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चालक के मुतबिक बना रोडवेज बसों का स्टॉपेज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:32 PM IST
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रोडवेज के अधिकतर चालक व परिचालक मनमानी पर उतारू हो गए हैं। जिस होटल पर मन करे वहीं बस खड़ी कर देते हैं। यात्रियों की सुविधा से उन्हें कोई मतलब नहीं होता है।रोडवेज पर सवार यात्रियों के सुविधा के लिए विभाग की ओर से हर रूट पर एक-एक होटल पंजीकृत किया गया है।
चालक व परिचालक को यात्रियों के सुविधानुसार होटल पर रुकने का निर्देश भी दिया गया है। मगर उन्होंने सोनाएं, चिलबिला व भुपियामऊ में स्थित ढाबा संचालकों से सेटिंग कर ली है। चालक वहीं बस खड़ी करते हैं। बस प्रतापगढ़ की हो या फिर गाेंडा, बस्ती, बहराइच, फैजाबाद डिपो की। इन्हीं ढाबों पर ही रुकती हैं। यात्रियाें को कितनी भी जल्दी हो, चालकाें-परिचालकाें को इसकी कोई परवाह नहीं रहती।
होटलों पर बस रोकने वाले रोडवेज चालकों व परिचालकों को संचालक नाश्ता और भोजन मुफ्त में कराते हैं। अपने फायदा के चलते चालक व परिचालक अवैध होटल पर बस को रोक देते हैं। संचालक यात्रियों से दो का तीन गुना दाम लेकर उसी पैसों से चालक-परिचालक को मुफ्त में भरपेट भोजन के साथ उनकी जेब भी गर्म करते हैं। जबकि पंजीकृत होटल पर उन्हें टोकन से संतोष करना पड़ता है। इसी कारण मनचाहे स्टॉपेज पर बसों को रोका जाता है।
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विभाग की ओर से प्रति तीस किमी पर एक होटल का पंजीयन किया गया है। इसके बीच में चालक व परिचालक को मात्र सवारी लेने और उतारने की ही छूट दी गई है। मगर वह अधिकारियों के इस आदेश को सुनने को तैयार नहीं हैं। प्रतापगढ़ डिपो से छह किमी दूर स्थित भुपियामऊ और तीन किमी दूर स्थित सोनाएं व चिलबिला में चालक व परिचालक होटलों पर बसों को खड़ी कर देते हैं।
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चालक व परिचालक को यात्रियों के सुविधानुसार होटल पर रुकने का निर्देश भी दिया गया है। मगर उन्होंने सोनाएं, चिलबिला व भुपियामऊ में स्थित ढाबा संचालकों से सेटिंग कर ली है। चालक वहीं बस खड़ी करते हैं। बस प्रतापगढ़ की हो या फिर गाेंडा, बस्ती, बहराइच, फैजाबाद डिपो की। इन्हीं ढाबों पर ही रुकती हैं। यात्रियाें को कितनी भी जल्दी हो, चालकाें-परिचालकाें को इसकी कोई परवाह नहीं रहती।
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होटलों पर बस रोकने वाले रोडवेज चालकों व परिचालकों को संचालक नाश्ता और भोजन मुफ्त में कराते हैं। अपने फायदा के चलते चालक व परिचालक अवैध होटल पर बस को रोक देते हैं। संचालक यात्रियों से दो का तीन गुना दाम लेकर उसी पैसों से चालक-परिचालक को मुफ्त में भरपेट भोजन के साथ उनकी जेब भी गर्म करते हैं। जबकि पंजीकृत होटल पर उन्हें टोकन से संतोष करना पड़ता है। इसी कारण मनचाहे स्टॉपेज पर बसों को रोका जाता है।
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विभाग की ओर से प्रति तीस किमी पर एक होटल का पंजीयन किया गया है। इसके बीच में चालक व परिचालक को मात्र सवारी लेने और उतारने की ही छूट दी गई है। मगर वह अधिकारियों के इस आदेश को सुनने को तैयार नहीं हैं। प्रतापगढ़ डिपो से छह किमी दूर स्थित भुपियामऊ और तीन किमी दूर स्थित सोनाएं व चिलबिला में चालक व परिचालक होटलों पर बसों को खड़ी कर देते हैं।