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खुले आसमान में भीग रहा अनाज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 12 Jul 2016 12:12 AM IST
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pratapgarh
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मालगाड़ियों से भरकर आने वाला अनाज बारिश में भीग रहा है। रेल प्रशासन को इसकी कतई चिंता नहीं है। खुले आसमान के नीचे बिना ढके रखे जा रहे अनाज के बोरे बारिश में भीग रहे हैं। भीगने से खराब हुए बोरों को सुखाने की भी जरूरत नहीं समझी जाती और इनको सीधे सरकारी गोदाम में डंप कर दिया जाता है। बाद में इन्हीं सडे़-गले अनाजों को गरीबों में बांटने का काम कोटेदार करते हैं।
प्रतापगढ़ रेलवे जंक्शन के भंगवा गांव के निकट मालागोदाम की सुर्खी साइडिंग है। यहां पर मालगाड़ियों से लोड करके आया हुआ सरकारी गेहूं और चावल उतारा जाता है। बाद में ट्रक से ढुलाई करके जिले के सरकारी गोदामाें में भंडारण किया जाता है। कई सालों से रेलवे द्वारा सुर्खी साइडिंग की देखरेख न होने से इसकी हालत जर्जर है। प्लेटफार्म और शेड नहीं हैं। अनाज के बोरों को खुले आसमान के नीचे जमीन पर रखा जा रहा है। जब भी बारिश होती है बोरे पानी से भीग जाते हैं। बाद में बोरों को भीगी हालत में गोदाम में रख दिया जाता है। जहां से सरकारी कोटे पर बंटने के लिये निर्गत किया जाता है।
डीआरएम के निर्देश पर एक साल पहले सुर्खी साइडिंग के कायाकल्प, प्लेटफार्म और शेड इत्यादि के निर्माण के लिये इंजीनियरिंग विभाग ने डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। मगर कायाकल्प का मामला फिस्स हो गया। रेलवेे इसकी फाइल को ठंडे बस्ते में रखकर भूल गया। वहीं ट्रक आपरेटरों का कहना है कि उनको अनाज की ढुलाई में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इस बारे में एसएस केएन शर्मा ने बताया कि सुर्खी साइडिंग मालगोदाम के कायाकल्प के लिए अधिकारियाें के निर्देश पर करीब एक साल पहले डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। उसके बाद कुछ पता नहीं चल सका।
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प्रतापगढ़ रेलवे जंक्शन के भंगवा गांव के निकट मालागोदाम की सुर्खी साइडिंग है। यहां पर मालगाड़ियों से लोड करके आया हुआ सरकारी गेहूं और चावल उतारा जाता है। बाद में ट्रक से ढुलाई करके जिले के सरकारी गोदामाें में भंडारण किया जाता है। कई सालों से रेलवे द्वारा सुर्खी साइडिंग की देखरेख न होने से इसकी हालत जर्जर है। प्लेटफार्म और शेड नहीं हैं। अनाज के बोरों को खुले आसमान के नीचे जमीन पर रखा जा रहा है। जब भी बारिश होती है बोरे पानी से भीग जाते हैं। बाद में बोरों को भीगी हालत में गोदाम में रख दिया जाता है। जहां से सरकारी कोटे पर बंटने के लिये निर्गत किया जाता है।
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डीआरएम के निर्देश पर एक साल पहले सुर्खी साइडिंग के कायाकल्प, प्लेटफार्म और शेड इत्यादि के निर्माण के लिये इंजीनियरिंग विभाग ने डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। मगर कायाकल्प का मामला फिस्स हो गया। रेलवेे इसकी फाइल को ठंडे बस्ते में रखकर भूल गया। वहीं ट्रक आपरेटरों का कहना है कि उनको अनाज की ढुलाई में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।इस बारे में एसएस केएन शर्मा ने बताया कि सुर्खी साइडिंग मालगोदाम के कायाकल्प के लिए अधिकारियाें के निर्देश पर करीब एक साल पहले डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। उसके बाद कुछ पता नहीं चल सका।
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