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दूसरी विस ने दिया बेल्हा को पहला मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:43 PM IST
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चंद्रप्रकाश उपाध्याय
1957 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव ने बेल्हा को पहला मंत्री दिया था। कांग्रेस के टिकट पर जीतकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने राजस्व राज्य मंत्री बनाया था। खादी के बिस्तर पर सोने और आजीवन खादी पहनने वाले शुक्ल ने साइकिल से घूमकर चुनाव लड़ा था। मंत्री बनने के बाद भी वह बस से प्रतापगढ़ आते और रिक्शे से शहर में घूमते थे। आजादी के आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक किसान आंदोलन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
महाराष्ट के जलगांव के चालीस गांव से पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल के पिता प्रतापगढ़ आए थे। पूना से बीए और एलएलबी की डिग्री लेने वाले शुक्ल ने प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद जिला कचहरी में वकालत शुरू कर दी। देश की आजादी के बाद 1952 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर प्रतापगढ़ साउथ से पहला चुनाव लड़ा और विधायक बने। 1957 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव में उन्होंने जनसंघ के प्रत्याशी बाबूलाल को 7723 मतों से हराया था। शुक्ल को कुल 18393 मत मिले थे। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने उन्हें राजस्व राज्यमंत्री बनाया। विधानसभा में वह बेल्हा से पहले मंत्री बने। पट्टी के ऐतिहासिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भगवती प्रसाद शुक्ल अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते थे। चुनाव लड़ने के दिनों से लेकर मंत्री बनने तक वह हमेशा पानी पीने के लिए सुराही साथ लेकर चलते थे। साइकिल से घूमकर प्रचार किया। मंत्री बनने के बाद भी वह रिक्शे से शहर में घूमते थे।
सत्याग्रह आंदोलन में दो बार गए जेल
पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। प्रतापगढ़ में वकालत के दौरान 1939 में वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान नौ महीने के लिए वह जेल गए। जेल से छूटकर आने के बाद भी अंग्रेजों के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहा। इसके चलते 1942 में वह दूसरी बार फिर दो साल के लिए जेल गए।
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बाल गंगाधर तिलक के साथ की थी पढ़ाई
1905 में महाराष्ट्र के चालीस गांव में पैदा हुए पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल की पढ़ाई पूना में हुई थी। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के साथ ग्रेजुएशन और एलएलबी किया था। बाद में उनके पिता प्रतापगढ़ चले आए थे। यहां आकर उन्होंने वकालत शुरू की।
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1957 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव ने बेल्हा को पहला मंत्री दिया था। कांग्रेस के टिकट पर जीतकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने राजस्व राज्य मंत्री बनाया था। खादी के बिस्तर पर सोने और आजीवन खादी पहनने वाले शुक्ल ने साइकिल से घूमकर चुनाव लड़ा था। मंत्री बनने के बाद भी वह बस से प्रतापगढ़ आते और रिक्शे से शहर में घूमते थे। आजादी के आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक किसान आंदोलन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
महाराष्ट के जलगांव के चालीस गांव से पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल के पिता प्रतापगढ़ आए थे। पूना से बीए और एलएलबी की डिग्री लेने वाले शुक्ल ने प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद जिला कचहरी में वकालत शुरू कर दी। देश की आजादी के बाद 1952 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर प्रतापगढ़ साउथ से पहला चुनाव लड़ा और विधायक बने। 1957 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव में उन्होंने जनसंघ के प्रत्याशी बाबूलाल को 7723 मतों से हराया था। शुक्ल को कुल 18393 मत मिले थे। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने उन्हें राजस्व राज्यमंत्री बनाया। विधानसभा में वह बेल्हा से पहले मंत्री बने। पट्टी के ऐतिहासिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भगवती प्रसाद शुक्ल अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते थे। चुनाव लड़ने के दिनों से लेकर मंत्री बनने तक वह हमेशा पानी पीने के लिए सुराही साथ लेकर चलते थे। साइकिल से घूमकर प्रचार किया। मंत्री बनने के बाद भी वह रिक्शे से शहर में घूमते थे।
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सत्याग्रह आंदोलन में दो बार गए जेल
पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। प्रतापगढ़ में वकालत के दौरान 1939 में वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान नौ महीने के लिए वह जेल गए। जेल से छूटकर आने के बाद भी अंग्रेजों के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहा। इसके चलते 1942 में वह दूसरी बार फिर दो साल के लिए जेल गए।
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बाल गंगाधर तिलक के साथ की थी पढ़ाई
1905 में महाराष्ट्र के चालीस गांव में पैदा हुए पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल की पढ़ाई पूना में हुई थी। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के साथ ग्रेजुएशन और एलएलबी किया था। बाद में उनके पिता प्रतापगढ़ चले आए थे। यहां आकर उन्होंने वकालत शुरू की।