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झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सिर्फ जुबानी होती है कार्रवाई
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अवैध क्लीनिकों पर पहले ताला, फिर खुलवाता भी है स्वास्थ्य विभाग
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सिर्फ जुबानी होती है कार्रवाई
साल भर में महज सात के खिलाफ दर्ज कराया गया मुकदमा
प्रतापगढ़। अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पताल, क्लीनिक और झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग सिर्फ जुबानी कार्रवाई कर रहा है। जांच के दौरान विभाग के अफसरों ने जिन क्लीनिकों को अवैध बताते हुए ताला लगवाया, दोबारा फिर उन्हें खुलवा दिया गया। जबकि शासन की ओर से साफ आदेश है कि सीज अस्पताल का ताला नहीं खुलेगा। इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। दरअसल, अवैध अस्पताल और क्लीनिक लिखापढ़ी में सीज किए ही नहीं जाते हैं। बाद में अफसर सेटिंग कर चुप्पी साध जाते हैं।
जनपद में गली-गली झोलाछाप इलाज के नाम पर दुकान खोलकर बैठे हैं। कुछ मेडिकल स्टोर खोल रखे हैं तो कुछ क्लीनिक और अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है, लेकिन अफसर चुप्पी साधे रहते हैं। झोलाछापों के गलत इलाज से किसी की मौत होने या इनके अस्पतालों में कोई बड़ी घटना होने के बाद दबाव में अफसर छापामारी करने जाते हैं। हैरत की बात यह है कि ज्यादातर झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ जुुबानी होती है। लिखापढ़ी में कुछ नहीं किया जाता है।
चार माह पहले सीएमओ एके श्रीवास्तव के आदेश पर डिप्टी सीएमओ सीपी शर्मा ने प्रताप बहादुर पार्क में स्थित अली हॉस्पिटल, अजीत नगर में स्थित ज्योति नर्सिंगहोम के साथ पुराने मालगोदाम रोड पर और दहिलामऊ के पास स्थित दो नर्सिंगहोम के साथ ही गीता नगर में स्थित ललिता मेडीकेयर को सीज कर दिया था। कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को अवैध रूप से संचालित होना बताया था। सभी में सरकारी ताला भी जड़ दिया गया था। अब सभी अस्पताल फिर खुल गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को भी इसकी जानकारी है, लेकिन वह चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि एक साल में सात झोलाछापों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, जबकि अभियान के दौरान 22 से अधिक लोगों को नोटिस दिया गया था। दरअसल, विभाग के अफसर यहां भी खेल करते हैं। जुबानी कार्रवाई की बात तो कही जाती है, लेकिन थाने में तहरीर ही नहीं भेजी जाती।
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बच्ची के मौत के बाद ललिता मेडीकेयर को किया गया था सीज
गीतानगर में स्थित ललिता मेडीकेयर में एक बच्ची की मौत हो गई थी। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहा था। सीएमओ ने अस्पताल को सीज करवा दिया था। कुछ ही दिनों बाद उसे फिर से खुलवा दिया। अस्पताल का संचालन शुरू हो गया। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को भर्ती कर इलाज करना शुरू कर दिए हैं। अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। इस मामले में सीएमओ से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाद में मोबाइल बंद कर दिया।
सीएमओ के आदेश पर छापामारी की जाती है। चिह्नित झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सीएमओ को अवगत करवा दिया जाता है। ताला उनके आदेश पर ही बंद होता है और उनके ही आदेश पर खोला जाता है। ज्यादा जानकारी वही दे सकते हैं।
डॉक्टर सीपी शर्मा, सीएमओ।
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झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सिर्फ जुबानी होती है कार्रवाई
साल भर में महज सात के खिलाफ दर्ज कराया गया मुकदमा
प्रतापगढ़। अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पताल, क्लीनिक और झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग सिर्फ जुबानी कार्रवाई कर रहा है। जांच के दौरान विभाग के अफसरों ने जिन क्लीनिकों को अवैध बताते हुए ताला लगवाया, दोबारा फिर उन्हें खुलवा दिया गया। जबकि शासन की ओर से साफ आदेश है कि सीज अस्पताल का ताला नहीं खुलेगा। इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। दरअसल, अवैध अस्पताल और क्लीनिक लिखापढ़ी में सीज किए ही नहीं जाते हैं। बाद में अफसर सेटिंग कर चुप्पी साध जाते हैं।
जनपद में गली-गली झोलाछाप इलाज के नाम पर दुकान खोलकर बैठे हैं। कुछ मेडिकल स्टोर खोल रखे हैं तो कुछ क्लीनिक और अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है, लेकिन अफसर चुप्पी साधे रहते हैं। झोलाछापों के गलत इलाज से किसी की मौत होने या इनके अस्पतालों में कोई बड़ी घटना होने के बाद दबाव में अफसर छापामारी करने जाते हैं। हैरत की बात यह है कि ज्यादातर झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ जुुबानी होती है। लिखापढ़ी में कुछ नहीं किया जाता है।
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चार माह पहले सीएमओ एके श्रीवास्तव के आदेश पर डिप्टी सीएमओ सीपी शर्मा ने प्रताप बहादुर पार्क में स्थित अली हॉस्पिटल, अजीत नगर में स्थित ज्योति नर्सिंगहोम के साथ पुराने मालगोदाम रोड पर और दहिलामऊ के पास स्थित दो नर्सिंगहोम के साथ ही गीता नगर में स्थित ललिता मेडीकेयर को सीज कर दिया था। कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को अवैध रूप से संचालित होना बताया था। सभी में सरकारी ताला भी जड़ दिया गया था। अब सभी अस्पताल फिर खुल गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को भी इसकी जानकारी है, लेकिन वह चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि एक साल में सात झोलाछापों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, जबकि अभियान के दौरान 22 से अधिक लोगों को नोटिस दिया गया था। दरअसल, विभाग के अफसर यहां भी खेल करते हैं। जुबानी कार्रवाई की बात तो कही जाती है, लेकिन थाने में तहरीर ही नहीं भेजी जाती।
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बच्ची के मौत के बाद ललिता मेडीकेयर को किया गया था सीज
गीतानगर में स्थित ललिता मेडीकेयर में एक बच्ची की मौत हो गई थी। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहा था। सीएमओ ने अस्पताल को सीज करवा दिया था। कुछ ही दिनों बाद उसे फिर से खुलवा दिया। अस्पताल का संचालन शुरू हो गया। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को भर्ती कर इलाज करना शुरू कर दिए हैं। अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। इस मामले में सीएमओ से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाद में मोबाइल बंद कर दिया।
सीएमओ के आदेश पर छापामारी की जाती है। चिह्नित झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सीएमओ को अवगत करवा दिया जाता है। ताला उनके आदेश पर ही बंद होता है और उनके ही आदेश पर खोला जाता है। ज्यादा जानकारी वही दे सकते हैं।
डॉक्टर सीपी शर्मा, सीएमओ।