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एटीएम बने शोपीस, नगदी के लिए भटक रहे लोग
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:19 AM IST
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शहर और गांव के लोगों को 24 घंटे रुपये मुहैया कराने का दावा करने वाले राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम एक बार फिर से शोपीस बन चुके हैं। अधिकांश एटीएम में रुपये ही नहीं डाले जा रहे हैं, तो कुछ एटीएम के शटर हमेशा के लिए डाउन ही रहते हैं। इससे ग्राहकों को जरूरत पड़ने पर नगदी के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों ने एटीएम खोलने में जितनी तेजी दिखाई थी, अब रुपये डालने में उतनी तेजी नहीं दिखा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक लगे एटीएम देखकर ग्राहक वापस हो रहे हैं, मगर बैंक अफसर रुपये डालने को तैयार नहीं है। इससे सबसे अधिक नुकसान उन ग्राहकों का हो रहा है, जिनके घर के मुखिया बाहर रहते हैं और वह अभी तक एटीएम से रुपये निकाल रहे थे। एटीएम के खाली होने वह नगदी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। शहर में सबसे अधिक एटीएम एसबीआई के लगे हुए हैं, मगर उनमें भी अधिकांश एटीएम में रुपये नहीं निकल रहे हैं। आंबेडकर चौराहे पर एसबीआई का लगा एटीएम पूरी तरह निरर्थक साबित हो रहा है। लगभग दो माह से एटीएम की शटर नहीं उठी है। मुख्य चौराहा होने के कारण ग्राहकों की एक बड़ी तादात प्रतिदिन शटर देखकर वापस हो रही है। टीवी अस्पताल के सामने लगा एटीएम भी निरर्थक साबित हो रहा है। सिनेमा रोड, भंगवा चुंगी, कचहरी रोड पर लगे एटीएम में लंबे समय से ताला लटक रहा है। इससे ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैंकों में उमड़ रही ग्राहकों भीड़
एटीएम से रुपये नहीं मिलने के कारण ग्राहकों को बैंकों में लंबी लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। भीषण गर्मी से जूझ रहे ग्राहकों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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नगदी देने के बजाय ट्रांसफर करने में करते हैं विश्वास
बैंकों में आलम यह है कि जब ग्राहक रुपये लेने पहुंचता है, तो काउंटर पर बैठा कर्मचारी कहता है कि इतने रुपये क्या करोगे, जो जरूरत हो ले जाओ। बाकी रुपये जिसे देने हैं, बताओ खाते में ट्रांसफर कर दें। मतलब बैंक नगदी देने से कतरा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राहकों का कहना है कि बैंकों की चेस्ट खाली होने के कारण उन्हें कैश देने से इंकार किया जा रहा है और खातों में रकम ट्र्रांसफर करने की नसीहत दी जा रही है।
नकदी का कोई संकट नहीं है, शहर के सभी एटीएम में पर्याप्त नकदी डाली जा रही है। हां इतना जरूर है, कि डिमांड बढ़ गई है। ग्राहकों के साथ कोई वारदात न हो, इसलिए ऑनलाइन भुगतान पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
जीपी निगम, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई।
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राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों ने एटीएम खोलने में जितनी तेजी दिखाई थी, अब रुपये डालने में उतनी तेजी नहीं दिखा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक लगे एटीएम देखकर ग्राहक वापस हो रहे हैं, मगर बैंक अफसर रुपये डालने को तैयार नहीं है। इससे सबसे अधिक नुकसान उन ग्राहकों का हो रहा है, जिनके घर के मुखिया बाहर रहते हैं और वह अभी तक एटीएम से रुपये निकाल रहे थे। एटीएम के खाली होने वह नगदी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। शहर में सबसे अधिक एटीएम एसबीआई के लगे हुए हैं, मगर उनमें भी अधिकांश एटीएम में रुपये नहीं निकल रहे हैं। आंबेडकर चौराहे पर एसबीआई का लगा एटीएम पूरी तरह निरर्थक साबित हो रहा है। लगभग दो माह से एटीएम की शटर नहीं उठी है। मुख्य चौराहा होने के कारण ग्राहकों की एक बड़ी तादात प्रतिदिन शटर देखकर वापस हो रही है। टीवी अस्पताल के सामने लगा एटीएम भी निरर्थक साबित हो रहा है। सिनेमा रोड, भंगवा चुंगी, कचहरी रोड पर लगे एटीएम में लंबे समय से ताला लटक रहा है। इससे ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बैंकों में उमड़ रही ग्राहकों भीड़
एटीएम से रुपये नहीं मिलने के कारण ग्राहकों को बैंकों में लंबी लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। भीषण गर्मी से जूझ रहे ग्राहकों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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नगदी देने के बजाय ट्रांसफर करने में करते हैं विश्वास
बैंकों में आलम यह है कि जब ग्राहक रुपये लेने पहुंचता है, तो काउंटर पर बैठा कर्मचारी कहता है कि इतने रुपये क्या करोगे, जो जरूरत हो ले जाओ। बाकी रुपये जिसे देने हैं, बताओ खाते में ट्रांसफर कर दें। मतलब बैंक नगदी देने से कतरा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राहकों का कहना है कि बैंकों की चेस्ट खाली होने के कारण उन्हें कैश देने से इंकार किया जा रहा है और खातों में रकम ट्र्रांसफर करने की नसीहत दी जा रही है।
नकदी का कोई संकट नहीं है, शहर के सभी एटीएम में पर्याप्त नकदी डाली जा रही है। हां इतना जरूर है, कि डिमांड बढ़ गई है। ग्राहकों के साथ कोई वारदात न हो, इसलिए ऑनलाइन भुगतान पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
जीपी निगम, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई।