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कुपोषित बच्चों का घी-दूध खुद खाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 31 Jul 2016 12:14 AM IST
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कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को खिलाने के लिए आने वाला घी और दूध आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही सीडीपीओ और सुपरवाइजर अपना हिस्सा बांट ले रही हैं। इतना ही नहीं दूध का पाउडर और घी देने से इनकार करने वाली कार्यकत्रियों से झड़प भी हो रही है। इधर, जिला प्रशासन ने योजना को अब तीन अगस्त से लागू करने का फैसला किया है।
जिले में हौसला पोषण मिशन योजना अब दो अगस्त के बजाय तीन अगस्त से लागू होगी। दो अगस्त को तहसील दिवस होने के कारण जिलाधिकारी ने योजना की शुरुआत अब तीन अगस्त से करने का फैसला किया है। इधर, पराग से आने वाला दूध पाउडर और घी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचने के पहले सुपरवाइजर और सीडीपीओ बांटने में जुटी हुई हैं। शुक्रवार और शनिवार को दूध और घी अधिकांश केंद्रों पर निश्चित मात्रा के अनुरूप नहीं पहुंचा। सदर परियोजना में सीडीपीओ की गैरमौजूदगी में सुपरवाइजरों ने अपना हिस्सा काटकर आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया है। मंगरौरा और बाबागंज में भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं। जहां आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से हस्ताक्षर तो दो किग्रा घी और तीन किग्रा दूध पर कराया गया, मगर एक किग्रा घी और एक किग्रा दूध का पाउडर दिया गया है।
सवाल यह उठता है कि जब आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को निश्चित मात्रा प्रदान ही नहीं की जाएगी तो वह कुपोषित बच्चों और महिलाओं में कैसे वितरित करेंगी।
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जिले में हौसला पोषण मिशन योजना अब दो अगस्त के बजाय तीन अगस्त से लागू होगी। दो अगस्त को तहसील दिवस होने के कारण जिलाधिकारी ने योजना की शुरुआत अब तीन अगस्त से करने का फैसला किया है। इधर, पराग से आने वाला दूध पाउडर और घी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचने के पहले सुपरवाइजर और सीडीपीओ बांटने में जुटी हुई हैं। शुक्रवार और शनिवार को दूध और घी अधिकांश केंद्रों पर निश्चित मात्रा के अनुरूप नहीं पहुंचा। सदर परियोजना में सीडीपीओ की गैरमौजूदगी में सुपरवाइजरों ने अपना हिस्सा काटकर आंगनबाड़ी केंद्रों को दिया है। मंगरौरा और बाबागंज में भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं। जहां आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से हस्ताक्षर तो दो किग्रा घी और तीन किग्रा दूध पर कराया गया, मगर एक किग्रा घी और एक किग्रा दूध का पाउडर दिया गया है।
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सवाल यह उठता है कि जब आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को निश्चित मात्रा प्रदान ही नहीं की जाएगी तो वह कुपोषित बच्चों और महिलाओं में कैसे वितरित करेंगी।