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होम साइंस पढ़ने का नहीं कोई अवसर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 28 Jan 2016 11:34 PM IST
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होम साइंस विषय से करियर बनाने के लिए बेल्हा की छात्राओं को दूसरे जिले में पढ़ाई करनी होगी। जिले के किसी महाविद्यालय में गृहविज्ञान विषय से परास्नातक स्तर की पढ़ाई नहीं कराई जाती। ऐसे में स्नातक तक होम साइंस से पढ़ाई करने वाली छात्राओं को मायूस होना पड़ रहा है। जिले में परास्नातक स्तर पर होम साइंस न पढ़ाए जाने के कारण मजबूरी में वह दूसरे विषय से परास्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। जबकि अधिकांश छात्राओं ने दूसरे जिले के महाविद्यालयों में प्रवेश ले रखा है।
जिले के तमाम महाविद्यालयों में स्नातक स्तर तक होम साइंस की पढ़ाई कराई जा रही है। मगर परास्नातक स्तर पर इस विषय की पढ़ाई न होने से छात्राआें को मायूस होना पड़ रहा है। छात्राओं का पसंदीदा विषय होने की वजह से प्रवेश के दौरान उनकी संख्या अधिक रहती है। वहीं प्रयोगात्मक विषय की वजह से काफी संख्या में छात्र भी इस विषय से पढ़ाई करते हैं। जिससे वह शैक्षणिक मेरिट बना सकें, लेकिन परास्नातक स्तर पर इस विषय की पढ़ाई न होने से उन्हें इस विषय से करियर बनाने में परेशानी हो रही है। स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्हें दूसरे जिलों के महाविद्यालयों में प्रवेश लेना पड़ रहा है। जिले में इस विषय के अध्ययन की व्यवस्था न होने से अधिकांश छात्र-छात्राएं मजबूरी में परास्नातक दूसरे विषय से कर रहे हैं।
इसके अलावा अन्य छात्र-छात्राएं स्नातक के बाद पढ़ाई ही छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि इस विषय से प्राइवेट व सरकारी क्षेत्रों में कैरियर बनाने के तमाम अवसर उपलब्ध रहते हैं। इसके बावजूद भी जिले में इस विषय के अध्ययन की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को दूसरे जिले में जाकर अध्ययन करना पड़ता है। वहीं महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने के लिए इस विषय के शिक्षक आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन परास्नातक शिक्षक की उपलब्धता न होने से परेशानी हो रही है। इस विषय की मान्यता के लिए राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में फाइल लगाई गई है। हालांकि मान्यता मिलने से देर होने पर पढ़ाई न हो पा रही है।
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जिले के तमाम महाविद्यालयों में स्नातक स्तर तक होम साइंस की पढ़ाई कराई जा रही है। मगर परास्नातक स्तर पर इस विषय की पढ़ाई न होने से छात्राआें को मायूस होना पड़ रहा है। छात्राओं का पसंदीदा विषय होने की वजह से प्रवेश के दौरान उनकी संख्या अधिक रहती है। वहीं प्रयोगात्मक विषय की वजह से काफी संख्या में छात्र भी इस विषय से पढ़ाई करते हैं। जिससे वह शैक्षणिक मेरिट बना सकें, लेकिन परास्नातक स्तर पर इस विषय की पढ़ाई न होने से उन्हें इस विषय से करियर बनाने में परेशानी हो रही है। स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए उन्हें दूसरे जिलों के महाविद्यालयों में प्रवेश लेना पड़ रहा है। जिले में इस विषय के अध्ययन की व्यवस्था न होने से अधिकांश छात्र-छात्राएं मजबूरी में परास्नातक दूसरे विषय से कर रहे हैं।
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इसके अलावा अन्य छात्र-छात्राएं स्नातक के बाद पढ़ाई ही छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि इस विषय से प्राइवेट व सरकारी क्षेत्रों में कैरियर बनाने के तमाम अवसर उपलब्ध रहते हैं। इसके बावजूद भी जिले में इस विषय के अध्ययन की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को दूसरे जिले में जाकर अध्ययन करना पड़ता है। वहीं महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने के लिए इस विषय के शिक्षक आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन परास्नातक शिक्षक की उपलब्धता न होने से परेशानी हो रही है। इस विषय की मान्यता के लिए राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में फाइल लगाई गई है। हालांकि मान्यता मिलने से देर होने पर पढ़ाई न हो पा रही है।
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