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पहले रहने को दीजिए घर फिर होगा रेलवे का विकास
प्रतापगढ़
Updated Fri, 21 Oct 2016 11:36 PM IST
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इंदौर अमृतसर एक्सप्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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रेलकर्मियों ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु के निर्देश पर खुद को एक दिन का रेलमंत्री बनाए जाने पर अपने सुझाव रेल मंत्रालय को भेजे हैं। एक दिन के लिए खुद को रेलमंत्री मानते हुए ज्यादातर कर्मचारियों ने आवास का मुद्दा उठाया है।
सैकड़ाें रेलकर्मियों ने रेलमंत्रालय को ऑनलाइन भेजे सुझाव में आवास की कमी को रेलवे के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताई है। इसके अलावा जर्जर रेल पटरी, ट्रेनों की लेटलतीफी और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सुधार की मांग की है।
बता दें कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे के विकास के साथ समस्याओं को दूर करने के लिए सभी कर्मचारियों से खुद को एक दिन का रेलमंत्री मानते हुए सुझाव मांगे थे। इस पर लंबे समय से आवास की समस्या से परेशान प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा जाहिर कर दी। उन्होंने सुझाव दिया कि कर्मचारियों को बेहतर आवास दिए जाएं। जर्जर और असुविधा वाले आवासों में परिवार को छोड़कर ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों के मन में हर वक्त असुरक्षा रहती है।
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प्रतापगढ़ में करीब एक हजार रेल कर्मचारी पूरे सेक्शन में हैं। मगर सबके लिए आवास नहीं है। काफी कर्मचारी प्राइवेट रूम लेकर रहने को मजबूर हैं। जो आवास हैं भी उनकी दशा इतनी खराब है कि उसमें रहना मुश्किल हो रहा है। छत टपक रही है। कमरों और शौचालयों में खिड़की और दरवाजा नहीं है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने के साथ-साथ सुरक्षा और राजस्व बढ़ाने पर भी जोर दिया है। जर्जर हो चुकी रेलपटरियों को बदलने, सभी ट्रेनों में टीटीई और पुलिस बल की तैनाती करने, घिसे-पिटे कोच को हटाने के साथ ही कर्मचारियों की भर्ती को रेलवे के विकास से जोड़ते हुए इस तरह का भी सुझाव भेजा है।
सैकड़ाें रेलकर्मियों ने रेलमंत्रालय को ऑनलाइन भेजे सुझाव में आवास की कमी को रेलवे के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताई है। इसके अलावा जर्जर रेल पटरी, ट्रेनों की लेटलतीफी और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सुधार की मांग की है।
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बता दें कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे के विकास के साथ समस्याओं को दूर करने के लिए सभी कर्मचारियों से खुद को एक दिन का रेलमंत्री मानते हुए सुझाव मांगे थे। इस पर लंबे समय से आवास की समस्या से परेशान प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा जाहिर कर दी। उन्होंने सुझाव दिया कि कर्मचारियों को बेहतर आवास दिए जाएं। जर्जर और असुविधा वाले आवासों में परिवार को छोड़कर ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों के मन में हर वक्त असुरक्षा रहती है।
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प्रतापगढ़ में करीब एक हजार रेल कर्मचारी पूरे सेक्शन में हैं। मगर सबके लिए आवास नहीं है। काफी कर्मचारी प्राइवेट रूम लेकर रहने को मजबूर हैं। जो आवास हैं भी उनकी दशा इतनी खराब है कि उसमें रहना मुश्किल हो रहा है। छत टपक रही है। कमरों और शौचालयों में खिड़की और दरवाजा नहीं है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने के साथ-साथ सुरक्षा और राजस्व बढ़ाने पर भी जोर दिया है। जर्जर हो चुकी रेलपटरियों को बदलने, सभी ट्रेनों में टीटीई और पुलिस बल की तैनाती करने, घिसे-पिटे कोच को हटाने के साथ ही कर्मचारियों की भर्ती को रेलवे के विकास से जोड़ते हुए इस तरह का भी सुझाव भेजा है।