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2,653 किसानों का माफ नहीं हुआ कर्ज
Updated Sat, 06 Jan 2018 06:29 PM IST
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प्रतापगढ़। कर्जमाफी के मानक को पूरा करने वाले जिले के करीब 2,653 किसानों को छला गया है। इन किसानों का कर्ज अभी तक माफ नहीं किया गया है। इनमें से कुछ एनआईसी में हुई फीडिंग में गड़बड़ी के चलते किनारे कर दिए गए हैं, जबकि कुछ किसान ऐसे हैं, जिन्हें बैंक कर्मियों ने झटका दे दिया है। अब ये किसान अपनी फरियाद लेकर कभी अफसरों के दरवाजे पर, तो कभी बैंक के चक्कर लगा रहे हैं।
योगी सरकार के सत्ता में आते ही किसानों को कर्जमाफी का तोहफ दिया गया था। सितंबर से कर्जमाफी प्रमाणपत्र वितरण का सिलसिला प्रारंभ हुआ, जो अभी जारी है। जिले के लगभग 41,407 किसानों का 216 करोड़ रुपये कर्ज माफ किया जा चुका है। दिसंबर 2017 के अंतिम सप्ताह में शासन ने पत्र जारी कर ऐसे किसानों से शिकायतें लेने को कहा था, जो मानक पर खरे उतरने के बाद भी कर्ज माफ नहीं किया गया है। 31 दिसंबर तक जिले के 2,653 किसानों ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है कि मानक को पूरा करने के बाद भी कर्ज माफ नहीं किया गया है। इनमें कुछ किसान ऐसे भी हैं, जिनका बैंकों से डाटा तो आया, मगर एनआईसी में फीडिंग के दौरान गड़बड़ी होने के कारण ऋणमाफी की सूची में नाम ही नहीं आया।
संडवा चंद्रिका विकास खंड के लोहंगी गांव निवासी देव नारायण उपाध्याय और बिहार ब्लाक के चकवड़ गांव निवासी शिवसरन का डाटा ब्लाक से आने के बाद भी कंप्यूटर में फीडिंग के दौरान नाम छूटने से कर्जमाफी के दायरे में शामिल नहीं हो पाए। ये किसान अब फरियाद लेकर कभी अफसरों के कार्यालयों और बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि किसानों की शिकायतें मिली हैं, किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच की जा रही है। बैंकों से रिपोर्ट लेकर ऐसे किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगे, जो मानक पर खरा उतर रहे हैं।
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योगी सरकार के सत्ता में आते ही किसानों को कर्जमाफी का तोहफ दिया गया था। सितंबर से कर्जमाफी प्रमाणपत्र वितरण का सिलसिला प्रारंभ हुआ, जो अभी जारी है। जिले के लगभग 41,407 किसानों का 216 करोड़ रुपये कर्ज माफ किया जा चुका है। दिसंबर 2017 के अंतिम सप्ताह में शासन ने पत्र जारी कर ऐसे किसानों से शिकायतें लेने को कहा था, जो मानक पर खरे उतरने के बाद भी कर्ज माफ नहीं किया गया है। 31 दिसंबर तक जिले के 2,653 किसानों ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है कि मानक को पूरा करने के बाद भी कर्ज माफ नहीं किया गया है। इनमें कुछ किसान ऐसे भी हैं, जिनका बैंकों से डाटा तो आया, मगर एनआईसी में फीडिंग के दौरान गड़बड़ी होने के कारण ऋणमाफी की सूची में नाम ही नहीं आया।
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संडवा चंद्रिका विकास खंड के लोहंगी गांव निवासी देव नारायण उपाध्याय और बिहार ब्लाक के चकवड़ गांव निवासी शिवसरन का डाटा ब्लाक से आने के बाद भी कंप्यूटर में फीडिंग के दौरान नाम छूटने से कर्जमाफी के दायरे में शामिल नहीं हो पाए। ये किसान अब फरियाद लेकर कभी अफसरों के कार्यालयों और बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि किसानों की शिकायतें मिली हैं, किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच की जा रही है। बैंकों से रिपोर्ट लेकर ऐसे किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगे, जो मानक पर खरा उतर रहे हैं।
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