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पर्यटन विभाग के नक्शे से बेल्हा गायब
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:50 PM IST
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पर्यटन विभाग की ओर से तैयार की गई उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थलों की लिस्ट और मानचित्र में प्रतापगढ़ का कहीं नामोनिशान नहीं है। वेबसाइट पर क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय इलाहाबाद के हवाले से वर्ष 2010 से 2014 के बीच शहर में स्थित बेल्हा देवी मंदिर पर करीब साढ़े छह लाख पर्यटकों के आने का रिकार्ड दर्ज किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इन पांच वर्षों में बेल्हा देवी मंदिर में तकरीबन साढ़े तीन हजार विदेशी पर्यटक ही आए हैं। 2015 के आंकड़े अभी नहीं अपलोड किए गए हैं।
इन आंकड़ों को देखने के बाद एक बार किसी को भी विश्वास नहीं हो सकता है। बेल्हा देवी मंदिर जिले के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां हर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ जरूर उमड़ती है, लेकिन इनमें ज्यादातर लोग स्थानीय ही होते हैं। आसपास के कुछ पड़ोसी जिलों से लोग जरूर आते हैं, लेकिन उनकी संख्या भी न के बराबर ही होती है। स्थानीय लोगों की बातों पर गौर करें तो शायद ही मंदिर में कभी कोई विदेशी पर्यटक आया हो। जिले में सिर्फ भक्तिधाम मनगढ़ ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां विदेशी आते हैं, लेकिन इसमें पयर्टन विभाग की कोई भूमिका नहीं है। यहां आने वाले विदेशी गोलोकवासी जगद्गुरु कृपालु महाराज के भक्त होते हैं।
वर्जन
बेल्हा देवी मंदिर में आने वाले पर्यटकों के आंकड़े वहां लगने वाले मेले के अलावा होटलों और गेस्ट हाउसों से जुटाए गए हैं। विदेशी पर्यटकों के आंकड़े एलआईयू, थाने और रेलवे स्टेशन से लिए गए हैं। अभी मैं नई आई हूं। इस बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है।
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अंजू चौधरी, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, इलाहाबाद
वर्जन
बेल्हा देवी मंदिर में आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु स्थानीय होते हैं। कभी-कभी सुल्तानपुर, रायबरेली, जौनपुर से भी लोग आ जाते हैं। विदेशी पर्यटक सालभर में कभी दो-चार दिख जाते हैं। इससे ज्यादा नहीं आते हैं।
राजा पंडा, मुख्य पुजारी, बेल्हा देवी मंदिर
इनसेट
वेबसाइट पर बेल्हा देवी आने वाले पर्यटकों की संख्या
वर्ष भारतीय पर्यटक विदेशी पर्यटक कुल संख्या
2010 111000 550 111550
2011 115000 600 115600
2012 121000 657 121657
2013 150000 985 150985
2014 157500 664 158164
--------------------------------------------------
कुल 654500 3456 657956
पर्यटन विभाग ने उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थलों को छह भागों में बांटा है। इसे बौद्ध सर्किट, बुंदेलखंड, ब्रज, अवध, विंध्य-वाराणसी और वन्य जीवन-इको पर्यटन का नाम दिया गया है। सूची में प्रदेश के अन्य जिलों के साथ इलाहाबाद और कौशाम्बी भी शामिल हैं, लेकिन प्रतापगढ़ का नाम गायब है। इलाहाबाद को संगम और कुंभ के अलावा अन्य ऐतिहासिक स्थलों के चलते महत्वपूर्ण स्थान मिला है तो कौशाम्बी को बौद्ध सर्किट में जगह दी गई है, लेकिन प्रतापगढ़ का कहीं भी जिक्र नहीं है।
पर्यटन की दृष्टि से प्रतापगढ़ भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे हमेशा हाशिए पर रखा गया। जनप्रतिनिधियों के साथ पर्यटन विभाग ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। धार्मिक दृष्टि से देखें तो शहर में स्थित बेल्हा देवी मंदिर के साथ, लालगंज में घुइसरनाथ, पट्टी में बेलखरनाथ, कुंडा में हौदेश्वरनाथधाम, मानिकपुर में ज्वालादेवी मंदिर, सदर तहसील में स्थित भयहरणनाथधाम, विश्वनाथगंज में शनिदेवधाम आदि महत्वपूर्ण हैं। इनमें सिर्फ घुइसरनाथधाम ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां थोड़ा विकास हुआ है। जिले में रामवनगमन मार्ग भी है। लेकिन कभी किसी ने इन पर ध्यान नहीं दिया। ऐतिहासिक स्थलों मेें अजगरा स्थित यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल, हंडौर स्थित हिडिम्बा का टीला का भी विकास नहीं हो सका। इनको पर्यटन की दृष्टि से बढ़ाया जा सकता था। इसके अलावा यहां देखने के लिए कई राजाओं द्वारा बनवाए गए किले और महल भी हैं।
सूबे के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र जमानियां पर पर्यटन विभाग मेहरबान है। विभाग की वेबसाइट पर दर्ज विभाग के कामों में जमानियां में कई छोटे से छोटे मंदिरों के सुंदरीकरण और विकास के लिए खूब काम और धनराशि स्वीकृत हुई है। मंत्री के गांव सेवराई में भी ब्रह्मस्थल, हनुमानस्थल, शिवमंदिर तक केसुंदरीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रतापगढ़ में विभाग की तरफ से घुइसरनाथधाम के विकास के लिए धनराशि स्वीकृत होने की बात कही गई है। इसके अलावा 31 जुलाई 2014 को केंद्रीय सहायता के तहत प्रतापगढ़ के विभिन्न स्थलों के विकास की योजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत होनेे का रिकार्ड दर्ज है।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ में स्थित बेल्हा देवी धाम, चौहर्जनदेवी धाम, शबाना बाबा धाम और घुइसरनाथ धाम को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग इन स्थलों को विकसित करने की कार्ययोजना बना चुका है और इस पर काम भी चल रहा है। जल्द ही इनका विकास हो जाएगा।
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इन आंकड़ों को देखने के बाद एक बार किसी को भी विश्वास नहीं हो सकता है। बेल्हा देवी मंदिर जिले के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां हर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ जरूर उमड़ती है, लेकिन इनमें ज्यादातर लोग स्थानीय ही होते हैं। आसपास के कुछ पड़ोसी जिलों से लोग जरूर आते हैं, लेकिन उनकी संख्या भी न के बराबर ही होती है। स्थानीय लोगों की बातों पर गौर करें तो शायद ही मंदिर में कभी कोई विदेशी पर्यटक आया हो। जिले में सिर्फ भक्तिधाम मनगढ़ ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां विदेशी आते हैं, लेकिन इसमें पयर्टन विभाग की कोई भूमिका नहीं है। यहां आने वाले विदेशी गोलोकवासी जगद्गुरु कृपालु महाराज के भक्त होते हैं।
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बेल्हा देवी मंदिर में आने वाले पर्यटकों के आंकड़े वहां लगने वाले मेले के अलावा होटलों और गेस्ट हाउसों से जुटाए गए हैं। विदेशी पर्यटकों के आंकड़े एलआईयू, थाने और रेलवे स्टेशन से लिए गए हैं। अभी मैं नई आई हूं। इस बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है।
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अंजू चौधरी, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, इलाहाबाद
वर्जन
बेल्हा देवी मंदिर में आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु स्थानीय होते हैं। कभी-कभी सुल्तानपुर, रायबरेली, जौनपुर से भी लोग आ जाते हैं। विदेशी पर्यटक सालभर में कभी दो-चार दिख जाते हैं। इससे ज्यादा नहीं आते हैं।
राजा पंडा, मुख्य पुजारी, बेल्हा देवी मंदिर
इनसेट
वेबसाइट पर बेल्हा देवी आने वाले पर्यटकों की संख्या
वर्ष भारतीय पर्यटक विदेशी पर्यटक कुल संख्या
2010 111000 550 111550
2011 115000 600 115600
2012 121000 657 121657
2013 150000 985 150985
2014 157500 664 158164
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कुल 654500 3456 657956
पर्यटन विभाग ने उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थलों को छह भागों में बांटा है। इसे बौद्ध सर्किट, बुंदेलखंड, ब्रज, अवध, विंध्य-वाराणसी और वन्य जीवन-इको पर्यटन का नाम दिया गया है। सूची में प्रदेश के अन्य जिलों के साथ इलाहाबाद और कौशाम्बी भी शामिल हैं, लेकिन प्रतापगढ़ का नाम गायब है। इलाहाबाद को संगम और कुंभ के अलावा अन्य ऐतिहासिक स्थलों के चलते महत्वपूर्ण स्थान मिला है तो कौशाम्बी को बौद्ध सर्किट में जगह दी गई है, लेकिन प्रतापगढ़ का कहीं भी जिक्र नहीं है।
पर्यटन की दृष्टि से प्रतापगढ़ भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे हमेशा हाशिए पर रखा गया। जनप्रतिनिधियों के साथ पर्यटन विभाग ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। धार्मिक दृष्टि से देखें तो शहर में स्थित बेल्हा देवी मंदिर के साथ, लालगंज में घुइसरनाथ, पट्टी में बेलखरनाथ, कुंडा में हौदेश्वरनाथधाम, मानिकपुर में ज्वालादेवी मंदिर, सदर तहसील में स्थित भयहरणनाथधाम, विश्वनाथगंज में शनिदेवधाम आदि महत्वपूर्ण हैं। इनमें सिर्फ घुइसरनाथधाम ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां थोड़ा विकास हुआ है। जिले में रामवनगमन मार्ग भी है। लेकिन कभी किसी ने इन पर ध्यान नहीं दिया। ऐतिहासिक स्थलों मेें अजगरा स्थित यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल, हंडौर स्थित हिडिम्बा का टीला का भी विकास नहीं हो सका। इनको पर्यटन की दृष्टि से बढ़ाया जा सकता था। इसके अलावा यहां देखने के लिए कई राजाओं द्वारा बनवाए गए किले और महल भी हैं।
सूबे के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र जमानियां पर पर्यटन विभाग मेहरबान है। विभाग की वेबसाइट पर दर्ज विभाग के कामों में जमानियां में कई छोटे से छोटे मंदिरों के सुंदरीकरण और विकास के लिए खूब काम और धनराशि स्वीकृत हुई है। मंत्री के गांव सेवराई में भी ब्रह्मस्थल, हनुमानस्थल, शिवमंदिर तक केसुंदरीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रतापगढ़ में विभाग की तरफ से घुइसरनाथधाम के विकास के लिए धनराशि स्वीकृत होने की बात कही गई है। इसके अलावा 31 जुलाई 2014 को केंद्रीय सहायता के तहत प्रतापगढ़ के विभिन्न स्थलों के विकास की योजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत होनेे का रिकार्ड दर्ज है।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ में स्थित बेल्हा देवी धाम, चौहर्जनदेवी धाम, शबाना बाबा धाम और घुइसरनाथ धाम को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग इन स्थलों को विकसित करने की कार्ययोजना बना चुका है और इस पर काम भी चल रहा है। जल्द ही इनका विकास हो जाएगा।