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Pratapgarh News: कागजों में ओडीएफ घोषित, हकीकत में शौचालयों में भूसे और कंडे का ढेर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:16 PM IST
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Declared ODF on paper; in reality, toilets are filled with piles of fodder and cow-dung cakes.
लालगंज विकासखंड के जगन्नाथपुर गांव में जर्जर शौचालय। संवाद
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने का सरकारी दावा हकीकत की जमीन पर धड़ाम हो गया है। गांवों में स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन शौचालय की स्थिति जर्जर हो गई।
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ग्रामीण भी शौचालयों में भूसे और कंडे का ढेर रख रहे हैं। आसपास गंदगी है। कुछ तो उपयोग करने लायक नहीं हैं। किसी की छत टपक रही तो किसी का दरवाजा गायब है। इस वजह से ग्रामीण शौचालयों का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
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जिले के 17 विकासखंडों की 1148 ग्राम पंचायतों में पांच लाख से अधिक शौचालय बनाए गए हैं। अभी भी हजारों परिवार इस योजना का लाभ पाने से वंचित हैं। योजना का मकसद था कि लोगों को खुले में शौच जाने से रोका जाए।
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गांवों को साफ-सुधरा बनाया जाए ताकि लोगों को बीमारियों से दूर रखा जा सके। इसके बाद भी लोग शौचालयों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। गांवों में हकीकत यह है कि कई परिवारों ने शौचालय को स्टोर रूम बना दिया है। अंदर भूसा, उपले और कूड़ा-कबाड़ भरा है।
इनसेट-
पहले मिलते थे 12 हजार रुपये, अब 10 हजार
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत पहले व्यक्तिगत शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते थे। अब यह राशि घटाकर 10 हजार रुपये कर दी गई है। इसमें शौचालय निर्माण में पहली किस्त खर्च करने के बाद दूसरी मिलती है। पैसे खाते में आते हैं। निर्माणाधीन शौचालय के फोटो भी वेबसाइट पर अपलोड करने पड़ते हैं। वहीं, जिले में अभी तक नए आवेदनों में पांच हजार परिवार पात्र मिले हैं।
इनसेट-
वर्जन
12 हजार रुपये दिए गए थे। शौचालय बन गए। अब वह जर्जर हो चुके हैं। शौचालयों का इस्तेमाल करने में डर लगता है। मरम्मत कराने के रुपये नहीं हैं। विभाग का कोई देखते तक नहीं आया कि शौचालय की हालत क्या है। - राधिका, जगन्नाथपुर
0 शौचालय का दरवाजा टूट गया है। शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं हुई। मजबूरी में अरहर के बोझ का दरवाजा बनाया है। शौचालय भी उपयोग करने लायक नहीं बचे हैं। मजबूरी में काम चला रहे हैं। - संतलाल सरोज, हिसामपुर

वर्जन--
रेट्रोफिटिंग के तहत जर्जर शौचालयों की मरम्मत पांच हजार रुपये से कराई जाती है। ग्रामीण पंचायती राज विभाग में प्रार्थना पत्र देकर शौचालयों की मरम्मत करवा सकते हैं। पंचायत सचिवों को मरम्मत कराने का आदेश दिया गया है। - श्रीकांत दर्वे, डीपीआरओ

लालगंज विकासखंड के जगन्नाथपुर गांव में जर्जर शौचालय। संवाद

लालगंज विकासखंड के जगन्नाथपुर गांव में जर्जर शौचालय। संवाद

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