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Pratapgarh News: खतरे में जान, एंटीबायोटिक गोली के नाम पर खिला रहे खड़िया
Thu, 23 Nov 2023 09:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Nov 2023 09:25 PM IST
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जिले के कई मेडिकल स्टोर संचालक नकली दवाएं बेंच रहे हैं। गंभीर रोगों में दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के नाम पर मरीजों को खड़िया खिलाकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। दवा के रैपर पर संबंधित साल्ट का जिक्र ही नहीं, निर्माता कंपनी का भी पता फर्जी निकला। यह खुलासा औषधि प्रशासन विभाग की जांच में हुआ है। विभाग की टीम ने जांच के लिए जो नमूने प्रयोगशाला भेजे थे, उन्हीं की ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने हथिगवां स्थित राज मेडिकल स्टोर से बीते 21 अप्रैल 2022 को एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। 19 जुलाई 2022 में लखनऊ स्थित औषधि प्रयोगशाला से चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में पता चला कि रैपर में जो दवा लिखी है, गोली में दवा नहीं, खड़िया है।
मेडिकल स्टोर संचालक ने टीम सदस्यों को बताया था कि दवा की खरीद गोरखपुर स्थित एक दवा निर्माता से की गई थी। औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने जब दवा कंपनी के बारे में पता कराया तो वहां उसका कोई अता-पता नहीं चला। विभाग के अधिकारियों ने तत्काल दवा की बिक्री पर रोक लगा दी।
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इसी तरह कुंडा के फोनिक्स मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा ओफ्लाॅक्सासिन का नमूना लिया गया था। जांच में पता चला कि रैपर के अंदर रखी दवा की गोली में ओफ्लॉक्सासिन दवा का साल्ट ही नहीं है। इसी तरह महेशगंज के महेवा मलकिया स्थित बृजलाल मेडिकल स्टोर से एल्ट्रामॉक्स एलबी 625 का नमूना लिया था। जांच में यह दवा मानक के अनुरूप पाई गई।
टीम सदस्यों ने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र रानीगंज से कैल्शियम की गोलियों का नमूना जांच के लिए भेजा था। कैल्शियम की गोलियां मानक के अनुरूप मिला।
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नकली दवा बेचने वालों के खिलाफ वाद दायर
सील कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजी गई दवाओं की रिपोर्ट से साफ है कि नकली दवाओं का बाजार गरम है। मेडिकल स्टोरों पर धड़ल्ले से नकली दवाओं की बिक्री की जा रही है। खाद्य एवं सुरक्षा औषधि प्रशासन की टीम ने रिपोर्ट आने के बाद संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दायर किया है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने हथिगवां स्थित राज मेडिकल स्टोर से बीते 21 अप्रैल 2022 को एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। 19 जुलाई 2022 में लखनऊ स्थित औषधि प्रयोगशाला से चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में पता चला कि रैपर में जो दवा लिखी है, गोली में दवा नहीं, खड़िया है।
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मेडिकल स्टोर संचालक ने टीम सदस्यों को बताया था कि दवा की खरीद गोरखपुर स्थित एक दवा निर्माता से की गई थी। औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने जब दवा कंपनी के बारे में पता कराया तो वहां उसका कोई अता-पता नहीं चला। विभाग के अधिकारियों ने तत्काल दवा की बिक्री पर रोक लगा दी।
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इसी तरह कुंडा के फोनिक्स मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा ओफ्लाॅक्सासिन का नमूना लिया गया था। जांच में पता चला कि रैपर के अंदर रखी दवा की गोली में ओफ्लॉक्सासिन दवा का साल्ट ही नहीं है। इसी तरह महेशगंज के महेवा मलकिया स्थित बृजलाल मेडिकल स्टोर से एल्ट्रामॉक्स एलबी 625 का नमूना लिया था। जांच में यह दवा मानक के अनुरूप पाई गई।
टीम सदस्यों ने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र रानीगंज से कैल्शियम की गोलियों का नमूना जांच के लिए भेजा था। कैल्शियम की गोलियां मानक के अनुरूप मिला।
नकली दवा बेचने वालों के खिलाफ वाद दायर
सील कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजी गई दवाओं की रिपोर्ट से साफ है कि नकली दवाओं का बाजार गरम है। मेडिकल स्टोरों पर धड़ल्ले से नकली दवाओं की बिक्री की जा रही है। खाद्य एवं सुरक्षा औषधि प्रशासन की टीम ने रिपोर्ट आने के बाद संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दायर किया है।