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डेयरियां बंद, घट गया दूध का उत्पादन
Sun, 09 Jun 2019 12:31 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 09 Jun 2019 12:31 AM IST
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जिले में लगातार दूध का उत्पादन घट रहा है। कभी कामधेनु से बढ़ा दूध का उत्पादन अब धीरे-धीरे गिरने लगा है। योजना के तहत संचालित की गई डेयरी में से कुछ पहले ही बंद हो चुकी हैं। वहीं पशुओं में बांझपन बढ़ने से भी दूध का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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जिले में दुग्ध साधन सहकारी समिति के साथ ही कामधेनु योजना के तहत संचालित डेयरियों के बंद होने से अब दूध का उत्पादन घट रहा है। पूरे जिले में दो दशक पहले कुल 305 दुग्ध समितियों पर दूध एकत्र किया जाता था। वहां से दूध संसाधनों से दुग्ध साधन सहकारी समिति भुपियामऊ में लाया जाता था। मौजूदा समय में केवल 45 दुग्ध समितियां चालू हालत में हैं, जबकि अन्य बंद हो चुकी हैं। यही हाल कामधेनु योजना की भी है। कुल 45 डेयरियां कामधेनु योजना के तहत संचालित होती थीं, लेकिन मौजूदा समय में केवल अनुदानित 6 डेयरियां ही संचालित हैं। वहीं खपत की बात करें तो पिछले एक दशक से दूध की खपत दोगुनी हो गई है। इसके चलते कहीं न कहीं मिलावटी दूध को बढ़ावा मिल रहा है। बीते वर्ष मुख्यमंत्री गौपालक व कान्हा योजना शुरू की गई थी, लेकिन अब तक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। यदि यह योजनाएं शुरू हो जाएं दूध उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
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कामधेनु डेयरियों पर एक नजर
कामधेनू -13
मिनी कामधेनु-26
माइक्रो कामधेनु -17
बंद हुईं- 50
चालू हालत में : 6
दुग्ध समितियां- 305
बंद हुईं- 260
दूध की खपत व उपलब्धता
0 दुग्ध साधन सहकारी समितियों में प्रतिदिन 1800 लीटर दूध प्राप्त होता है
0 पराग डेयरी प्रयागराज से प्रतिदिन 550 लीटर दूध बिकने के लिए आता है
0 जिले में प्रतिदिन 11500 लीटर दूध की खपत
0 प्रतिदिन 6500 लीटर होता है जिले में दूध का उत्पादन
लगातार घट रही दुधारू मवेशियों की संख्या
जिले में लगातार दुधारू मवेशियों की संख्या घट रही है। ग्रामीण किसान भी अब पशुपालन में रुचि नहीं ले रहे हैं। तमाम कवायदों के बाद भी दुधारू पशुओं की मौत से उबर नहीं पाते। नतीजा वह दूध के कारोबार से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं।
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गर्मी में दूध की अधिक होती है खपत
गर्मी में दूध की मांग बढ़ जाती है। खपत अधिक होने व उत्पादन कम होने के कारण दूध के लिए लोगों को सोरांव, जौनपुर से आने वाले दूधियों पर निर्भर रहना पड़ता है। दूध की खपत को देखते हुए दूसरे जिलों से दूधिए आते हैं।
वर्जन-दूध मानव शरीर के लिए संपूर्ण आहार है। इसमे भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। अगर कोई मनुष्य केवल दूध का सेवन करता है तो वह स्वस्थ रहेगा। हड्डियों में होने वाले रोग से वह कभी भी ग्रसित नहीं होगा।
डा. अनुज चौरसिया, चिकित्सक, जिला अस्पताल।
पशुपालन विभाग द्वारा दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को पशुपालन के लिए जागरूक किया जा रहा है।
डा. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी