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4.85 लाख परिवारों को अब नहीं मिलेगी चीनी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 28 Mar 2017 11:55 PM IST
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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से सस्ती चीनी पाने वाले जिले के करीब 4.85 लाख परिवारों को झटका लगा है। जिले में प्रतिमाह आने वाली करीब 567.78 मीट्रिक टन चीनी मार्च में जिले में नहीं आई है। अब इन परिवारों को सस्ती चीनी नहीं मिलेगी। अप्रैल में उन्हें राशन तो मिलेगा, मगर चीनी नहीं मिलेगी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राशन पाने वाले 4.85 लाख परिवारों को प्रति कार्ड 800 ग्राम और अन्त्योदय कार्ड धारकों को प्रतिकार्ड 2 किग्रा चीनी प्रतिमाह मिलती थी। 13.50 रुपये प्रति किग्रा सब्सिडी पर मिलने वाली चीनी से उन परिवारों के लिए बड़ी राहत होती थी, जो खुले बाजार में चीनी खरीदने में अक्षम होते थे। खुले बाजार में चीनी करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। शासन की ओर से खाद्य विभाग को सब्सिडी पर चीनी मुहैया कराई जाती थी, मगर मार्च में सब्सिडी नहीं मिलने के कारण चीनी मिलों से आवंटन नहीं हुआ है।
गरीबों को मिलने वाली चीनी से कोटेदार भी मालामाल होते थे। दरअसल राशन की दुकान में आने वाली चीनी खुले बाजार में बिकने वाली चीनी की तुलना में लगभग चार गुना सस्ती होती थी। इसका फायदा कोटेदार भी खूब उठाते थे। बताया जाता है कि वह गरीबों को चीनी देने के बजाय खुले बाजार में बेच लेते थे। इससे वह मालामाल हो जाते थे। एआरओ सतीश मिश्र ने बताया कि चीनी का आवंटन नहीं आने से अप्रैल में राशनकार्ड धारकों को चीनी नहीं मिलेगी। हालांकि गेहूं और चावल पूर्व की भांति मिलता रहेगा।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राशन पाने वाले 4.85 लाख परिवारों को प्रति कार्ड 800 ग्राम और अन्त्योदय कार्ड धारकों को प्रतिकार्ड 2 किग्रा चीनी प्रतिमाह मिलती थी। 13.50 रुपये प्रति किग्रा सब्सिडी पर मिलने वाली चीनी से उन परिवारों के लिए बड़ी राहत होती थी, जो खुले बाजार में चीनी खरीदने में अक्षम होते थे। खुले बाजार में चीनी करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। शासन की ओर से खाद्य विभाग को सब्सिडी पर चीनी मुहैया कराई जाती थी, मगर मार्च में सब्सिडी नहीं मिलने के कारण चीनी मिलों से आवंटन नहीं हुआ है।
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गरीबों को मिलने वाली चीनी से कोटेदार भी मालामाल होते थे। दरअसल राशन की दुकान में आने वाली चीनी खुले बाजार में बिकने वाली चीनी की तुलना में लगभग चार गुना सस्ती होती थी। इसका फायदा कोटेदार भी खूब उठाते थे। बताया जाता है कि वह गरीबों को चीनी देने के बजाय खुले बाजार में बेच लेते थे। इससे वह मालामाल हो जाते थे। एआरओ सतीश मिश्र ने बताया कि चीनी का आवंटन नहीं आने से अप्रैल में राशनकार्ड धारकों को चीनी नहीं मिलेगी। हालांकि गेहूं और चावल पूर्व की भांति मिलता रहेगा।
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