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प्रतापगढ़: जिसका नहीं बना राशनकार्ड उसे भी सप्ताह भर का मिलेगा राशन
Mon, 27 Apr 2020 11:32 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 27 Apr 2020 11:32 PM IST
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चावल
- फोटो : सोशल मीडिया
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लॉकडाउन की लंबी अवधि में गरीब परिवारों का पेट भरने के लिए जिला प्रशासन ने अब गांव में रहने वाले गरीबों को राशन का पैकेट मुहैया कराने का फैसला लिया है। जिला प्रशासन के इस फैसले से शहर और गांव का कोई भी गरीब व्यक्ति अब भूखा नहीं रहेगा।
तहसीलों में कम्युनिटी किचेन सेंटर में तैयार होने वाला भोजन गांव तक नहीं पहुंच पाता था। नई व्यवस्था लागू होने से गांव के उन गरीबों को राशन मिलने में आसानी होगी जिनका अभी तक राशनकार्ड नहीं बना है।
लॉकडाउन की लंबी अवधि के दिन काटना गरीबों को भारी पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए पेट पालना भारी पड़ रहा है, जो दिहाड़ी मजदूरी करते थे। इन गरीबों का पेट भरने के लिए जिला प्रशासन ने जो व्यापक कार्ययोजना तैयार की है वह काफी हद तक सफल हो सकती है।
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अभी तक जिले की तहसीलों और टाउन एरिया में कम्युनिटी किचेन सेंटर में खाना बनाकर शहर और आसपास रहने वालों को मुहैया कराया जा रहा था।
मगर इस व्यवस्था से दूरदराज गांव में रहने वाले गरीबों को राहत नहीं मिल पाती थी। अब जिला प्रशासन ने टेंडर निकालकर व्यापक मात्रा में अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए गांव के गरीबों तक राशन का पैकेट पहुंचाने का फैसला लिया है।
लेखपालों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि जो वास्तव में गरीब हैं और जिनका राशनकार्ड नहीं बना है, उनके घर तक राशन किट पहुंचाएं। हालांकि तहसीलों में स्थित कम्युनिटी किचेन सेंटर से भी शहर और तहसील के आसपास रहने वाले लोगों को नियमित भोजन मिलता रहेगा।
जिले में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, इसके लिए अब एक परिवार के लिए एक सप्ताह का राशन पैक कराया जा रहा है। लेखपाल गरीबों को राशन पैकेट मुहैया कराएंगे। यह व्यवस्था लॉकडाउन तक जारी रहेगी।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम
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तहसीलों में कम्युनिटी किचेन सेंटर में तैयार होने वाला भोजन गांव तक नहीं पहुंच पाता था। नई व्यवस्था लागू होने से गांव के उन गरीबों को राशन मिलने में आसानी होगी जिनका अभी तक राशनकार्ड नहीं बना है।
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लॉकडाउन की लंबी अवधि के दिन काटना गरीबों को भारी पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए पेट पालना भारी पड़ रहा है, जो दिहाड़ी मजदूरी करते थे। इन गरीबों का पेट भरने के लिए जिला प्रशासन ने जो व्यापक कार्ययोजना तैयार की है वह काफी हद तक सफल हो सकती है।
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अभी तक जिले की तहसीलों और टाउन एरिया में कम्युनिटी किचेन सेंटर में खाना बनाकर शहर और आसपास रहने वालों को मुहैया कराया जा रहा था।
मगर इस व्यवस्था से दूरदराज गांव में रहने वाले गरीबों को राहत नहीं मिल पाती थी। अब जिला प्रशासन ने टेंडर निकालकर व्यापक मात्रा में अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए गांव के गरीबों तक राशन का पैकेट पहुंचाने का फैसला लिया है।
लेखपालों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि जो वास्तव में गरीब हैं और जिनका राशनकार्ड नहीं बना है, उनके घर तक राशन किट पहुंचाएं। हालांकि तहसीलों में स्थित कम्युनिटी किचेन सेंटर से भी शहर और तहसील के आसपास रहने वाले लोगों को नियमित भोजन मिलता रहेगा।
गैर प्रांत और जनपदो के लोग इसी सप्ताह हो जाएंगे विदा
गैर प्रांत और जनपद से आकर जिले में रहने वाले लोगों के इस सप्ताह अपने गृह जनपद चले जाने के बाद जिला प्रशासन का बोझ हल्का हो जाएगा। मुख्यमंत्री की पहल के बाद बाहर से आने वाले लोगों ने अपने गृह जनपद जाने के लिए आवेदन कर रखा है।जिले में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, इसके लिए अब एक परिवार के लिए एक सप्ताह का राशन पैक कराया जा रहा है। लेखपाल गरीबों को राशन पैकेट मुहैया कराएंगे। यह व्यवस्था लॉकडाउन तक जारी रहेगी।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम