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बेसिक स्कूलों में कहीं ताला तो कहीं पशुशाला
प्रतापगढ़ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:08 AM IST
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अधिकारियों की अनदेखी से परिषदीय विद्यालयाें में शिक्षण व्यवस्था दम तोड़ रही है। सालों से दर्जनों स्कूलों में शिक्षकाें की तैनाती तक नहीं हो सकी है। शासन की संचालित तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ भी गरीब बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। सांगीपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामनगर, जरियारी, नसीरपुर, नरवल व ऊछापुर में शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से ताला लटक रहा है।
रामपुर संग्रामगढ़ विकास खंड में सालों से बने पूर्व माध्यकिम विद्यालय अनेहरा, लोहंगपुर, दखवापुर, मोठिन शिक्षक विहीन होने के चलते ताला बंद हैं। लालगंज विकास खंड में पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरायजगत, डिहवा में भी शिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है। लक्ष्मणपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय घूरीपुर में भी शिक्षकों के नहीं होने से समस्या खड़ी हो गई। विद्यालयाें में ताला बंद होने के तहसील क्षेत्र के जिन विद्यालयाें में शिक्षक की तैनाती नहीं होने से ताला बंद है वहां के गरीब बच्चों को न तो मिड-डे-मील का लाभ मिल पा रहा है और न ही छात्रवृत्ति, मुफ्त किताब व ड्रेस उपलब्ध हो सका है।
कभी था स्कूल, अब गायों का डेरा
प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने का कार्य होता है, लेकिन एक विद्यालय ऐसा भी है जहां विद्यालय के कमरों में जानवर बांधे जाते हैं। यही नहीं रसोई घर में भी कुत्तों का जमावड़ा रहता है। विद्यालय की बाउंड्री न होने से अराजकतत्व भी इसमें घुसकर जुआ खेलते हैं।
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बाबागंज विकास खंड के सरायस्वामी गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय के कमरों में मवेशी बांधे जाते हैं। मुख्य कमरे में ही बच्चों को शिक्षक पढ़ाते हैं। इसके अलावा सारे कमरों में अराजकतत्वों का कब्जा है। यही नहीं मुख्य कमरे में भी गांव के अराजकतत्व गंदगी फेंकते हैं। यही नहीं कमरों के खिड़की दरवाजे भी गायब हो गए हैं। बच्चों के लिए बना शौचालय बदहाल स्थिति में है। उसमें न तो सीट है और न ही दरवाजा। विद्यालय आने वाले बच्चों को खुले में ही शौच जाना पड़ता है। विद्यालय की बाउंड्री न होने के कारण पढ़ाई के समय भी तमाम जानवर विद्यालय में घूमते रहते हैं। इस बारे में विद्यालय की प्रधानाध्यापक भागशिला पांडेय ने बताया कि बाउंड्री न होने से विद्यालय में तमाम समस्याएं हैं। किसी तरह से वह बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि इसके पहले उन्होंने इसका सारा दोष प्रधान और कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह पर मढ़ दिया। गांव वालों का आरोप है कि वह 12 बजे ही विद्यालय में छुट्टी कर घर चली गईं जबकि विद्यालय को एक बजे तक चलना चाहिए।
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रामपुर संग्रामगढ़ विकास खंड में सालों से बने पूर्व माध्यकिम विद्यालय अनेहरा, लोहंगपुर, दखवापुर, मोठिन शिक्षक विहीन होने के चलते ताला बंद हैं। लालगंज विकास खंड में पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरायजगत, डिहवा में भी शिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है। लक्ष्मणपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय घूरीपुर में भी शिक्षकों के नहीं होने से समस्या खड़ी हो गई। विद्यालयाें में ताला बंद होने के तहसील क्षेत्र के जिन विद्यालयाें में शिक्षक की तैनाती नहीं होने से ताला बंद है वहां के गरीब बच्चों को न तो मिड-डे-मील का लाभ मिल पा रहा है और न ही छात्रवृत्ति, मुफ्त किताब व ड्रेस उपलब्ध हो सका है।
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कभी था स्कूल, अब गायों का डेरा
प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने का कार्य होता है, लेकिन एक विद्यालय ऐसा भी है जहां विद्यालय के कमरों में जानवर बांधे जाते हैं। यही नहीं रसोई घर में भी कुत्तों का जमावड़ा रहता है। विद्यालय की बाउंड्री न होने से अराजकतत्व भी इसमें घुसकर जुआ खेलते हैं।
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बाबागंज विकास खंड के सरायस्वामी गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय के कमरों में मवेशी बांधे जाते हैं। मुख्य कमरे में ही बच्चों को शिक्षक पढ़ाते हैं। इसके अलावा सारे कमरों में अराजकतत्वों का कब्जा है। यही नहीं मुख्य कमरे में भी गांव के अराजकतत्व गंदगी फेंकते हैं। यही नहीं कमरों के खिड़की दरवाजे भी गायब हो गए हैं। बच्चों के लिए बना शौचालय बदहाल स्थिति में है। उसमें न तो सीट है और न ही दरवाजा। विद्यालय आने वाले बच्चों को खुले में ही शौच जाना पड़ता है। विद्यालय की बाउंड्री न होने के कारण पढ़ाई के समय भी तमाम जानवर विद्यालय में घूमते रहते हैं। इस बारे में विद्यालय की प्रधानाध्यापक भागशिला पांडेय ने बताया कि बाउंड्री न होने से विद्यालय में तमाम समस्याएं हैं। किसी तरह से वह बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि इसके पहले उन्होंने इसका सारा दोष प्रधान और कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह पर मढ़ दिया। गांव वालों का आरोप है कि वह 12 बजे ही विद्यालय में छुट्टी कर घर चली गईं जबकि विद्यालय को एक बजे तक चलना चाहिए।