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नहीं काटने होंगे चक्कर घर बैठे होगी वरासत
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:11 AM IST
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प्रॉपर्टी, फ्लैट, हाउस
- फोटो : डेमो फोटो
वरासत के लिए तहसील और लेखपालों के चक्कर काटने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। अब वरासत बदलने की जिम्मेदारी लेखपालों की होगी। वे परिवार के मुखिया की मौत के बाद खुद घर पहुंचकर वरासत बदलेंगे। सारी प्रक्रिया पूरी कर खतौनी भी उपलब्ध कराएंगे।
घर के मुखिया की मौत के बाद परिजनों को वरासत कराने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब भरने के बाद भी लंबे समय तक मामला लटका रहता है। इसके चलते ज्यादातर लोग चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं। जब भूमि विवादित का मामला सामने आता है तो वे राजस्व अधिकारियों के पास चक्कर लगाने लगते हैं। जिले में मारपीट की सबसे ज्यादा घटनाएं जमीन के विवाद के कारण ही हो रही हैं।
पिछले दिनों जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने अभियान चलाकर हजारों वरासत बदलवाई थी, लेकिन इसके बाद भी अभी बीस हजार से अधिक मामले पेंडिंग हैं। समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने पाया कि ज्यादातर लोग वरासत बदलवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद शासन ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर वरासत दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके तहत लेखपाल लोगों से आवेदन लेने के बाद उसकी जांच करेंगे। इसके बाद निर्विवाद उत्तराधिकारों के नाम कम्पूटरीकृत खतौनी में डालकर मुहैया कराएंगे।
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घर के मुखिया की मौत के बाद परिजनों को वरासत कराने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब भरने के बाद भी लंबे समय तक मामला लटका रहता है। इसके चलते ज्यादातर लोग चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं। जब भूमि विवादित का मामला सामने आता है तो वे राजस्व अधिकारियों के पास चक्कर लगाने लगते हैं। जिले में मारपीट की सबसे ज्यादा घटनाएं जमीन के विवाद के कारण ही हो रही हैं।
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पिछले दिनों जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने अभियान चलाकर हजारों वरासत बदलवाई थी, लेकिन इसके बाद भी अभी बीस हजार से अधिक मामले पेंडिंग हैं। समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने पाया कि ज्यादातर लोग वरासत बदलवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद शासन ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों को लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर वरासत दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके तहत लेखपाल लोगों से आवेदन लेने के बाद उसकी जांच करेंगे। इसके बाद निर्विवाद उत्तराधिकारों के नाम कम्पूटरीकृत खतौनी में डालकर मुहैया कराएंगे।
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