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प्रतापगढ़: नहीं पड़ सकी मेडिकल कॉलेज की नींव

Mon, 18 Feb 2019 12:14 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 18 Feb 2019 12:14 AM IST
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Pratapgarh: The foundation of the medical college can not be found
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 जिला अस्पताल को उच्चीकृत मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। शासन ने एक फरवरी से इसका निर्माण शुरू कराने का आदेश दिया था। शुरु में अफसरों ने तेजी दिखाई, लेकिन अब काम थम गया है। जिला और महिला अस्पताल के पुराने भवनों को तोड़े जाने और रास्ते से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में चली गई। 2022 तक शासन ने इसे तैयार करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब लोगों को इसके लटकने का डर सताने लगा है।
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सरकार बनने के कुछ महीनों बाद ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ को मेडिकल कॉलेज का तोहफा दिया था। शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने जमीन भी चिह्नित कर ली। राजकीय निर्माण निगम रायबरेली को इसके निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था नामित किया गया। मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपये का बजट भी शासन ने पास कर दिया।
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एक फरवरी से निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए कार्यदायी संस्था को आदेश दिया था। मगर 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। शुरु में अफसरों ने काफी तेजी दिखाई। मेडिकल कालेज निर्माण के लिए जिला व महिला अस्पताल को तोड़कर आठ मंजिला भवन तैयार करने और चिकित्सकों के साथ नर्सों के लिए बने आवासों को तोड़कर गिराने के लिए आदेश भी जारी कर दिया गया।
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करीब एक महीने पहले जिला अस्पताल के सीएमएस ने नर्स और डॉक्टरों को सरकारी आवास सात दिनों के अंदर खाली करने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया। जिला अस्पताल के बाहर अतिक्रमण हटाने के लिए भी नाप-जोख की गई। ऐसे में लोगों को आस जगी कि अब जल्द ही उनका सपना पूरा होने वाला है, लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ कि सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया।

न आवास तोड़े गए और न ही मेडिकल कालेज की नींव पड़ सकी। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने टेंडर निकाला था। हैदराबाद की दो पार्टियों ने मिलकर टेंडर लिया। टेंडर पास होने के बाद किसी कारण बस उसे फिर निरस्त कर दिया गया। अब रिटेंडर निकाला गया है। रिटेंडर कब पूरा होगा इसके बारे में अभी कार्यदायी संस्था भी कुछ नहीं बता पा रही है।

आचार संहिता लागू होने से पहले पड़ सकती है नींव
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ लोगों में यह चर्चा है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले मेडिकल कालेज की नींव पड़ सकती है। सियासत के चक्कर में ही अब तक इसका शिलान्यास नहीं हो सका। हालांकि अफसर और जनप्रतिनिधि इस पर कुछ खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।

पहले दिखी तेजी, फिर अफसर भी हो गए सुस्त
शासन के आदेश के बाद एक बार पीडब्ल्यूडी के साथ स्वास्थ्य विभाग के अफसरों में तेजी देखने को मिली। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने तेजी दिखाते हुए अस्पताल में नाप-जोख करनी शुरू कर दी। जर्जर हो चुके भवनों को तोड़ने के लिए नक्शा तैयार करने लगे। इस बीच जिला अस्पताल के बाहर स्थित कुछ दुकानों के तोड़े जाने की बात सामने आई तो व्यापारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीच में सांसद हरिवंश सिंह आ गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक भी दुकानें नहीं तोड़ी जाएंगी। चाहे मेडिकल कालेज का रास्ता भले ही बदलना पड़े।


मेडिकल कालेज हर हाल में बनेगा। प्रक्रिया चल रही है। टेंडर के चलते कुछ विलंब जरूर हुआ है, लेकिन समय पर इसका निर्माण कार्य पूरा होगा।
हरिवंश सिंह, सांसद।

ज्यादा जानकारी राजकीय निर्माण निगम रायबरेली ही दे सकता है। इतना जरूर पता है कि टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। जिसके चलते मेडिकल कॉलेज की नींव नहीं पड़ सकी है। एक फरवरी से शासन ने मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करवाने के लिए आदेश दिया था।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी।
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