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पुलिस की शह पर चलता है पटाखे का अवैध कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:19 AM IST
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जिले में पुलिस की शह पर अवैध पटाखे का कारोबार जोरशोर से संचालित है। घटना के बाद पुलिस की जांच प्रारंभ होती है, लेकिन वह कभी पूरी नहीं हो पाती। जिसके चलते दोषियों के खिलाफ समय से कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे मनबढ़ लोग खुद की जिंदगी के साथ दूसरों की जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। अवैध पटाखों के रखने से लेकर बनने तक की जानकारी पुलिस को होती है, लेकिन वह अपना हित साधने के बाद चुप्पी साधे रहती है।
पर्वों के साथ ही शादी विवाह में लोग खुशियां मनाने के लिए पटाखा दगाते हैं। ऐसे में आतिशबाज अपने परिवार के सदस्यों के साथ लगातार पटाखा बनाने का कारोबार करते रहते हैं। पटाखा बनाने का भले ही लोग लाइसेंस लिए रहते हैं, लेकिन वे अवैध तरीके से पटाखों को बनाते हैं और उसका गोदाम भी रोक के बाद रिहायशी इलाकों मेें बना लेते हैं। लोगों का कहना है कि इस बात की जानकारी पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अमले को भी रहती है। जिम्मेदारों की शह पर पटाखे का अवैध कारोबार बस्तियों में खुलेआम चलता रहता है। सबकुछ जानने के बाद भी पुलिस चुप्पी साधे रहती है। बदले में आतिशबाज पुलिस की जेब भरते रहते हैं। पर्वों के साथ ही अफसरों के घर होने वाली शादी विवाह में भी उनसे पुलिसकर्मी बेगारी लेते रहते हैं। जिसके चलते वे नियम कानून का गला घोटते हुए मनमानी कर अपनी जान के साथ ही लोगों की जान को खतरे में डालते रहते हैं।
हादसों के बाद होती है जानकारी
तमाम अवैध कार्यों की जानकारी भले ही सिपाही से लेकर थानेदार तक को रहती है लेकिन वे हमेशा अनजान बने रहते हैं। घटनाओं के बाद उनकी सक्रियता देखते ही बनती है। वे ऐसा प्रदर्शित करते हैं कि वे लोग अभी तक अनजान थे। कटरागुलाब सिंह बाजार के लोगों आक्रोश में थे। उनका कहना था कि पुलिस जानते हुए भी आतिशबाजी करने वालों को खुली छूट दे रखी थी। जिससे पड़ोस के लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ था।
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दिखावे को बना लेते हैं गोदाम
लाइसेंसधारक आतिशबाज पर्वों के दौरान अधिकारियों को दिखावे के लिए गोदाम बना लेते हैं। हकीकत में वे गोदाम का प्रयोग ही नहीं करते। यह जानते हुए भी कि बारूद से उनके परिवार के साथ ही आसपास के लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है लेकिन बावजूद वे मनमानी करते रहते हैं। लोगों का कहना है कि आतिशबाज चांद बाबू ने भयहरणनाथ धाम रोड पर गोदाम बना रखा था। हकीकत यह है कि उस गोदाम में कभी भी कोई काम करते नहीं दिखा।
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पर्वों के साथ ही शादी विवाह में लोग खुशियां मनाने के लिए पटाखा दगाते हैं। ऐसे में आतिशबाज अपने परिवार के सदस्यों के साथ लगातार पटाखा बनाने का कारोबार करते रहते हैं। पटाखा बनाने का भले ही लोग लाइसेंस लिए रहते हैं, लेकिन वे अवैध तरीके से पटाखों को बनाते हैं और उसका गोदाम भी रोक के बाद रिहायशी इलाकों मेें बना लेते हैं। लोगों का कहना है कि इस बात की जानकारी पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अमले को भी रहती है। जिम्मेदारों की शह पर पटाखे का अवैध कारोबार बस्तियों में खुलेआम चलता रहता है। सबकुछ जानने के बाद भी पुलिस चुप्पी साधे रहती है। बदले में आतिशबाज पुलिस की जेब भरते रहते हैं। पर्वों के साथ ही अफसरों के घर होने वाली शादी विवाह में भी उनसे पुलिसकर्मी बेगारी लेते रहते हैं। जिसके चलते वे नियम कानून का गला घोटते हुए मनमानी कर अपनी जान के साथ ही लोगों की जान को खतरे में डालते रहते हैं।
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हादसों के बाद होती है जानकारी
तमाम अवैध कार्यों की जानकारी भले ही सिपाही से लेकर थानेदार तक को रहती है लेकिन वे हमेशा अनजान बने रहते हैं। घटनाओं के बाद उनकी सक्रियता देखते ही बनती है। वे ऐसा प्रदर्शित करते हैं कि वे लोग अभी तक अनजान थे। कटरागुलाब सिंह बाजार के लोगों आक्रोश में थे। उनका कहना था कि पुलिस जानते हुए भी आतिशबाजी करने वालों को खुली छूट दे रखी थी। जिससे पड़ोस के लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ था।
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दिखावे को बना लेते हैं गोदाम
लाइसेंसधारक आतिशबाज पर्वों के दौरान अधिकारियों को दिखावे के लिए गोदाम बना लेते हैं। हकीकत में वे गोदाम का प्रयोग ही नहीं करते। यह जानते हुए भी कि बारूद से उनके परिवार के साथ ही आसपास के लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है लेकिन बावजूद वे मनमानी करते रहते हैं। लोगों का कहना है कि आतिशबाज चांद बाबू ने भयहरणनाथ धाम रोड पर गोदाम बना रखा था। हकीकत यह है कि उस गोदाम में कभी भी कोई काम करते नहीं दिखा।