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गर्मी में फिर कहर बरपाएगी आग
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Mar 2018 10:50 PM IST
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गर्मी की शुरुआत होते ही अब जिले के दमकल विभाग की परेशानी बढ़ गई है। जिले में 7 फायर स्टेशन हैं, लेकिन दो साल से विभाग को एक फायर स्टेशन अफसर नहीं मिल रहा है। प्रभारी से सभी आठ फायर स्टेशनों का काम चलाया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आधी अधूरी व्यवस्था के बीच जिलेवासियों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में जिले भर में आगजनी की घटनाएं तेजी से शुरू हो जाती हैं। आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग के पास कर्मचारियों की तैनाती के हिसाब से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है लेकिन कर्मचारियों की कमी सभी व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने में बाधा बन रही है। जिले में सात फायर स्टेशन काम कर रहा हैं। आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग के जवान भले मुस्तैद हैं लेकिन वे भी अव्यवस्थाओं से आग बुझाने के दौरान आने वाली दिक्कतों से बेहाल हो जाते हैं। जिले के आठ फायर स्टेशनों के लिए आठ निरीक्षक और 17 उपनिरीक्षक की जरूरत है। पुलिस लाइन स्थित फायर स्टेशन पर आग बुझाने वाले वाहन तो मौजूद हैं लेकिन कर्मचारियों की कमी से समस्या बनी हुई है। यहां चार बड़े टैंकर और दो छोटे प्रेशर वाहन आग बुझाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी से फायरब्रिगेड विभाग को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रभारी फायर स्टेशन अफसर महेंद्र प्रसाद ने बताया कि कर्मचारियों की कमी से विभाग जूझ रहा है। कई बार पत्र भेजा गया लेकिन हेडक्वार्टर भी कमी के चलते समस्या दूर नहीं हो सकी। कर्मचारियों की दिक्कत के चलते एक समय पर लगी आग की घटनाओं पर काबू पाने में वक्त लगता है। 135 जवानों की जगह केवल 70 कर्मचारी ही आठों फायर स्टेशन पर मौजूद हैं। पट्टी और उदयपुर में भी टैंकर के साथ कर्मचारियों को भेज दिया गया है। केवल रानीगंज फायर स्टेशन मुख्यालय से कवर किया जा रहा है।
पिछले साल 756 अगलगी की हुई थी घटनाएं
जिले में वर्ष 2017 के दौरान आगजनी की 756 घटनाएं हुईं थीं। सबसे अधिक पट्टी तहसील के अंतर्गत किसानों को खून के आंसू रोने पड़े थे। यहां करीब 15 बीघे से अधिक गेहूं की तैयार फसल जलकर राख हो गई थी। सांगीपुर व उदयपुर इलाके में भी आग लगने से कई मकान जलकर राख हो गए थे। रानीगंज थाना क्षेत्र में भी लोगों के आशियाने जल गए थे। कई स्थानों पर एक साथ आग लग जाने के कारण फायरब्रिगेड पहुंच नहीं सकी थी। जिसके चलते विवाद की नौबत भी आई थी।
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जिले में तैनात कर्मचारियों की संख्या
पद वर्तमान संख्या तैनाती का मानक
एफएसओ 0 8
उपनिरीक्षक 1 9
मुख्य आरक्षी 8 17
सिपाही 70 135
चालक 8 17
इनसेट----
रानीगंज फायर स्टेशन का चल रहा निर्माण
रानीगंज फायर स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। अभी तक मुख्यालय से ही क्षेत्र में लगने वाली घटनाओं को कवर किया जाता था लेकिन गर्मी शुरू होते ही इलाके में टैंकर के साथ ही दूसरे संसाधन से लैश कर्मचारियों को रानीगंज भेजने की तैयारी है। पट्टी और उदयपुर में फायर स्टेशन के लिए कर्मचारियोें की तैनाती कर दी गई है। वहां आग बुझाने का जिम्मा अब वे लोग संभालेंगे।
कूड़े से पटे हैं पालिका के 13 फायर हाईड्रेंट
आग लगने के दौरान फायरब्रिगेड को पानी की कमी न हो इसके लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 13 फायर हाईड्रेंट लगवाए थे। जो अब कूड़े से पट गया है। कई सालों से केवल फायर हाईड्रेंट को चालू कराने के लिए पत्राचार होता रहा लेकिन अभी तक ठीक नहीं कराया जा सका। नगर पालिका ईओ अवधेश कुमार का कहना है कि फायर हाईड्रेंट काफी पुराना है। उस समय लोहे की पाइप पड़ी थी। जो समय के साथ सड़ गई होगी। इस वजह फायर हाईड्रेंट तक सप्लाई का पानी नहीं पहुंच पाता। पालिका का टैंकर भी जरूरत पड़ने पर वहां से पानी भरता था। फायर हाईड्रेंट को ठीक कराने के लिए विचार किया जा रहा है।
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गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में जिले भर में आगजनी की घटनाएं तेजी से शुरू हो जाती हैं। आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग के पास कर्मचारियों की तैनाती के हिसाब से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है लेकिन कर्मचारियों की कमी सभी व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने में बाधा बन रही है। जिले में सात फायर स्टेशन काम कर रहा हैं। आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग के जवान भले मुस्तैद हैं लेकिन वे भी अव्यवस्थाओं से आग बुझाने के दौरान आने वाली दिक्कतों से बेहाल हो जाते हैं। जिले के आठ फायर स्टेशनों के लिए आठ निरीक्षक और 17 उपनिरीक्षक की जरूरत है। पुलिस लाइन स्थित फायर स्टेशन पर आग बुझाने वाले वाहन तो मौजूद हैं लेकिन कर्मचारियों की कमी से समस्या बनी हुई है। यहां चार बड़े टैंकर और दो छोटे प्रेशर वाहन आग बुझाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी से फायरब्रिगेड विभाग को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रभारी फायर स्टेशन अफसर महेंद्र प्रसाद ने बताया कि कर्मचारियों की कमी से विभाग जूझ रहा है। कई बार पत्र भेजा गया लेकिन हेडक्वार्टर भी कमी के चलते समस्या दूर नहीं हो सकी। कर्मचारियों की दिक्कत के चलते एक समय पर लगी आग की घटनाओं पर काबू पाने में वक्त लगता है। 135 जवानों की जगह केवल 70 कर्मचारी ही आठों फायर स्टेशन पर मौजूद हैं। पट्टी और उदयपुर में भी टैंकर के साथ कर्मचारियों को भेज दिया गया है। केवल रानीगंज फायर स्टेशन मुख्यालय से कवर किया जा रहा है।
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पिछले साल 756 अगलगी की हुई थी घटनाएं
जिले में वर्ष 2017 के दौरान आगजनी की 756 घटनाएं हुईं थीं। सबसे अधिक पट्टी तहसील के अंतर्गत किसानों को खून के आंसू रोने पड़े थे। यहां करीब 15 बीघे से अधिक गेहूं की तैयार फसल जलकर राख हो गई थी। सांगीपुर व उदयपुर इलाके में भी आग लगने से कई मकान जलकर राख हो गए थे। रानीगंज थाना क्षेत्र में भी लोगों के आशियाने जल गए थे। कई स्थानों पर एक साथ आग लग जाने के कारण फायरब्रिगेड पहुंच नहीं सकी थी। जिसके चलते विवाद की नौबत भी आई थी।
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जिले में तैनात कर्मचारियों की संख्या
पद वर्तमान संख्या तैनाती का मानक
एफएसओ 0 8
उपनिरीक्षक 1 9
मुख्य आरक्षी 8 17
सिपाही 70 135
चालक 8 17
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रानीगंज फायर स्टेशन का चल रहा निर्माण
रानीगंज फायर स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। अभी तक मुख्यालय से ही क्षेत्र में लगने वाली घटनाओं को कवर किया जाता था लेकिन गर्मी शुरू होते ही इलाके में टैंकर के साथ ही दूसरे संसाधन से लैश कर्मचारियों को रानीगंज भेजने की तैयारी है। पट्टी और उदयपुर में फायर स्टेशन के लिए कर्मचारियोें की तैनाती कर दी गई है। वहां आग बुझाने का जिम्मा अब वे लोग संभालेंगे।
कूड़े से पटे हैं पालिका के 13 फायर हाईड्रेंट
आग लगने के दौरान फायरब्रिगेड को पानी की कमी न हो इसके लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 13 फायर हाईड्रेंट लगवाए थे। जो अब कूड़े से पट गया है। कई सालों से केवल फायर हाईड्रेंट को चालू कराने के लिए पत्राचार होता रहा लेकिन अभी तक ठीक नहीं कराया जा सका। नगर पालिका ईओ अवधेश कुमार का कहना है कि फायर हाईड्रेंट काफी पुराना है। उस समय लोहे की पाइप पड़ी थी। जो समय के साथ सड़ गई होगी। इस वजह फायर हाईड्रेंट तक सप्लाई का पानी नहीं पहुंच पाता। पालिका का टैंकर भी जरूरत पड़ने पर वहां से पानी भरता था। फायर हाईड्रेंट को ठीक कराने के लिए विचार किया जा रहा है।