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मुर्गी चारा पर जीएसटी से महंगा हो गया अंडा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:29 PM IST
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ठंड के आगाज के साथ अंडे के रेट आसमान छूने लगे हैं। हर दिन जिले में सवा लाख अंडे की खपत हो रही है। जिले में हैदराबाद व पंजाब से देशी व फार्मी अंडा मंगाया जाता है। थोक से लेकर फुटकर तक मुनाफे के लिए अधिक दाम वसूला जाता है। जिस पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।
जिले में हर दिन लगभग सवा लाख अंडे की खपत है। दिसंबर, जनवरी व फरवरी माह में खपत और भी बढ़ जाती है। जिले में अंडे के थोक दुकानदार भी हैं। जो फुटकर अंडा बेचने के लिए दुकानदारों को सप्लाई कैरेट के हिसाब से देते हैं। जिले में पंजाब व हैदराबाद से देशी व फार्मी अंडे मंगाए जाते हैं। ठंड के आगाज के साथ अंडे के दाम में अचानक इजाफा हो गया है। एक माह पहले अंडा पांच रुपये में उबाल कर दिया जा रहा था। ठंड बढ़ने के साथ ही उबले अंडे की कीमत तीन रुपये बढ़ गई है। लोगों को अब अंडा 8 रुपये में मिल रहा है। जबकि थोक दुकानों से दुकानदारों को पांच रुपये में अंडा मिल रहा है। इसके पीछे का कारण जीएसटी है। नगर पालिका मार्केट में अंडे का कारोबार करने वाले खालिक का कहना है कि मुर्ग़ियों के चारे पर जीएसटी का चाबुक चला। चारे के दाम में इजाफे के कारण अंडे का रेट भी अधिक लिया जा रहा है। उन लोगों का प्रति पेटी दस रुपये का मुनाफा कंपनी की ओर से मिलता है। इलाहाबाद, कानपुर या लखनऊ से अंडा मंगाना महंगा पड़ता है। इसलिए पंजाब व हैदराबाद से सीधे देशी व फार्मी अंडा मंगाया जाता है। देशी अंडे की कीमत हमेशा फार्मी अंडे से अधिक होती है। देशी अंडे का रेट एक से लेकर दो रुपये ज्यादा होता है। खास बात यह है कि थोक की दुकानों से खरीदने के बाद दुकानदार ग्राहकों से कितना रुपये लेते हैं, इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कभी दुकानों को चेक तक नहीं करते।
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जिले में हर दिन लगभग सवा लाख अंडे की खपत है। दिसंबर, जनवरी व फरवरी माह में खपत और भी बढ़ जाती है। जिले में अंडे के थोक दुकानदार भी हैं। जो फुटकर अंडा बेचने के लिए दुकानदारों को सप्लाई कैरेट के हिसाब से देते हैं। जिले में पंजाब व हैदराबाद से देशी व फार्मी अंडे मंगाए जाते हैं। ठंड के आगाज के साथ अंडे के दाम में अचानक इजाफा हो गया है। एक माह पहले अंडा पांच रुपये में उबाल कर दिया जा रहा था। ठंड बढ़ने के साथ ही उबले अंडे की कीमत तीन रुपये बढ़ गई है। लोगों को अब अंडा 8 रुपये में मिल रहा है। जबकि थोक दुकानों से दुकानदारों को पांच रुपये में अंडा मिल रहा है। इसके पीछे का कारण जीएसटी है। नगर पालिका मार्केट में अंडे का कारोबार करने वाले खालिक का कहना है कि मुर्ग़ियों के चारे पर जीएसटी का चाबुक चला। चारे के दाम में इजाफे के कारण अंडे का रेट भी अधिक लिया जा रहा है। उन लोगों का प्रति पेटी दस रुपये का मुनाफा कंपनी की ओर से मिलता है। इलाहाबाद, कानपुर या लखनऊ से अंडा मंगाना महंगा पड़ता है। इसलिए पंजाब व हैदराबाद से सीधे देशी व फार्मी अंडा मंगाया जाता है। देशी अंडे की कीमत हमेशा फार्मी अंडे से अधिक होती है। देशी अंडे का रेट एक से लेकर दो रुपये ज्यादा होता है। खास बात यह है कि थोक की दुकानों से खरीदने के बाद दुकानदार ग्राहकों से कितना रुपये लेते हैं, इसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कभी दुकानों को चेक तक नहीं करते।
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