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संदिग्ध दशा में नदी में मिला पूर्व बीडीसी सदस्य का शव

Sat, 20 Jun 2020 12:39 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2020 12:39 AM IST
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crime - फोटो : PRATAPGARH
घुइसरनाथधाम। संदिग्ध परिस्थितियों में सई नदी में पूर्व बीडीसी सदस्य का शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी हुई है। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव घर पहुंचने पर परिजनों में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से उसकी मौत की पुष्टि हुई है।
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लालगंज कोतवाली के खालसा सादात पंडित का पुरवा निवासी अमर बहादुर यादव (40) पुत्र रामशरण पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य था। वह अपने भाइयों के साथ किराए पर वाहन चलवाता था। गुरुवार को वह और उसका भाई सुनील यादव अलग-अलग वाहन लेकर बुकिंग पर गए थे। रात को दोनों लौटे और खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच अमर बहादुर ने भाई सुनील से बोलेरो की चाभी मांगी और कमरे में मोबाइल चार्जिंग में लगाकर चला गया। करीब दो घंटे बाद रात साढ़े बारह बजे उसकी बोलेरो सांगीपुर इलाके के बाबा घुइसरनाथधाम स्थित सई नदी के पुल पर खड़ी मिली। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। बोलेरो का गेट खुला था, लेकिन अमर बहादुर नदारद मिला। काफी खोजबीन के बाद जब वह नही मिला तो पुलिस शक के आधार पर नदी में तलाश करने लगी। गोताखोरों व छुट्टी पर आए फौजी सुशील मिश्रा की मदद से सुबह पूर्व बीडीसी सदस्य का शव नदी में मिला। घटना की जानकारी पर सीओ जगमोहन सिंह भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकलवाया और भाई रामचंद्र यादव से इत्तेफाकिया घटना की तहरीर लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद अपराह्न ढाई बजे जब उसका शव घर पहुंचा तो परिजन भड़क गए। जानकारी पर लालगंज कोतवाल राकेश भारती पहुंचे और परिजनों को निष्पक्ष जांच व कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को अंतिम संस्कार के लिए भेजवाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूर्व बीडीसी सदस्य की मौत पानी में डूबने से होने की पुष्टि हुई है। सांगीपुर के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला लग रहा है। अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।
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परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
लालगंज के खालासा सादात के पूर्व बीडीसी सदस्य अमर बहादुर यादव की मौत पर परिजनों ने सवाल उठाए हैं। पुलिस इसे भले ही आत्महत्या मान कर चल रही हो, लेकिन घटनाक्रम कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। अमर बहादुर को फोन कर किसने और कहां बुलाया था, यह रहस्य भी उसकी मौत के साथ अनसुलझा रह गया। इतना ही साफ हो सका है कि जिसने बोलेरो की बुकिंग के लिए फोन किया था, गांव के समीप बड़ी नहर का रहने वाला है। पुलिस उससे भी पूछताछ कर रही है। उधर, घटना स्थल सई नदी पुल पर खड़ी बोलेरो का गेट खुला था और मृतक का एक चप्पल गाड़ी में ही पड़ा था। दूसरा चप्पल पुल पर मिला। साफ है कि नदी में छलांग लगाने वाला या तो चप्पल पहनकर कूदता या फिर दोनों चप्पल एक ही जगह मिलता। गेट भी खुला रहने का रहस्य किसी की समझ में नहीं आया। भाई सुनील ने बताया कि वह बोलेरो लेकर बुकिंग से लौटा तो मीटर रीडिंग नोट कर लिया था। उसके बाद अमर बहादुर बोलेरो लेकर निकला तो कुल सोलह किलोमीटर चलने के बाद घुइसरनाथधाम पहुंचा था। जबकि उसके घर से घटनास्थल की दूरी मात्र पांच किलोमीटर है। जाहिर है कि अमर बहादुर को आत्महत्या करनी होती तो सीधे घुइसरनाथ धाम पहुंचता। इन सवालों ने परिजनों के साथ ही पुलिस को भी उलझा रखा है।
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