{"_id":"589cacbe4f1c1bc05537b349","slug":"after-nomination-tendor-for-vote","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामांकन के बाद अब वोट का ‘टेंडर’, प्रत्याशियों में घमासान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामांकन के बाद अब वोट का ‘टेंडर’, प्रत्याशियों में घमासान
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 09 Feb 2017 11:36 PM IST
विज्ञापन
चुनाव
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब वोटरों को पाले में करने के लिए प्रत्याशियों के बीच घमासान मच गया है। शहर की बस्तियों, मुहल्लों और चौराहों के साथ गांवों में वोट का ‘टेंडर’ होने लगा है। दरअसल, नेताओं ने हर मोहल्ले, गांव और चौराहों पर दबंग किस्म के लोगों के साथ प्रधानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। उन्हें अपने-अपने इलाके के वोटरों को साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है। वोट बैंक मजबूत करने के लिए छुटभैयों नेताओं का भी सहारा लिया जा रहा है। ऐसे लोग प्रत्याशियों को आश्वासन दे रहे हैं कि उनकी बस्ती और मोहल्ले का सारा वोट उन्हीं के पक्ष में जाएगा।
चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे छुटभैये नेताओं और दबंग किस्म के लोगों की कद्र और पूछ भी तेजी से बढ़ती जा रही है। चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशी खुद तो गांव-बाजार और मोहल्लों की खाक छान ही रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पर भरोसा कम है। ऐसे में उम्मीदवारों ने वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए नई तरकीब ढूंढी है। अपने खास कारिंदों की मदद से उन्होंने विधानसभा के हर गांव, बाजार, मोहल्ले और चौराहे के प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार करा ली है। अब ऐसे लोगों से अकेले में संपर्क साधा जा रहा है। चुनाव जीतने के बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और हर तरह की सहूलियत उपलब्ध करने के वादे के साथ प्रभाव वाले वोटरों को अपने पक्ष में करने का दांव खेला जा रहा है। कई ग्राम प्रधानों से भी प्रत्याशियों ने वोटरों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए संपर्क साधा है। चौराहों और मोहल्लों की राजनीति तक ही सिमटे ऐसे लोगों की पूछ अचानक बढ़ गई है। प्रत्याशी उन्हें गाड़ी के साथ हर सुविधा मुहैया करा रहे हैं।
हालांकि कई रसूखदार लोगों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वे दरवाजे तक आने प्रत्याशियों को सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। ऐसे प्रभावशाली लोग प्रत्याशियों को तौलना चाहते हैं। पट्टी, रानीगंज और शहर के कुछ रसूखदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सभी दलों के प्रत्याशी संपर्क साध रहे हैं, लेकिन अभी किसी के लिए प्रयास शुरू नहीं किया गया है। आखिरी वक्त तक इंतजार करने के बाद जीत की तरफ बढ़ रहे प्रत्याशी को सपोर्ट किया जाएगा, जिससे बाद में उनसे काम लिया जा सके।
विज्ञापन
मौका भुनाने में जुटे दलाल
विधानसभा चुनाव में कूद प्रत्याशियों की हालत ऐसी हो गई है कि वे अपना वोटबैंक मजबूत करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इसका फायदा दलाल किस्म के लोग उठा रहे हैं। नेताओं के यहां उठने-बैठने और जी-हूजूरी करने वाले लोग नेताओं को वेाट दिलाने और मठाधीशों को उनके पाले में करने का झांसा देकर चूसने में लगे हैं। ऐसे लोगों को नेता भी बखूबी जानते हैं, लेकिन इस वक्त उनकी मांगें पूरी करना और उन पर भरोसा जताना मजबूरी है।
मठाधीशों की चिंता
चुनावी समर में कूदे नेताओं को वोटरों से ज्यादा मठाधीशों की फिक्र है। दरअसल गंवई और चौराहों-मोहल्लों की सियासत में इनका अपना प्रभाव है। ऐसे में प्रत्याशी जानते हैं कि जिधर ये घूमेंगे उधर ही इनके साथ के सैकड़ों वोटर भी पलटी मार जाएंगे। ऐसे में नेताओं ने इन रसूखदारों को पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मठाधीशों के यहां दिन भर में प्रत्याशी कई चक्कर लगा रहे हैं। इज्जत की दुहाई दी जा रही है और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी मांगा जा रहा है।
चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे छुटभैये नेताओं और दबंग किस्म के लोगों की कद्र और पूछ भी तेजी से बढ़ती जा रही है। चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशी खुद तो गांव-बाजार और मोहल्लों की खाक छान ही रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पर भरोसा कम है। ऐसे में उम्मीदवारों ने वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए नई तरकीब ढूंढी है। अपने खास कारिंदों की मदद से उन्होंने विधानसभा के हर गांव, बाजार, मोहल्ले और चौराहे के प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार करा ली है। अब ऐसे लोगों से अकेले में संपर्क साधा जा रहा है। चुनाव जीतने के बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और हर तरह की सहूलियत उपलब्ध करने के वादे के साथ प्रभाव वाले वोटरों को अपने पक्ष में करने का दांव खेला जा रहा है। कई ग्राम प्रधानों से भी प्रत्याशियों ने वोटरों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए संपर्क साधा है। चौराहों और मोहल्लों की राजनीति तक ही सिमटे ऐसे लोगों की पूछ अचानक बढ़ गई है। प्रत्याशी उन्हें गाड़ी के साथ हर सुविधा मुहैया करा रहे हैं।
विज्ञापन
हालांकि कई रसूखदार लोगों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वे दरवाजे तक आने प्रत्याशियों को सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। ऐसे प्रभावशाली लोग प्रत्याशियों को तौलना चाहते हैं। पट्टी, रानीगंज और शहर के कुछ रसूखदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सभी दलों के प्रत्याशी संपर्क साध रहे हैं, लेकिन अभी किसी के लिए प्रयास शुरू नहीं किया गया है। आखिरी वक्त तक इंतजार करने के बाद जीत की तरफ बढ़ रहे प्रत्याशी को सपोर्ट किया जाएगा, जिससे बाद में उनसे काम लिया जा सके।
विज्ञापन
मौका भुनाने में जुटे दलाल
विधानसभा चुनाव में कूद प्रत्याशियों की हालत ऐसी हो गई है कि वे अपना वोटबैंक मजबूत करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इसका फायदा दलाल किस्म के लोग उठा रहे हैं। नेताओं के यहां उठने-बैठने और जी-हूजूरी करने वाले लोग नेताओं को वेाट दिलाने और मठाधीशों को उनके पाले में करने का झांसा देकर चूसने में लगे हैं। ऐसे लोगों को नेता भी बखूबी जानते हैं, लेकिन इस वक्त उनकी मांगें पूरी करना और उन पर भरोसा जताना मजबूरी है।
मठाधीशों की चिंता
चुनावी समर में कूदे नेताओं को वोटरों से ज्यादा मठाधीशों की फिक्र है। दरअसल गंवई और चौराहों-मोहल्लों की सियासत में इनका अपना प्रभाव है। ऐसे में प्रत्याशी जानते हैं कि जिधर ये घूमेंगे उधर ही इनके साथ के सैकड़ों वोटर भी पलटी मार जाएंगे। ऐसे में नेताओं ने इन रसूखदारों को पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मठाधीशों के यहां दिन भर में प्रत्याशी कई चक्कर लगा रहे हैं। इज्जत की दुहाई दी जा रही है और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी मांगा जा रहा है।