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10 दिन में खपा दिए 30 करोड़ के कटे-फटे नोट

Fri, 25 Nov 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Fri, 25 Nov 2016 12:05 AM IST
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thirty crore ruppes exchange currency in ten days
न्‍यूूज

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1000 और 500 के नोट बंद होने के बाद बैंकों में नकदी का प्रवाह बनाए रखना आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालात संभालने के लिए करेंसी चेस्ट से स्वाइल्ड नोटों की गड्डियां वापस चलन में ला दी गई हैं। मटमैले गंदे हो चुके ये नोट बिल्कुल रद्दी हालत में हैं। ये वो नोट हैं जिन्हें नष्ट कर नई करेंसी जारी करने के लिए आरबीआई को भेजा जाता है। जले-कटे और फटे होने के कारण ये नोट हाथ में आने के बाद केमिकल और गंदगी की वजह से खुजली आदि बीमारियां पैदा कर रहे हैं। अकेले प्रतापगढ़ में ही दस दिन में ऐसे 30 करोड़ के नोट खपाए जा चुके हैं।

  ऐसे नोटों की 10, 20 और 50 और 100 की गड्डियां ग्राहकों को पकड़ाई गईं। नोटबंदी के बाद छाए नगदी संकट के मद्देनजर मुद्रा प्रबंध विभाग के चीफ जनरल मैनेजर पी विजय कुमार के आरबीआई के हवाले से 13 नवंबर को जारी पत्र के बाद बैंकों ने यह कदम उठाया है।
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बैंकों के इस कदम से नकदी का संकट तो दूर नहीं हुआ, अलबत्ता ग्राहकों के लिए एक और नई मुसीबत खड़ी हो गई। बैंकों में चार-पांच घंटे लाइन लगाने के बाद कई ग्राहकों को ऐसी गड्डियां मिल गई हैं जिनमें ज्यादातर नोट कटे-फटे हैं। जगह-जगह गल चुके नोट जेब रखना तो छोड़िए, हाथ में लेने के लायक भी नहीं है। उन्हें लेने के लिए दुकानदार तैयार नहीं हैं। कुछ तो बैंकों में लौटाने गए तो वहां से भी लौटा दिया गया। अब लोग इन कटे-फटे नोटों को लेकर भटक रहे हैं। गांव से लेकर शहर तक रोजाना ऐसे नोटों को बदलने को लेकर हंगामा हो रहा है।
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स्वाइल्ड नोट अब हमारे पास बचे ही नहीं। जितना स्टाक था सब खत्म हो गया। जितने भी चलने लायक नोट थे सब लोगों को दे दिए गए। सिर्फ वही नोट रोके गए जो तीन-चार टुकड़ों में बंटे थे। नकदी संकट को देखते आरबीआई के निर्देश के क्रम में यह कदम उठाया गया। संकट दूर होते हीे पुराने नोटों को पुन: वापस ले लिया जाएगा।
एसएस दूबे, चीफ मैनेजर, एसबीआई।

ऐसे नोटों की गड्डी में लगे केमिकल के कारण हाथों में खुजली शुरू हो जाती है। बचाव के लिए ऐसे नोट गिनने के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए।
डा. आशुतोष सिंह, चिकित्सक, जिला अस्पताल।

पुराने नोटों सेशरीर में हो रही खुजली, चेहरे पर निकल रहे दाने  

चेस्ट से बैंक में और फिर वहां से ग्राहकों के हाथ में। लंबे समय से चलन में होने के नाते खराब हो चुके स्वाइल्ड नोट आरबीआई को वापस भेजे जाते हैं। आरबीआई को भेजने से पहले इन्हें चेस्ट में केमिकल के जरिए सुरक्षित रखा जाता है। अब जब बैंकों-डाकघरों से ये नेाट ग्राहकों के हाथ में आ रहे हैं तो बीमारियां पैदा कर रहे हैं। इसके केमिकल और गंदगी के असर से लोगों के हाथों में खुजलियां और चेहरे पर लाल दाने निकल आ रहे हैं।


  एमडीपीजी कॉलेज में इतिहास विभाग में प्राध्यापक डा. पीयूषकांत ने बताया कि पांच दिन पहले उन्हें बैंक से पचास की गड्डी मिली थी जिसके अधिकांश नोट गले हुए थे। अजीब सी दुर्गंध आ रही थी। नोट गिनते समय कुछ देर बाद हाथ में खुजली होने लगी। चेहरे पर हाथ लगने के बाद लाल दाने निकल आए। उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया आैर जब दवा ली उसके बाद ही राहत हुई। इसी तरह एसबीआई में तैनात एक महिला को भी नोट गिनते समय इस तरह की दिक्कत आई थी। यह समस्या लगभगर पूरे जनपद से सामने आ रही है।
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