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सात-सात सौ रुपये में खरीदीं पुरानी साइकिलें, बिस्किट खा-खाकर चार दिन में एमपी से पहुंचे घर
Wed, 29 Apr 2020 12:56 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 29 Apr 2020 12:56 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
प्रतापगढ़। लॉकडाउन में मध्यप्रदेश के सिवनी में फंसे तीन युवक भोजन का संकट खड़ा होने के बाद साइकिल से चार दिन में घर पहुंचे। तीनों ने सात-सात सौ रुपये में दो पुरानी साइकिलें खरीदीं और घर के लिए निकल पड़े। जेब में जो रुपये थे, वह मकान मालिक ने किराया ले लिया। रास्ते में वह सिर्फ बिस्किट खाते रहे।
अमेठी जिले के जेवई भादर गांव निवासी राधेश्याम पुत्र भगवानदास और संडिला रानीगंज के लालचंद्र यादव और लक्ष्मी नारायण यादव मध्य प्रदेश के सिवनी में भारत पेट्रोलियम में काम करते थे। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे तीनों युवकों के पास जब महज दो-दो हजार रुपये बचे तो उन्होंने घर आने की योजना बना डाली। मकान मालिक ने भनक लगने पर एक-एक हजार रुपये किराया वसूल लिया। पैदल घर पहुंचना मुश्किल था, इसलिए सात-सात सौ रुपये में दो पुरानी साइकिलें खरीदीं और घर के लिए निकल पड़े। 25 अप्रैल को सिवनी से निकले राधेश्याम ने बताया कि रास्ते में उन्हें पुलिस वालों ने एक-एक पैकेट बिस्किट दिया था।
इसके बाद पूरी रात और दिन यात्रा तय करने में लगे रहे। मंगलवार को दोपहर राजगढ़ पहुंचने पर भूख से कराह रहे राधेश्याम ने गांव के शिवप्रसाद से पूरा वाकया सुनाकर मदद मांगी। शिवप्रसाद उन्हें अपने घर ले गए और नाश्ता कराने के बाद विदा किया। लालचंद्र और लक्ष्मीनारायण को रानीगंज जाना था, इसलिए देल्हूपुर में ही उन्होंने राधेश्याम का साथ छोड़ दिया था।
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अमेठी जिले के जेवई भादर गांव निवासी राधेश्याम पुत्र भगवानदास और संडिला रानीगंज के लालचंद्र यादव और लक्ष्मी नारायण यादव मध्य प्रदेश के सिवनी में भारत पेट्रोलियम में काम करते थे। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे तीनों युवकों के पास जब महज दो-दो हजार रुपये बचे तो उन्होंने घर आने की योजना बना डाली। मकान मालिक ने भनक लगने पर एक-एक हजार रुपये किराया वसूल लिया। पैदल घर पहुंचना मुश्किल था, इसलिए सात-सात सौ रुपये में दो पुरानी साइकिलें खरीदीं और घर के लिए निकल पड़े। 25 अप्रैल को सिवनी से निकले राधेश्याम ने बताया कि रास्ते में उन्हें पुलिस वालों ने एक-एक पैकेट बिस्किट दिया था।
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इसके बाद पूरी रात और दिन यात्रा तय करने में लगे रहे। मंगलवार को दोपहर राजगढ़ पहुंचने पर भूख से कराह रहे राधेश्याम ने गांव के शिवप्रसाद से पूरा वाकया सुनाकर मदद मांगी। शिवप्रसाद उन्हें अपने घर ले गए और नाश्ता कराने के बाद विदा किया। लालचंद्र और लक्ष्मीनारायण को रानीगंज जाना था, इसलिए देल्हूपुर में ही उन्होंने राधेश्याम का साथ छोड़ दिया था।
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