनाया जाता है। जिसमें स्थापना से लेकर उसकी सुरक्षा तक के लिए रकम पास होती है। विभाग के आला अफसर भी बराबर मातहतों को जनता की सुरक्षा के लिए दिशा निर्देश जारी करते रहते हैं। अधिकारियों के आदेश को भी मातहत टरका देते हैं।
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कभी भी मौत बनकर गिर सकते हैं लटकते तार
जनपद में लटकते व लकड़ी के पोल पर लगाए गए बिजली के तार कभी भी लोगों की जान ले सकते हैं। शहर के इर्द-गिर्द ही यह समस्या देखने को मिलती है। पूर्वी सहोदरपुर, कादीपुर, भंगवा, महुआर, खजुरनी, किशनुदासपुर, अचलपुर, पूरे पांडेय समेत अन्य गांवों में यह समस्या देखते ही बनती है। शिकायतों के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हादसे को आमंत्रित करते हैं।
बिजली विभाग की लापरवाही से एक माह में आठ मौतें
बिजली विभाग के अफसरों की लापरवाही से 27 दिन के भीतर आठ लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे दर्दनाक हादसा ताला गांव में मोहतान का पुरवा में हुआ था। 17 जुलाई को गुलफाम की बेटी सना अपने चचेरे भाई तनवीर के साथ बिजली के लटक रहे हाईटेंशन तार की चपेट में आ गई। इससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके पूर्व बलीपुर में खुले में रखे ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक की मौत हो गई थी। तीन जुलाई को बहुता गांव में बिजली के लटक रहे तार की चपेट में आने से संजय की आठ वर्षीय पुत्र शशी की मौत हो गई थी।
4 जुलाई को हथिगवां थाना क्षेत्र के अहिबरनपुर निवासी जगतपाल हौदेश्वरनाथधाम में निशान चढ़ाते जाते समय करंट की चपेट में आने से मौत के मुुंह में समा गया। देवसरा में रामलाल चौहान की 6 जुलाई को बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से मौत हो गई। मानधाता थाना क्षेत्र के जमुआ निवासी इसरार की 19 जुलाई को खेत में काम करते समय स्टे वायर में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। देल्हूपुर बाजार में किराए के मकान में रहने वाले रायबरेली के बछरावां थाना क्षेत्र के मठिया अकबरपुर निवासी देशराज चौधरी की हाईटेंशन लाइन छूने से मौत हो चुकी है।
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जमीन से लगे ट्रांसफार्मर को बरसात के दिनों में झाड़ -झंखाड़ के साथ ही शरपतों के झुरमुट ने ढक दिया है। यदि कोई अनजाने में रास्ता भटक जाए तो उसकी जान जाने से कोई रोक नहीं सकता। जनपद में लगातार बिजली के टूटे व ढीले तार लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। इसके बावजूद शहर में बिजली आपूर्ति के लिए खुले में रखे गए ट्रांसफार्मरों से हादसा रोकने के लिए अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बरसात के दिनों मेें हादसे की प्रबल आशंका रहती है। खास बात यह है कि बाबागंज विद्यु़त उपकेंद्र के सामने स्थित ट्रांसफार्मर की दशा पर भी बिजली विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं जा रही है। जिससे आसपास रहने वाले लोग हमेशा सशंकित रहते हैं।
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विभाग का आदेश भूल जाते हैं कर्मचारी
बिजली विभाग जब भी कोई नया काम करता है तो उस कार्य का बकायदा इस्टीमेट बनाया जाता है। जिसमें स्थापना से लेकर उसकी सुरक्षा तक के लिए रकम पास होती है। विभाग के आला अफसर भी बराबर मातहतों को जनता की सुरक्षा के लिए दिशा निर्देश जारी करते रहते हैं। अधिकारियों के आदेश को भी मातहत टरका देते हैं।
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कभी भी मौत बनकर गिर सकते हैं लटकते तार
जनपद में लटकते व लकड़ी के पोल पर लगाए गए बिजली के तार कभी भी लोगों की जान ले सकते हैं। शहर के इर्द-गिर्द ही यह समस्या देखने को मिलती है। पूर्वी सहोदरपुर, कादीपुर, भंगवा, महुआर, खजुरनी, किशनुदासपुर, अचलपुर, पूरे पांडेय समेत अन्य गांवों में यह समस्या देखते ही बनती है। शिकायतों के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हादसे को आमंत्रित करते हैं।
बिजली विभाग की लापरवाही से एक माह में आठ मौतें
बिजली विभाग के अफसरों की लापरवाही से 27 दिन के भीतर आठ लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे दर्दनाक हादसा ताला गांव में मोहतान का पुरवा में हुआ था। 17 जुलाई को गुलफाम की बेटी सना अपने चचेरे भाई तनवीर के साथ बिजली के लटक रहे हाईटेंशन तार की चपेट में आ गई। इससे दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके पूर्व बलीपुर में खुले में रखे ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से एक अज्ञात युवक की मौत हो गई थी। तीन जुलाई को बहुता गांव में बिजली के लटक रहे तार की चपेट में आने से संजय की आठ वर्षीय पुत्र शशी की मौत हो गई थी।
4 जुलाई को हथिगवां थाना क्षेत्र के अहिबरनपुर निवासी जगतपाल हौदेश्वरनाथधाम में निशान चढ़ाते जाते समय करंट की चपेट में आने से मौत के मुुंह में समा गया। देवसरा में रामलाल चौहान की 6 जुलाई को बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से मौत हो गई। मानधाता थाना क्षेत्र के जमुआ निवासी इसरार की 19 जुलाई को खेत में काम करते समय स्टे वायर में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। देल्हूपुर बाजार में किराए के मकान में रहने वाले रायबरेली के बछरावां थाना क्षेत्र के मठिया अकबरपुर निवासी देशराज चौधरी की हाईटेंशन लाइन छूने से मौत हो चुकी है।