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जन-धन योजना के 1,24,123 खातों में नहीं हुआ लेनदेन
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 02 Jun 2018 11:09 PM IST
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मोदी सरकार की सबसे महात्वाकांक्षी जन-धन योजना का जिले में बुरा हाल रहा। चार साल बाद भी जिले में जीरो बैलेंस पर खुले 1,24,123 खातों पर लेनदेन नहीं हो सका। यह खाते अभी भी ठप पड़े हैं।
अनुदान और प्रोत्साहन की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने के लिए शहर से गांव तक जीरो बैलेंस पर खाता खोलने का अभियान चला तो बैंक कर्मियों की नींद हराम हो गई। अधिकांश बैंकों में खाता खोलने के लिए अलग से काउंटर खोलने पड़े। बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों ने एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बैंकों में खाते खोलवाए। जीरो बैलेंस से खुलने वाले खाते की संख्या में लगातार इजाफा होता गया।
जिले में जन धन योजना के तहत 3,61,789 खाते खुले। इनमें से 2,37,666 खातों में गैस सब्सिडी, कृषि अनुदान, मनरेगा मजदूरी सहित विभिन्न माध्यमों से लेने-देन होता रहा, मगर 1,24,123 खातेदार ऐसे हैं, जिन्होंने जीरो बैलेंस पर खाता खोलवाने के बाद कोई लेनदेन नहीं किया। इससे इन खातों के संचालन पर ग्रहण लग गया है। हालांकि बैंकों ने इन खातों को बंद भी नहीं किया है, हां इतना अवश्य है कि अगर खाताधारक खाते को चलाना चाहता है, तो उसे केवाईसी अवश्य देना होगा।
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खाते का संचालन नहीं करने वालों में अधिकांश ग्रामीण महिलाएं हैं। जो न तो मनरेगा मजदूर हैं, और न ही इनके नाम से गैस कनेक्शन है। एलडीएम एएन सिंह ने बताया कि जन-धन योजना के तहत जो खोले गए थे, वह शहर और गांव के लोगों की सुविधा के लिए थे। अधिकांश ग्राहकों ने दो-दो खाते खोलवा लिए। अब उनके समझ समस्या यह है कि वह कौन सा खाता चलाएं। फिलहाल जो खाते नहीं चल रहे हैं, उन्हें केवाईसी देकर चालू करवाया जा सकता है।
अधिकांश खाते बताए जा रहे फर्जी
जीरो बैलेंस पर खुलने वाले बंद होने वाले अधिकांश खाते फर्जी बताए जा रहे हैं। चुनाव में एक अफवाह उड़ी थी कि सभी के खाते में 15-15 लाख रुपये भेजे जाएंगे। इससे कुछ लोगों ने होशियारी दिखाते हुए एक ही नाम से कई बैंकों में खाते खुलवा लिए थे। इससे अधिकांश खातों में लेनदेन ठप है।
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अनुदान और प्रोत्साहन की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने के लिए शहर से गांव तक जीरो बैलेंस पर खाता खोलने का अभियान चला तो बैंक कर्मियों की नींद हराम हो गई। अधिकांश बैंकों में खाता खोलने के लिए अलग से काउंटर खोलने पड़े। बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों ने एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बैंकों में खाते खोलवाए। जीरो बैलेंस से खुलने वाले खाते की संख्या में लगातार इजाफा होता गया।
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जिले में जन धन योजना के तहत 3,61,789 खाते खुले। इनमें से 2,37,666 खातों में गैस सब्सिडी, कृषि अनुदान, मनरेगा मजदूरी सहित विभिन्न माध्यमों से लेने-देन होता रहा, मगर 1,24,123 खातेदार ऐसे हैं, जिन्होंने जीरो बैलेंस पर खाता खोलवाने के बाद कोई लेनदेन नहीं किया। इससे इन खातों के संचालन पर ग्रहण लग गया है। हालांकि बैंकों ने इन खातों को बंद भी नहीं किया है, हां इतना अवश्य है कि अगर खाताधारक खाते को चलाना चाहता है, तो उसे केवाईसी अवश्य देना होगा।
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खाते का संचालन नहीं करने वालों में अधिकांश ग्रामीण महिलाएं हैं। जो न तो मनरेगा मजदूर हैं, और न ही इनके नाम से गैस कनेक्शन है। एलडीएम एएन सिंह ने बताया कि जन-धन योजना के तहत जो खोले गए थे, वह शहर और गांव के लोगों की सुविधा के लिए थे। अधिकांश ग्राहकों ने दो-दो खाते खोलवा लिए। अब उनके समझ समस्या यह है कि वह कौन सा खाता चलाएं। फिलहाल जो खाते नहीं चल रहे हैं, उन्हें केवाईसी देकर चालू करवाया जा सकता है।
अधिकांश खाते बताए जा रहे फर्जी
जीरो बैलेंस पर खुलने वाले बंद होने वाले अधिकांश खाते फर्जी बताए जा रहे हैं। चुनाव में एक अफवाह उड़ी थी कि सभी के खाते में 15-15 लाख रुपये भेजे जाएंगे। इससे कुछ लोगों ने होशियारी दिखाते हुए एक ही नाम से कई बैंकों में खाते खुलवा लिए थे। इससे अधिकांश खातों में लेनदेन ठप है।