फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   In the Gaushalas, the stray animals without food and water

गौशालाओं में चारा-पानी के बिना तड़प रहे आवारा पशु 

Sat, 18 May 2019 12:36 AM IST
विनोद सिंह गौशालाओं में चारा-पानी के बिना तड़प रहे आवारा पशु 
गौशालाओं में चारा-पानी के बिना तड़प रहे आवारा पशु  Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 May 2019 12:36 AM IST
विज्ञापन
In the Gaushalas, the stray animals without food and water
गौशाला - फोटो : pratapgarh
आवारा पशुओं को रखने के लिए बनाए गए गौशाला केंद्रों का बुरा हाल है। गर्मी से बेहाल पशुओं को धूप से बचाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। तेज धूप और लू से परेशान जानवर अपना सिर छिपाने के लिए कभी इस कोने, तो कभी उस कोने का चक्कर लगा रहे हैं। चुनाव में व्यस्त अफसरों को गौशाला केंद्रों को देखने की फुर्सत ही नहीं है। शासन ने एक करोड़ रुपये का बजट दिया था, मगर अफसर अभी तक 54 लाख रुपये दबाकर बैठे हुए हैं।  
विज्ञापन


जिले में 16 गौ संरक्षण केंद्रों में लगभग 2600 जानवरों को रखा गया है। इन जानवरों को पानी और भूसा देने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। जेठवारा थाने के निकट स्थित गौ संरक्षण केंद्र की स्थापना जिला पंचायत ने कराई है। इसमें छोटा सा टीनशेड और आठ जानवरों के खाने के लिए चरही बनाई गई है। टीनशेड छोटा होने के कारण अधिकांश पशुओं को धूप में ही बैठना पड़ता है।
विज्ञापन


आश्चर्य की बात तो यह है कि इस गौ संरक्षण केंद्र में एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई है। इससे स्थानीय लोगों की कृपा पर यह जानवर हैं। कोहड़ौर के शंकरपुर में स्थित पडऱीपाल में मां जालपा देवी गौशाला का निर्माण कराया गया है। इसमें लगभग 250 जानवरों को रख गया है। धूप और लू चलने से जानवर कभी इस कोने तो कभी उस कोने दौड़ते रहते हैं। यह तो महज उदाहरण हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले की अधिकांश गौशालाओं में लगभग यही हाल है। आश्चर्य की बात तो यह है कि शासन ने इनके चारा-पानी के लिए एक करोड़ का बजट दिया था, मगर अभी तक 46 लाख रुपये ही खर्च किए गए हैं, जबकि 54 लाख रुपये अफसर दबाकर बैठे हुए हैं। 

हर ब्लाक में खुलने थे गौशाला केंद्र 
जिले के 17 ब्लाकों में गौशाला केंद्र खुलने थे। मगर अभी तक मात्र नौ विकास खंडों में खुले हैं। सीडीओ ने बीडीओ और पशु डॉक्टरों को पत्र भेजकर अविलंब काम प्रारंभ करने को कहा है। जिससे आवारा पशुओं को कैद किया जा सके। 

आवारा पशु बने जान के दुश्मन 
जिले के आवारा पशु राहगीरों की जान के दुश्मन बने हैं। पट्टी कोतवाली के भिटार गांव निवासी रामराज यादव को सांड़ ने हमला कर मार डाला था। अंतू इलाके के दांदूपुर अहिबरन गांव में रामलाल और रामदुलार प्रजापति को अधमरा कर दिया था। महीनों इलाज के बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। 

रतजगा करके खेत की करते हैं रखवाली 
जायद की फसल को आवारा पशुओं से बचाने के लिए किसान रतजगा करके निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में आवारा पशुओं से किसानों को हमले की भी आशंका बनी रहती है। फिलहाल गांव में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चला है। 


जिले के जिन ब्लाकों में अभी तक गौ संरक्षण केंद्र नहीं खुले हैं, वहां अविलंब खोलने को कहा गया है। गौ संरक्षण केंद्रों पर पानी और चारे की समुचित व्यवस्था के लिए हिदायत दी गई है। जहां से डिमांड आती है, वहां धनराशि भेजी जा रही है। 
डॉ. वीपी सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed