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चंद रुपये की लालच में बिके हजारों खाते!

Wed, 16 Nov 2016 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Wed, 16 Nov 2016 12:39 AM IST
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कालेधन को खपाने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। अब ऐसे लोगों ने बैंक और पोस्ट ऑफिसों में खुले जनधन और वजीफे के खातों पर नजरें गड़ा दी हैं। कालेधन को सफेद करने के लिए कुछ लोग खातेदारों को दस, बीस हजार रुपये का लालच दिखाकर उनके खाते में काला धन डालने का खेल शुरू हो गया है। लाखों की रकम पहुंच भी चुकी है। 
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जनधन योजना और वजीफे के खातों की संख्या जिले में एक लाख के ऊपर है। एसबीआई, ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी के अलावा कई और बैंकों की शाखाएं जिले में खुली हैं। एक बैंक में करीब पांच हजार जनधन और ढाई से तीन हजार के करीब वजीफे के खाते हैं। दो साल पहले जनधन के खाते शून्य बैलेंस पर खोले गए। इसके अलावा सैकड़ों स्कूलों के वजीफे के हजारों खाते चल रहे हैं। डाकखानों में भी हजारों की संख्या में जनधन के खाते खोले गए हैं। जहां तक जनधन खातों का सवाल है केवल दस फीसदी खातों में ही बराबर पैसे का लेनदेन किया जा रहा है। बाकी खाते सुचारू रूप से नहीं चल रहे हैं।
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स्कूलों के खातों की स्थिति भी कुछ ऐसी है। कुछ को छोड़कर बाकी खातों में भी साल भर में वजीफा आने के बाद एक या दो बार लेनदेन हुआ है। अब पांच सौ और हजार की पुरानी नोट बंद होने के बाद बैंकों और डाकघरों में खोले गए जनधन और वजीफे के खाते में अचानक भारी-भरकम रकम पहुंचने लगी है। नाम न छापने की शर्त पर लीड बैंक के एक जिम्मेदार ने बताया कि जनधन योजना और वजीफे के खातों में धनराशि में इजाफा होना शुरू हो गया है। प्रधान डाकघर के एक अधिकारी का कहना है कि जनधन योजना के खातें मेें अब पैसा आना शुरू हो गया है। जो खाते पिछले दो साल तक निष्क्रिय थे उनमें भी रकम आने  लगी है। 
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