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Pratapgarh News: अब बढ़ेगा आंवले का कारोबार प्रोसेसिंग प्लांट बनकर तैयार
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आंवला कारोबार से जुड़े छोटे उद्यमियों के लिए राहत भरी खबर है। आंवला प्रोसेसिंग के लिए उनको दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी होगी। जुलाई माह से शुरू हो रहे आंवला प्रोसेसिंग प्लांट में वह उत्पाद तैयार कर सकेंगे।
सदर तहसील क्षेत्र के गोड़े गांव में आंवला प्रोसेसिंग प्लांट करीब सवा करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो गया है। एफपीओ (कृषि उत्पाद संगठन) प्रोसेसिंग प्लांट की निगरानी करेगा। जिले के करीब पांच हजार छोटे कारोबारी आंवला प्रोसेसिंग का कार्य बड़े उद्यमियों के प्रतिष्ठानों में कराते थे।
कई छोटे उद्यमी आंवला प्रोसेसिंग कर उत्पाद तैयार कराने के लिए प्रयागराज, सुल्तानपुर तक की दौड़ लगाते थे। आंवला प्रोसेसिंग पर करीब तीन से दस हजार रुपये का खर्च आता था।
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अब छोटे उद्यमी जिले में ही आंवला प्रोसेसिंग कर उत्पाद तैयार कर सकेंगे। उनको बड़े उद्यमियों के प्रतिष्ठानों और दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी होगी। आंवला प्रोसेसिंग के खर्च पर भी कम लागत आएगी। महज 500 से हजार रुपये का शुल्क जमा कर अमृतफल आंवला की प्रोसेसिंग हो सकेगी।
जिले में तकरीबन पांच हजार छोटे उद्यमी आंवला कारोबार से जुड़े हुए हैं। मशीनरी की उपलब्धता न होने से कुछ छोटे कारोबारी हाथ से ही उत्पाद तैयार करते थे।
आरईएस के अधिशासी अभियंता सुजीत राय ने बताया कि जुलाई माह से प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत हो जाएगी। इस परियोजना की शुरुआत पूर्व जिलाधिकारी संजीव रंजन और सीडीओ नवनीत सेहारा ने कराई थी। तकरीबन डेढ़ वर्ष की मशक्कत के बाद अब यह प्लांट बनकर तैयार है।
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सदर तहसील क्षेत्र के गोड़े गांव में आंवला प्रोसेसिंग प्लांट करीब सवा करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो गया है। एफपीओ (कृषि उत्पाद संगठन) प्रोसेसिंग प्लांट की निगरानी करेगा। जिले के करीब पांच हजार छोटे कारोबारी आंवला प्रोसेसिंग का कार्य बड़े उद्यमियों के प्रतिष्ठानों में कराते थे।
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कई छोटे उद्यमी आंवला प्रोसेसिंग कर उत्पाद तैयार कराने के लिए प्रयागराज, सुल्तानपुर तक की दौड़ लगाते थे। आंवला प्रोसेसिंग पर करीब तीन से दस हजार रुपये का खर्च आता था।
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अब छोटे उद्यमी जिले में ही आंवला प्रोसेसिंग कर उत्पाद तैयार कर सकेंगे। उनको बड़े उद्यमियों के प्रतिष्ठानों और दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी होगी। आंवला प्रोसेसिंग के खर्च पर भी कम लागत आएगी। महज 500 से हजार रुपये का शुल्क जमा कर अमृतफल आंवला की प्रोसेसिंग हो सकेगी।
जिले में तकरीबन पांच हजार छोटे उद्यमी आंवला कारोबार से जुड़े हुए हैं। मशीनरी की उपलब्धता न होने से कुछ छोटे कारोबारी हाथ से ही उत्पाद तैयार करते थे।
आरईएस के अधिशासी अभियंता सुजीत राय ने बताया कि जुलाई माह से प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत हो जाएगी। इस परियोजना की शुरुआत पूर्व जिलाधिकारी संजीव रंजन और सीडीओ नवनीत सेहारा ने कराई थी। तकरीबन डेढ़ वर्ष की मशक्कत के बाद अब यह प्लांट बनकर तैयार है।