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डॉक्टर ने इस्तीफा देने की ठानी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 09 Apr 2017 12:13 AM IST
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Doctor shimla
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सीएचसी में पांच दिन पहले मारपीट मामले में चिकित्सक ने इस्तीफा देने का मन बना लिया है। उन्होंने अधीक्षक को कह दिया है कि वह अब नहीं आएंगे। हालांकि उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अभी तक वह नहीं माने।
सीएचसी कुंडा में चार मार्च की शाम कुछ लोगों ने दुर्घटना होने के बाद भेदभाव का आरोप लगाते हुए वार्ड ब्वॉय शाह आलम और डॉ. ओपी पटेल से मारपीट की गई थी। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और कार्रवाई की। यही नहीं अस्पताल सहित पूरे जनपद में स्वास्थ्य सेवा बाधित रही। सारा कुछ सामान्य होने के बाद भी डॉ.पटेल बेहद दुखी हैं। उन्होंने फोन पर सीएचसी अधीक्षक डॉ.राजीव त्रिपाठी को केंद्र न आने और जल्द ही इस्तीफा भेजवाने की बात कह दी है। बताया जाता है कि अधीक्षक के बहुत समझाने सुरक्षा देने आदि पर भी वह सहमत नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल केंद्र स्टाफ ने भी इस्तीफा देने की बात पर उनसे बात की लेकिन, वह अभी भी अपनी बात पर अड़े हुए हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव त्रिपाठी के अनुसार केंद्र में चिकित्सक ढूंढकर लाने पड़ते हैं। ऐसी घटनाओं से चिकित्सकों पर विपरीत असर पड़ता है। डा.पटेल हड्ड़ी के डाक्टर हैं और ज्यादातर ऐसे मरीज आते हैं जिनका इलाज अब तक यहीं हो जाता था। अब अगर वह नहीं रहते तो लोगों को इलाहाबाद या जिला अस्पताल जाना पड़ सकता है।
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सीएचसी कुंडा में चार मार्च की शाम कुछ लोगों ने दुर्घटना होने के बाद भेदभाव का आरोप लगाते हुए वार्ड ब्वॉय शाह आलम और डॉ. ओपी पटेल से मारपीट की गई थी। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और कार्रवाई की। यही नहीं अस्पताल सहित पूरे जनपद में स्वास्थ्य सेवा बाधित रही। सारा कुछ सामान्य होने के बाद भी डॉ.पटेल बेहद दुखी हैं। उन्होंने फोन पर सीएचसी अधीक्षक डॉ.राजीव त्रिपाठी को केंद्र न आने और जल्द ही इस्तीफा भेजवाने की बात कह दी है। बताया जाता है कि अधीक्षक के बहुत समझाने सुरक्षा देने आदि पर भी वह सहमत नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल केंद्र स्टाफ ने भी इस्तीफा देने की बात पर उनसे बात की लेकिन, वह अभी भी अपनी बात पर अड़े हुए हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव त्रिपाठी के अनुसार केंद्र में चिकित्सक ढूंढकर लाने पड़ते हैं। ऐसी घटनाओं से चिकित्सकों पर विपरीत असर पड़ता है। डा.पटेल हड्ड़ी के डाक्टर हैं और ज्यादातर ऐसे मरीज आते हैं जिनका इलाज अब तक यहीं हो जाता था। अब अगर वह नहीं रहते तो लोगों को इलाहाबाद या जिला अस्पताल जाना पड़ सकता है।
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