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मांग के अनुरूप जिले को नहीं मिल रही बिजली, हांफ रहे उपकेंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:22 AM IST
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योगी सरकार भले ही जिला मुख्यालयों को 24 और ग्रामीण इलाके में 18 बिजली देने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत इससे अलग है। जिले को मांग के अनुरूप बिजली नहीं दी जा रही है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में लो वोल्टेज, लोकल फाल्ट के साथ आपात कटौती से जूझना पड़ रहा है। जिले में 150 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता है, जबकि उपलब्धता महज 85 मिलियन यूनिट बिजली ही उपलब्ध कराई जा रही है।
जिले में करीब 4 लाख पंजीकृत उपभोक्ता हैं। चार विद्युत पारेषण खंडों को मिलाकर कुल 65 उपकेेंद्रोें के जरिए विद्युत आपूर्ति की जाती है। निजी नलकूप, आटा चक्की, तेल मशीन सहित लगभग 50 हजार से अधिक कामर्शियल उपभोक्ता हैं। खपत के लिहाज से यहां 150 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता है, मगर इसके सापेक्ष जिले को महज 85 मिलियन यूनिट बिजली ही मुहैया हो पा रही है। आंकड़ों पर जाएं तो जिले में 65 मिलियन यूनिट बिजली की और आवश्यकता है।
जिसकी भरपाई नहीं हो पा रही है। इससे जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था काफी प्रभावित हो रही है। बारिश व ठंडी के मौसम में खपत कम होने से उतनी दिक्कत नहीं होती है, लेकिन भीषण गर्मी में बिजली नहीं मिल पाने के कारण लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। उपकेंद्रों पर खपत के अनुरूप बिजली न मिल पाने से उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज व लोकल फाल्ट का दंश झेलना पड़ रहा है। आलम यह है कि लो वोल्टज के चलते घरों में कूलर, फ्रिज और एसी काम नहीं कर रहे हैं। पंखे फर्राटा भरने के बजाए रेंग रहे हैं। रात में बिजली होने के बाद भी गांव में अंधेरा छाया रहता है। दिनभर बिजली जहां बिजली की आवाजाही लगी रहती है तो रात में भी अघोषित कटौती होती है। ऐसे में भीषण गर्मी में बिजली संकट के चलते उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के तकरीबन हर उपकेंद्र पर समस्या बनी हुई है।
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कई बार भेजी जा चुकी डिमांड
जिले को कम बिजली मुहैया कराए जाने से विभाग के अफसर भी परेशान हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कई बार डिमांड पावर कारपोरेशन को भेज चुके हैं। पत्राचार कर चुके हैं। तत्कालीन एक्सईएन सत्य प्रकाश मिश्र व ओपी मिश्र ने भी बिजली डिमांड को लेकर पहल की थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है।
कटियामार भी लगा रहे बट्टा
अंतू के उपाध्यायपुर गांव के सरायभनई मजरे में दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव के दो पोल व तार को उखाड़ कुछ लोगों ने अपने हिसाब से लगा लिया। इस संबंध में ग्रामीणों ने चिलबिला पावर हाउस पर तैनात जेई प्रमोद मौर्या से शिकायत की। जेई की पड़ताल में शिकायत सही मिली।
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जिले में करीब 4 लाख पंजीकृत उपभोक्ता हैं। चार विद्युत पारेषण खंडों को मिलाकर कुल 65 उपकेेंद्रोें के जरिए विद्युत आपूर्ति की जाती है। निजी नलकूप, आटा चक्की, तेल मशीन सहित लगभग 50 हजार से अधिक कामर्शियल उपभोक्ता हैं। खपत के लिहाज से यहां 150 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता है, मगर इसके सापेक्ष जिले को महज 85 मिलियन यूनिट बिजली ही मुहैया हो पा रही है। आंकड़ों पर जाएं तो जिले में 65 मिलियन यूनिट बिजली की और आवश्यकता है।
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जिसकी भरपाई नहीं हो पा रही है। इससे जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था काफी प्रभावित हो रही है। बारिश व ठंडी के मौसम में खपत कम होने से उतनी दिक्कत नहीं होती है, लेकिन भीषण गर्मी में बिजली नहीं मिल पाने के कारण लोगों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। उपकेंद्रों पर खपत के अनुरूप बिजली न मिल पाने से उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज व लोकल फाल्ट का दंश झेलना पड़ रहा है। आलम यह है कि लो वोल्टज के चलते घरों में कूलर, फ्रिज और एसी काम नहीं कर रहे हैं। पंखे फर्राटा भरने के बजाए रेंग रहे हैं। रात में बिजली होने के बाद भी गांव में अंधेरा छाया रहता है। दिनभर बिजली जहां बिजली की आवाजाही लगी रहती है तो रात में भी अघोषित कटौती होती है। ऐसे में भीषण गर्मी में बिजली संकट के चलते उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के तकरीबन हर उपकेंद्र पर समस्या बनी हुई है।
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कई बार भेजी जा चुकी डिमांड
जिले को कम बिजली मुहैया कराए जाने से विभाग के अफसर भी परेशान हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कई बार डिमांड पावर कारपोरेशन को भेज चुके हैं। पत्राचार कर चुके हैं। तत्कालीन एक्सईएन सत्य प्रकाश मिश्र व ओपी मिश्र ने भी बिजली डिमांड को लेकर पहल की थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका है।
कटियामार भी लगा रहे बट्टा
अंतू के उपाध्यायपुर गांव के सरायभनई मजरे में दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव के दो पोल व तार को उखाड़ कुछ लोगों ने अपने हिसाब से लगा लिया। इस संबंध में ग्रामीणों ने चिलबिला पावर हाउस पर तैनात जेई प्रमोद मौर्या से शिकायत की। जेई की पड़ताल में शिकायत सही मिली।