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कागजों पर ही घट गई गरीबों संख्या
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 12 May 2016 12:03 AM IST
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जिले में सामाजिक-आर्थिक गणना में जमकर खेल हुआ है। कर्मचारियों ने घर-घर जाकर परिवार की आर्थिक स्थिति से अवगत हुए बिना ही कागजी कोरम पूरा कर सर्वे रिपोर्ट भेज दी है। वर्ष 2011 में हुई आर्थिक गणना की जो रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है उसमें जिले में मात्र 57,693 गरीब मिले हैं। अब जिला प्रशासन अपनी कमी को छिपाने के लिए छूटे हुए लोगों को नए सिरे से जोड़ने की बात कह रहा है। जिले में प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर सामाजिक आर्थिक गणना होती है। वर्ष 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक गणना की रिपोर्ट को ग्राम्य विकास आयुक्त की मुहर लगने के बाद जिला प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक किया है। वर्ष 2011 की जनगणना में जिले की आबादी 32,09,141 थी। सर्वे के मुताबिक जिले में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों की संख्या लगभग 57,693 है। जबकि वर्ष 2001 की आर्थिक गणना में गरीबों की वास्तविक संख्या 1,94,407 थी। वर्ष 2011 की आर्थिक गणना में इतना अधिक अंतर आने से जिले के लोग दंग हैं। बीते दिनों जिला योजना की बैठक में यह मुद्दा उठने पर जिले के प्रभारी मंत्री ने जांच कराकर छूटे हुए लोगों को शामिल करने की बात कही थी। मगर यह मामला अब पूरी तरह शासन के हाथ में है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो ग्राम्य विकास आयुक्त की अनुमति के बाद भी नए नाम शामिल हो सकते हैं। ऐसे में जिले के अधिकारी चाह कर भी कोई मदद करने में सक्षम नहीं हैं।
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