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Pratapgarh News: आर्थोपेडिक इंप्लांट...कमीशन का खेल, व्यवस्था फेल

Mon, 11 Sep 2023 09:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Mon, 11 Sep 2023 09:02 PM IST
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Orthopedic implant...commission game, system failed
मेडिकल कॉलेज में हड्डी की समस्या में होने वाले प्रत्यारोपण के लिए बाहर से मंगाई जाती है सामग्री
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महंगी रॉड और प्लेट खरीदने को मजबूर हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों का खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है। राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में हड्डियों की समस्या दूर करने के लिए प्रत्यारोपित (इंप्लांट) की जाने वाली सामग्री मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से खरीदनी पड़ रही है। जबकि वही सामग्री अस्पताल से काफी कम कीमत में मिल सकती है। पर डॉक्टर कहते हैं स्टोर उपलब्ध नहीं।
डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज में संचालित चिकित्सालय में यदि किसी को ऑपरेशन कराना हो तो उसे मोटी रकम खर्च ही करनी पड़ती है। सूत्रों का कहना है कि कमीशन के चक्कर में प्रत्यारोपण संबंधी सामग्री इसलिए बाहर से मंगाई जाती है क्योंकि वहां से कमीशन बंधा होता है। दुकान तक तय होती है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। पूरा खेल दलालों के माध्यम से चलता है।
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निजी अस्पतालों में खर्च कई गुना ज्यादा होता है। इसलिए मरीज यहां इलाज कराने को मजबूर होता है।
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रॉड व प्लेट का दाम दाम लिया जा रहा
हाथ टूटने पर पड़ने वाली प्लेट 2500 10 हजार
पैर में घुटने के नीचे की रॉड 2500 12 हजार
जांघ की हड्डी टूटने पर पड़ने वाली रॉड 2500 15 हजार
कूल्हा टूटने पर पड़ने वाली रॉड 3500 18 हजार
कूल्हा बदलने में आने वाले सामान 9000 30 से 35 हजार
पैर की प्लेट 4500 15 से 18 हजार
पैर का शिकंजा (एक्सटर्नल फिक्सटेटर) 4000 12 से 15 हजार
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ऐसे होता है खेल
बाजार में जो सामान मिलता है, उसकी वास्तविक कीमत भी कम होती है। लेकिन दुकानदार खरीदार को लंबा चौड़ा बिल थमा देता है। बिल अस्पताल में देखा भी जाता है ताकि अतिरिक्त वसूली गई कीमत का हिसाब-किताब हो सके।
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केस एक-
बाबागंज कुंडा के चेरगढ़ से आए राम खेलावन ने बताया तीन दिनों पहले पैर टूट गया था। ऑपरेशन कराने आए तो डॉक्टर साहब ने पैसा तो नहीं लिया मगर एक पर्ची थमा दी। बाहर से सामान खरीदकर लाने को बोल दिए। साढ़े 12 हजार रुपये में रॉड मिली।
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केस दो -
जेठवारा के नागपुर से आए विशाल ने बताया कि उनका पैर टूट गया था। ऑपरेशन कराने मेडिकल कॉलेज आए, जहां रॉड, प्लेट सहित ऑपरेशन में लगने वाले सामान को मिलाकर उनसे 21 हजार रुपये लिए गए।



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मेडिकल कॉलेज में इंप्लांट नहीं मिलते हैं, इन्हें बाजार से खरीदना होता है। यदि दो से तीन गुना दाम लेकर दुकानदार इंप्लांट की बिक्री कर रहे हैं तो गलत है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। इंप्लांट बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि डॉक्टर से लेकर कर्मचारियों की सहभागिता सामने आती है तो उनके भी खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. सौभाग्य प्रकाश, सीएमएस

हड्डी के मरीजों के इलाज में दो तरह की व्यवस्थाएं हैं। पहली, जिसमें जिसमें हम अपने पास उपलब्ध सामग्री का प्रयोग करते हैं। दूसरी विकल्प मरीजों की पसंद है। जैसे- मरीज यदि टाइटेनियम की राॅड लगवाना चाहता है तो उसे खुद ही उपलब्ध कराना होगा। हमारे पास पहली व्यवस्था ( डाक्टर्स च्वाइस) की श्रेणी के कई उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, जिनकी शासन से डिमांड की गई है। सामग्री उपलब्ध होते ही है तो मरीजों को लाभ मिलेगा।
- डाॅ.सचिन कुमार, विभागाध्यक्ष हड्डी रोग
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