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तस्वीर साफ, जंग-ए-चुनाव में 87 योद्धा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 09 Feb 2017 11:36 PM IST
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UP Election 2017: 302 millionaires are contesting in the first phase
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नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। जिले की सात विधानसभा सीटों पर कुल 87 प्रत्याशी मैदान में हैं। गुरुवार को रानीगंज विधानसभा के किसी भी प्रत्याशी के पर्चा वापस नहीं लेने के कारण यहां चुनाव के लिए दो-दो ईवीएम लगानी होगी। रानीगंज में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या 18 है। गुरुवार को शिवसेना प्रत्याशी श्याम सुन्दर और नपा अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह ने पर्चा वापस ले लिया।
जिले की सातों विधानसभा में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की तस्वीर गुरुवार को तीन बजे नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होते ही साफ हो गई। पट्टी विधानसभा से शिवसेना प्रत्याशी श्याम सुन्दर और सदर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले नपा अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह ने पर्चा वापसले लिया।
रानीगंज विधानसभा में सबसे अधिक 18 प्रत्याशी मैदान में थे। प्रशासनिक अधिकारी तीन निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे वापस लेने की पहल कर रहे थे, मगर किसी भी प्रत्याशी के तैयार नहीं होने पर अब रानीगंज विधानसभा के सभी बूथों पर दो-दो ईवीएम लगानी होगी। इस प्रकार रानीगंज विधानसभा में सबसे अधिक 18 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि सदर 14, रामपुरखास में 15, विश्वनाथगंज 14, पट्टी 13, कुंडा में छह और बाबागंज में सात प्रत्याशी मैदान में हैं।
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िसी को छेनी तो किसी को दूरबीन मिला चुनाव निशान
गुरुवार को तीन बजे के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह का आवंटन कर दिया गया। राजनैतिक दलों को निश्चित चुनाव निशान दिया गया, मगर निर्दलीय प्रत्याशियों में किसी को छेनी तो किसी को दूरबीन चुनाव चिन्ह मिला है। निर्दलीय को पसंद नहीं आने पर चुनाव अधिकारी ने उन्हें बदल कर दूसरा भी निशान दिया।
गुरुवार को कचहरी में सभी 87 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया। सपा, कांग्रेस, भाजपा और बसपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल, पब्लिक पोलिटिकल पार्टी के प्रत्याशियों को उनका निश्चित चुनाव चिन्ह प्रदान किया गया। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशियों की बारी आई तो उन्हें आरी, घड़ी, छेनी, आलमारी, स्टोप, दूरबीन, मिक्सर जैसे चुनाव चिन्ह प्रदान किए गए। चुनाव चिन्ह मिलने से असंतुष्ट निर्दलीय प्रत्याशियों को बचे हुए मनपसंद चुनाव चिन्ह प्रदान किए गए। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशियों से चुनाव अधिकारियों ने पहले ही मांग लिया था, कि आप कौनचुनाव निशान चाहते हैं। अधिकांश प्रत्याशियों ने एक ही नामलिखा था।
मगर यह चुनाव चिन्ह वर्णमाला के क्रम में दिया गया। इससे अधिकांश प्रत्याशियों के साथ ऐसा हुआ कि जो चुनाव चिन्ह मांगे थे, वह पहले से ही अन्य प्रत्याशियों के खाते में चला गया। इससे उन्हें चुनाव चिन्ह पसंद करने में काफी वक्त लग गया। हालांकि शाम छह बजे तक चुनाव चिन्ह आवंटन का दौर चलता रहा।
जिले की सातों विधानसभा में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की तस्वीर गुरुवार को तीन बजे नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होते ही साफ हो गई। पट्टी विधानसभा से शिवसेना प्रत्याशी श्याम सुन्दर और सदर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले नपा अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह ने पर्चा वापसले लिया।
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रानीगंज विधानसभा में सबसे अधिक 18 प्रत्याशी मैदान में थे। प्रशासनिक अधिकारी तीन निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे वापस लेने की पहल कर रहे थे, मगर किसी भी प्रत्याशी के तैयार नहीं होने पर अब रानीगंज विधानसभा के सभी बूथों पर दो-दो ईवीएम लगानी होगी। इस प्रकार रानीगंज विधानसभा में सबसे अधिक 18 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि सदर 14, रामपुरखास में 15, विश्वनाथगंज 14, पट्टी 13, कुंडा में छह और बाबागंज में सात प्रत्याशी मैदान में हैं।
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िसी को छेनी तो किसी को दूरबीन मिला चुनाव निशान
गुरुवार को तीन बजे के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह का आवंटन कर दिया गया। राजनैतिक दलों को निश्चित चुनाव निशान दिया गया, मगर निर्दलीय प्रत्याशियों में किसी को छेनी तो किसी को दूरबीन चुनाव चिन्ह मिला है। निर्दलीय को पसंद नहीं आने पर चुनाव अधिकारी ने उन्हें बदल कर दूसरा भी निशान दिया।
गुरुवार को कचहरी में सभी 87 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया। सपा, कांग्रेस, भाजपा और बसपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल, पब्लिक पोलिटिकल पार्टी के प्रत्याशियों को उनका निश्चित चुनाव चिन्ह प्रदान किया गया। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशियों की बारी आई तो उन्हें आरी, घड़ी, छेनी, आलमारी, स्टोप, दूरबीन, मिक्सर जैसे चुनाव चिन्ह प्रदान किए गए। चुनाव चिन्ह मिलने से असंतुष्ट निर्दलीय प्रत्याशियों को बचे हुए मनपसंद चुनाव चिन्ह प्रदान किए गए। हालांकि निर्दलीय प्रत्याशियों से चुनाव अधिकारियों ने पहले ही मांग लिया था, कि आप कौनचुनाव निशान चाहते हैं। अधिकांश प्रत्याशियों ने एक ही नामलिखा था।
मगर यह चुनाव चिन्ह वर्णमाला के क्रम में दिया गया। इससे अधिकांश प्रत्याशियों के साथ ऐसा हुआ कि जो चुनाव चिन्ह मांगे थे, वह पहले से ही अन्य प्रत्याशियों के खाते में चला गया। इससे उन्हें चुनाव चिन्ह पसंद करने में काफी वक्त लग गया। हालांकि शाम छह बजे तक चुनाव चिन्ह आवंटन का दौर चलता रहा।