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आदेश दरकिनार, 48 घंटे में नहीं मिल रहा जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र
Fri, 22 Feb 2019 01:14 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 22 Feb 2019 01:14 AM IST
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सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले या फिर इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले लोगों का प्रमाण पत्र नहीं जारी किया जा रहा है। जबकि शासन ने जिला महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र तत्काल और इलाज के दौरान मरीज की मौत होने के 48 घंटे के अंदर उसके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र बगैर किसी शुल्क के जारी करने के लिए आदेश दिया था। मगर प्रतापगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए सीएमओ आफिस और विकास भवन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बच्चों के नामंकन सहित सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र को आनलाइन कर दिया गया है। मगर सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों की जहां आनलाइन फीडिंग नहीं किया जा रही है, वहीं इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ने वाले लोगों का भी नाम नहीं दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। उन्हें सीएमओ आफिस और विकास भवन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मगर अफसर इससे अनजान बने हैं। जबकि योगी सरकारा ने बीते दो माह पहले शासनादेश जारी करते हुए सीएमओ और सीएमएस को आदेश दिया था कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र आनलाइन कर दिया जाए। इलाज के दौरान यदि किसी की मौत होती है तो उसे भी आनलाइन किया जाए। जिससे 48 घंटे के अंदर परिजनों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र मिल जाए। उन्हें धनराशि न खर्च करनी पड़े। सीएमओ आफिस और विकास भवन के साथ लोकवाणी केंद्र का चक्कर न काटना पड़े। मगर बेल्हा में ठीक इसके विपरीत हो रहा है।
बच्चों के दाखिले के दौरान विद्यालयों में सबसे पहले जन्म प्रमाण पत्र की मांग की जाती है। इसके अलावा आधार कार्ड, पैनकार्ड, राशनकार्ड बनवाने के लिए भी जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। दस रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरी कराकर एक शपथ पत्र सीएमओ आफिस में जमा करना होता है। यहां फीडिंग के बाद उसे ग्राम पंचायत अधिकारी के पास भेजा जाता है। वह अपनी रिपोर्ट लगाता है। कुटुंब परिवार रजिस्टर में नाम बढ़ाता है। इसके बाद परिवार के सदस्यों को लोकवाणी केंद्र जाना होता है। आनलाइन आवेदन करना होता है। माह भर बाद रिपोर्ट लगकर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्नी के पेंशन या फिर अन्य सरकारी कार्यालयों में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना पड़ता है। तब कहीं जाकर उसका नाम कुटुंब परिवार रजिस्टर से कटता है। इसके लिए मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस को आदेश दिया गया है कि यदि इलाज के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो बीएसटी को स्कैन करवाकर मृतक के परिजनों को प्रमाणपत्र 48 घंटे के अंदर उपलब्ध करा दें। वहीं महिला अस्पताल के सीएमएस को आदेश दिया गया है कि वह अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात का तत्काल आनलाइन जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं कर रहे हैं तो जांचकर कार्रवाई की जाएगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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बच्चों के नामंकन सहित सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र को आनलाइन कर दिया गया है। मगर सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों की जहां आनलाइन फीडिंग नहीं किया जा रही है, वहीं इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ने वाले लोगों का भी नाम नहीं दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। उन्हें सीएमओ आफिस और विकास भवन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मगर अफसर इससे अनजान बने हैं। जबकि योगी सरकारा ने बीते दो माह पहले शासनादेश जारी करते हुए सीएमओ और सीएमएस को आदेश दिया था कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र आनलाइन कर दिया जाए। इलाज के दौरान यदि किसी की मौत होती है तो उसे भी आनलाइन किया जाए। जिससे 48 घंटे के अंदर परिजनों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र मिल जाए। उन्हें धनराशि न खर्च करनी पड़े। सीएमओ आफिस और विकास भवन के साथ लोकवाणी केंद्र का चक्कर न काटना पड़े। मगर बेल्हा में ठीक इसके विपरीत हो रहा है।
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बच्चों के दाखिले के दौरान विद्यालयों में सबसे पहले जन्म प्रमाण पत्र की मांग की जाती है। इसके अलावा आधार कार्ड, पैनकार्ड, राशनकार्ड बनवाने के लिए भी जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। दस रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरी कराकर एक शपथ पत्र सीएमओ आफिस में जमा करना होता है। यहां फीडिंग के बाद उसे ग्राम पंचायत अधिकारी के पास भेजा जाता है। वह अपनी रिपोर्ट लगाता है। कुटुंब परिवार रजिस्टर में नाम बढ़ाता है। इसके बाद परिवार के सदस्यों को लोकवाणी केंद्र जाना होता है। आनलाइन आवेदन करना होता है। माह भर बाद रिपोर्ट लगकर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्नी के पेंशन या फिर अन्य सरकारी कार्यालयों में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना पड़ता है। तब कहीं जाकर उसका नाम कुटुंब परिवार रजिस्टर से कटता है। इसके लिए मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस को आदेश दिया गया है कि यदि इलाज के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो बीएसटी को स्कैन करवाकर मृतक के परिजनों को प्रमाणपत्र 48 घंटे के अंदर उपलब्ध करा दें। वहीं महिला अस्पताल के सीएमएस को आदेश दिया गया है कि वह अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात का तत्काल आनलाइन जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं कर रहे हैं तो जांचकर कार्रवाई की जाएगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।